चौरई में आग का कहर: 80-90 एकड़ गेहूं की फसल जलकर राख, दमकल नहीं पहुंची
किसानों ने खुद बुझाई आग, प्रशासन देर से पहुंचा; मुआवजे की मांग तेज
गेहूं की फसल में आग – चौरई में 80-90 एकड़ गेहूं की फसल जलकर राख
Chhindwara 27 March 2026
छिंदवाड़ा यशो:- चौरई विधानसभा क्षेत्र के ग्राम चिकली खुर्द में भीषण आग से करीब 80-90 एकड़ में खड़ी गेहूं की फसल जलकर पूरी तरह नष्ट हो गई। दोपहर करीब 1:30 बजे लगी आग ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
🚨 खेतों में आग का कहर
- 80-90 एकड़ में गेहूं की फसल जलकर नष्ट
- किसानों ने खुद आग बुझाने का किया प्रयास
- दमकल समय पर नहीं पहुंची
- 👉 प्रशासन पहुंचा तब तक सब कुछ जल चुका था
चौरई के चिकली खुर्द में किसानों पर टूटा संकट
ग्राम चिकली खुर्द (तहसील चांद) में अचानक लगी आग ने पूरे गांव के किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। खेतों में खड़ी गेहूं की फसल जलकर राख हो गई, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश और निराशा का माहौल है।
दमकल नहीं पहुंची, किसानों ने खुद संभाला मोर्चा
घटना के बाद किसानों ने आग बुझाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन आग इतनी तेज थी कि काबू नहीं पाया जा सका। सबसे बड़ी चिंता की बात यह रही कि मौके पर समय पर दमकल नहीं पहुंची।
प्रशासन की देरी से बढ़ा नुकसान
किसानों ने तत्काल जिला कलेक्टर को सूचना दी, जिसके बाद राजस्व अमला तहसील चांद से करीब 2:30 बजे मौके पर पहुंचा। लेकिन तब तक अधिकांश फसल जलकर नष्ट हो चुकी थी।
CM के दौरे के बीच किसानों की अनदेखी पर सवाल
घटना के समय प्रदेश के मुख्यमंत्री छिंदवाड़ा में सड़क हादसे के पीड़ितों से मिलने पहुंचे थे, वहीं दूसरी ओर किसानों की फसल आग में जलती रही। इस स्थिति ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
किसानों ने मांगा तत्काल सर्वे और मुआवजा
प्रभावित किसानों में बलवान वर्मा, सूरज वर्मा, विनोद वर्मा, इंद्रकुमार वर्मा, राजेंद्र वर्मा, धनराज वर्मा, संतोष वर्मा और जागलाल वर्मा सहित अन्य कृषक शामिल हैं। सभी ने प्रशासन से तत्काल सर्वे कराकर मुआवजा देने की मांग की है।
“नरवाई जलाते तो तुरंत पहुंच जाता प्रशासन”
अखिल भारतीय लोधी लोधा लोध महासभा के प्रदेश मंत्री एडवोकेट देवेंद्र वर्मा ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि किसान नरवाई जलाते, तो प्रशासन तुरंत कार्रवाई करता, लेकिन यहां किसानों की फसल जलने पर देर से प्रतिक्रिया मिली।
👉 किसानों की मेहनत राख, अब मुआवजे का इंतजार





