गोटमार मेले में पत्थरों की बरसी ‘बारिश’, 639 से ज्यादा घायल; 7 गंभीर, 3 की टूटी हड्डियां
पांढुर्णा-सावरगांव के बीच जाम नदी में खूनी परंपरा का रोमांच, झंडा तोड़ते ही थमा पत्थरबाजी का दौर; गंभीर घायलों को नागपुर और वरुड किया गया रेफर
गोटमार मेला पांढुर्णा – 639 से ज्यादा घायल, 7 गंभीर; 3 की टूटी हड्डियां
Chhindwara 11. September 2026
छिंदवाड़ा/पांढुर्णा यशो:- पांढुर्णा में परंपरागत गोटमार मेला इस बार भी रोमांच और खतरनाक पत्थरबाजी के बीच संपन्न हुआ। जाम नदी के बीच पलाश के पेड़ पर लगाए गए झंडे पर कब्जे को लेकर पांढुर्णा और सावरगांव पक्ष के लोग आमने-सामने आ गए। दोनों ओर से जमकर पत्थर चले।
पत्थरबाजी की चपेट में आकर 639 से अधिक लोगों के घायल होने की सूचना सामने आई है। इनमें सात लोगों के सिर में गंभीर चोटें आईं, जबकि तीन खिलाड़ियों के पैर की हड्डी टूटने की जानकारी है।
गंभीर रूप से घायल तीन लोगों को नागपुर और एक घायल को वरुड रेफर किया गया।
गोटमार के दौरान हजारों लोग जाम नदी के दोनों किनारों पर मौजूद रहे। परंपरा के अनुसार मां चंडी देवी की पूजा-अर्चना के बाद नदी के बीच पलाश के पेड़ पर झंडा लगाया गया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच पत्थरबाजी का दौर शुरू हुआ।
झंडा तोड़ते ही थमा पत्थरों का सिलसिला
गोटमार में पांढुर्णा पक्ष के लोग सावरगांव पक्ष की ओर से लगाए गए झंडे और पलाश के पेड़ पर कब्जा करने के लिए पत्थरबाजी करते हैं। इस दौरान सावरगांव पक्ष की ओर से भी जवाबी पत्थरबाजी की जाती है।
घंटों चले इस खतरनाक खेल के दौरान कई लोग पत्थरों की चपेट में आए। जानकारी के अनुसार तीन खिलाड़ियों के पैर की हड्डियां टूट गईं, सात खिलाड़ियों के सिर में चोट आई, जबकि एक खिलाड़ी की नाक में गंभीर चोट लगने की बात सामने आई है। गंभीर घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर चिकित्सा के लिए अन्य स्थानों पर भेजा गया।
अंततः पांढुर्णा पक्ष द्वारा झंडा तोड़ लिए जाने के बाद गोटमार का समापन हुआ। इसके बाद दोनों पक्षों के लोगों ने मां चंडी देवी की पूजा-अर्चना की।
पुलिस-प्रशासन की मौजूदगी, फिर भी पत्थरबाजी पर नहीं लगी पूरी लगाम
गोटमार मेले के दौरान पुलिस और प्रशासन की टीम भी सुरक्षा व्यवस्था में तैनात रही। इसके बावजूद पत्थरबाजी के दौरान बड़ी संख्या में लोग घायल हो गए। हर वर्ष की तरह इस बार भी परंपरा और उत्साह के बीच सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।
पत्थरबाजी का यह सिलसिला उस समय तक चलता रहा, जब तक पांढुर्णा पक्ष झंडे पर कब्जा करने में सफल नहीं हो गया।
शराब का नशा भी बना परेशानी का कारण
मेले के दौरान शराब के सेवन को लेकर भी सवाल उठते रहे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ लोग स्थानीय स्तर पर उपलब्ध शराब का सेवन कर मेले में पहुंचे थे। नशे की स्थिति में पत्थरबाजी जैसे जोखिमपूर्ण आयोजन में शामिल होना हादसे की आशंका को और बढ़ा देता है।
गोटमार की परंपरा में शामिल होने वाले लोगों में उत्साह इतना अधिक रहता है कि कई बार सुरक्षा और चोट के खतरे की अनदेखी कर दी जाती है।
विधायक नीलेश उइके ने भी निभाई परंपरा
गोटमार मेले में क्षेत्रीय विधायक नीलेश उइके भी पहुंचे। प्रतिवर्ष की परंपरा के अनुसार उन्होंने पांढुर्णा पक्ष की ओर से सावरगांव पक्ष की तरफ पत्थर फेंककर गोटमार की परंपरा में सहभागिता निभाई।
मेले में हजारों लोगों की मौजूदगी रही और झंडा टूटने के साथ ही गोटमार का यह पारंपरिक आयोजन समाप्त हुआ। इसके बाद दोनों पक्षों ने मां चंडी देवी की पूजा-अर्चना की।
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