विश्व प्रसिद्ध गोटमार मेला आज: पांढुर्ना और सावरगांव के लोग आमने-सामने
जाम नदी के दोनों किनारों से बरसेंगे पत्थर, चंडी माता मंदिर रहेगा मेले का प्रमुख केंद्र; कलेक्टर ने सुरक्षा को लेकर जारी किया प्रतिबंधात्मक आदेश
गोटमार मेला आज: पांढुर्ना-सावरगांव आमने-सामने, प्रतिबंध लागू
Chhindwara 10. September 2026
छिंदवाड़ा/पांढुर्ना यशो:- विश्व प्रसिद्ध गोटमार मेला आज 10 सितंबर को पांढुर्ना में आयोजित होगा। सदियों पुरानी परंपरा के तहत पांढुर्ना और सावरगांव के लोग जाम नदी के दोनों किनारों पर आमने-सामने होकर एक-दूसरे पर पत्थर बरसाते हैं। इसी अनूठी और जोखिम भरी परंपरा के कारण गोटमार मेला देशभर में अपनी अलग पहचान रखता है।
मेले का मुख्य केंद्र चंडी माता मंदिर और जाम नदी क्षेत्र रहता है। मेला शुरू होने से पहले ही नदी के दोनों किनारों पर पत्थरों के ढेर दिखाई देने लगे हैं। परंपरा के अनुसार इन्हीं पत्थरों का इस्तेमाल मेले के दौरान दोनों पक्षों की ओर से किया जाता है।
गोटमार मेले को लेकर एक ओर जहां श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में उत्साह है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती शांति, कानून-व्यवस्था और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की है।
कलेक्टर ने जारी किया प्रतिबंधात्मक आदेश
मेले के दौरान शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने तथा किसी भी अप्रिय स्थिति की संभावना को देखते हुए कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी नीरज कुमार वशिष्ठ ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है।
प्रशासन का यह आदेश 10 सितंबर 2026 की शाम 4 बजे से 12 सितंबर 2026 की सुबह 8 बजे तक प्रभावशील रहेगा।
हथियार और गोफन पर पूर्ण प्रतिबंध
जारी आदेश के अनुसार नगर पालिका क्षेत्र पांढुर्णा एवं गोटमार मेला क्षेत्र में किसी भी प्रकार के धारदार अथवा घातक हथियार लेकर चलने और उनका सार्वजनिक प्रदर्शन करने पर प्रतिबंध रहेगा।
प्रतिबंधित वस्तुओं में चाकू, लोहे की छड़, लाठी, तलवार, भाला, बरछी, फरसा, गंडासा, गोफन एवं अन्य शस्त्र/हथियार शामिल हैं।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मेले के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए इन प्रतिबंधों का पालन अनिवार्य होगा।
मेला क्षेत्र में अस्थायी दुकानें लगाने पर भी रोक
प्रशासन ने गोटमार मेला स्थल तक पहुंच मार्ग पर भी विशेष प्रतिबंध लगाए हैं। गुजरी चौक से हनुमंती वार्ड एवं ग्राम बम्हनी की ओर जाने वाले मार्ग के दोनों ओर अस्थायी दुकानें और ठेले लगाए जाने पर रोक रहेगी।
इसका उद्देश्य मेला क्षेत्र में आवागमन को सुचारू बनाए रखना तथा भीड़ के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होने से रोकना है।
डीजे और तेज आवाज वाले वाद्य यंत्र भी प्रतिबंधित
जाम नदी स्थित मेला स्थल और उसके आसपास 500 मीटर की परिधि में आने वाले पांढुर्णा एवं सावरगांव क्षेत्र के संबंधित वार्डों में ध्वनि विस्तारक यंत्रों, डीजे तथा उच्च तीव्रता वाले वाद्य यंत्रों के उपयोग पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।
प्रशासन द्वारा मेले के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए विभिन्न स्तरों पर सुरक्षा और निगरानी की व्यवस्था की जा रही है।
ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों-कर्मचारियों को छूट
प्रतिबंधात्मक आदेश शासकीय एवं अर्द्धशासकीय निकायों, पुलिस कर्मियों तथा उन अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर लागू नहीं होगा, जिन्हें जिला प्रशासन अथवा पुलिस प्रशासन द्वारा मेले के दौरान शांति एवं सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए विधिवत ड्यूटी पर नियुक्त किया गया है।
सदियों पुरानी परंपरा, प्रशासन के सामने सुरक्षा की चुनौती
गोटमार मेला पांढुर्ना की ऐसी परंपरा है, जिसमें धार्मिक आस्था और स्थानीय लोक संस्कृति के साथ एक अनोखी परंपरा जुड़ी हुई है। हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग इस आयोजन को देखने के लिए पहुंचते हैं।
हालांकि पत्थरबाजी की इस परंपरा के कारण मेले के दौरान सुरक्षा एक महत्वपूर्ण विषय बनी रहती है। यही वजह है कि प्रशासन ने पहले से प्रतिबंधात्मक आदेश जारी कर हथियार, गोफन, अस्थायी दुकानें और तेज आवाज वाले ध्वनि यंत्रों पर रोक लगाई है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था और प्रतिबंधों के बीच सदियों पुरानी यह परंपरा किस तरह संपन्न होती है।
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