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धर्ममध्यप्रदेशसिवनी

मानव जीवन इस प्रकृति का एक अनमोल उपहार है जिसके लिए देवता भी लालायित रहते है – श्रीरामजीवन शास्त्री

सदगुरु कबीर साहेब की मूर्ति का अनावरण,त्रि दिवसीय आध्यात्मिक सत्संग


छपारा पलारी के निकट स्थित ग्राम मानेगांव में आयोजित त्रि दिवसीय आध्यात्मिक सत्संग समारोह आश्रम (मंदिर ) के लोकार्पण कार्यक्रम के प्रथम दिवस पर कार्यक्रम के सभापति कबीर दर्शनाचार्य श्री रामजीवन शास्त्री साहेब सदगुरु कबीर आश्रम आचार्य पीठ सागर के पावन कर कमलों द्वारा नवनिर्मित सदगुरु कबीर मंदिर में सदगुरु कबीर साहेब की मूर्ति का अनावरण किया गया। इसके पश्चात दीप प्रज्वलित कर सदगुरु के स्वरूप पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। आयोजन समिति के सभी सदस्यों एवं विभिन्न अंचलों से आए हुए भक्त जनों, महिला मंडलों के द्वारा पुष्पमाला एवं पुष्प गुच्छ से सद्गुरु का स्वागत कर आशीर्वाद प्राप्त किया। नैनपुर से आईं कबीर भजन गायिका श्रीमती गीता धनेश्वरी के द्वारा कबीर भजन, स्वागत भजन का गायन किया गया।
इस पावन अवसर पर पूज्य आचार्य श्री रामजीवन शास्त्री साहेब जी ने सभा में उपस्थित भक्तजनों को सत्संग की महिमा बताते हुए कहा कि सत्संग मानव जीवन की एक पाठशाला है जहां पर मानव को सही अर्थ में मानव बनने का पाठ पढ़ाया जाता है। आदर्श जीवन जीने की कला सिखाई जाती है। श्रेष्ठ परिवार, श्रेष्ठ समाज एवं श्रेष्ठ संस्कार जागरण के लिए हमारे मार्ग प्रशस्त होते हैं । क्योंकि मानव जीवन इस प्रकृति का एक अनमोल उपहार है जिसे प्राप्त करने के लिए देवता भी लालायित थे ,देवता भी याचना करते हैं कि हे भारत की भूमि तुम धन्य हो एक बार मुझे मौका मिला तो मैं मैंने देवत्व को प्राप्त कर लिया फिर भी मोक्ष नहीं हो पाया, अबकी बार मौका मिला तो निश्चय ही सत्संग भक्ति कर मोक्ष गति को प्राप्त करूंगा। संसार की अन्य सभी योनियों भोग योनी है लेकिन मनुष्य जीवन मोक्ष योनी है।नर से नारायण बन सकते हैं ।नीर क्षीर का निर्णय, भ्रांति क्या है ,शांति क्या है ,काल क्या है, दयाल क्या है ,बंधन क्या है ,मोक्ष क्या है ,जीवन क्या है, जगत क्या है ,मैं कौन हूं, कहां से आया हूं , कहां जाना है, इस प्रकार गूढ़ ज्ञान रहस्य भेद को हम सत्संग के द्वारा ही निर्णय कर सकते हैं। माताएं अगर सत्संग पारायण हो जाएं तो समाज की, परिवार की तस्वीर बदल सकती है। नारी जागेगी तो विकास गढ़ेगी। सती सावित्री, मीरा, गार्गी, आदर्श मां मदालसा ,आमीन माता ,इंद्रमती इत्यादि मातृशक्ति की आदर्श रही हैं ।उन्हें याद कर हम सभी को धर्म परायण होना है ।जो सत्संग एवं संत गुरुजनों से वंचित होता है उसका जीवन व्यर्थ ही कौड़ी के मोल चला जाता है ।
अंत में सत्संग के उद्देश्य एवं उपाय को बताते हुए कहा कि अगर प्रत्यक्ष में सत्संग ना मिले तो सद्ग्रंथों का अध्ययन ,स्वाध्याय ,चिंतन ,मनन ,भजन करें ।सत्संग से संस्कार ,संस्कार से भक्ति ,भक्ति से ज्ञान और ज्ञान से मोक्ष मुक्ति को प्राप्त कर सकते हैं ।अत: मानव जीवन का परम लक्ष्य मोक्ष ही है जिसे गुरुदेव ने सूक्ष्म रूप से बताया। कार्यक्रम के अंत में सद्गुरु की आरती के पश्चात प्रसाद वितरण कर प्रथम दिन के कार्यक्रम का समापन हुआ।

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