धर्मसिवनी

पुत्र राम जैसा चाहिए ,तो मां को कौशल्या बनना ही होगा

Seoni 12 May 2025
सिवनी यशो:-ब्रह्माकुमारी संस्थान में मनाया गया मातृ दिवस ब्रह्मा कुमारीज के महिला प्रभाव द्वारा आयोजित *सुखी एवं स्वस्थ परिवार के लिए माताओं की भूमिका* विषय पर एक बहुत ही प्रेरणादाई और महा परिवर्तनकारी कार्यक्रम का आयोजन किया गया, कार्यक्रम की शुरुआत 3 मिनट परम मां (परमात्मा) की याद से एवं दीप प्रज्वलन कर किया गया, यह कार्यक्रम ब्रह्माकुमारी संस्थान की जिला प्रमुख ब्रह्माकुमारी ज्योति दीदी, साथ ही ब्रह्माकुमारी गीता दीदी ,सरिता आंधवान जी (महाकौशल प्रांत संस्कृत भारती महिला जिला प्रमुख सिवनी योगाचार्य ), रितु दहिकर जी (वैश्य महासम्मेलन महिला इकाई सिवनी जिला अध्यक्ष) रुक्मणी सनोडीया जी( किसान मित्र संघ की राष्ट्रीय अध्यक्ष) की उपस्थिति में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, कार्यक्रम की मुख्य वक्ता गीता दीदी ने कहा आज समाज की स्थिति को देखकर हम कहते हैं ,आज इस संसार के लोगों को क्या हो गया है , इंसान में इंसानियत नहीं बची, आज के बच्चों में दूर-दूर तक श्रेष्ठ संस्कार दिखाई नहीं दे रहे हैं, लेकिन जब हम संसार के लोगों की बिगड़ी हालातो पर चर्चा करते हैं ,या किसी पर दोषरोपण करते हैं तो उन सब की तरफ से यही आवाज आती है ,कि

*तुम्हारी उंगली पड़कर चला हूं,
तुम्हारी ही तो गोद में पला हूं,
ये दुनिया मुझे बुरा ना कह,
जिस सांचे में तुमने मुझे ढाला है,
उसी में तो ढला हूं।

और यह सच भी तो है हम सब ही तो समाज का निर्माण कर रहे हैं ,इसमें विशेष भूमिका माताओ की है, आज हम जो कहते हैं वह सब नहीं करते, लेकिन हम जो करते हैं ,वह करते है ।आज सभी एक दो को कॉपी करते हैं ,इसलिए यदि हम चाहते हैं ,हमारे बच्चे राम की तरह सात्विक हो ,मर्यादित हो ,अनुशासित हो ,आज्ञाकारी वफादार हों ,हम अपना परिवार ,अपना समाज ,अपना संसार ,को जैसा देखना चाहते हैं ,पहले स्वयं को वैसा बना ले, संसार ऑटोमेटिक हमें कॉपी करने लग जाएगा ।

और बहुत जल्दी हम अपने सपनों का संसार बना सकते हैं ।इसके लिए दीदी ने कहा सुबह से शाम तक की दिनचर्या हमारी भारतीय संस्कृति पर आधारित हो यदि आप श्रेष्ठ परिवार की कामना करते हैं तो आपको स्वयं पर मेहनत करना ही होगा अपनी दिनचर्या को मर्यादित बनाना ही होगा ,इसके लिए कितना भी अपने आप से संघर्ष करना पड़े ,और यदि हम स्वपरिवर्तन नहीं करते हैं, तो स्वस्थ और सुखी परिवार प्राप्त करने की तमन्ना का ही त्याग कर देना चाहिए ।यदि सुख शांति चाहते हैं ,तो कहा जाता है *पवित्रता सुख शांति की जननी है* अपने मन वचन कर्म में जितनी पवित्रता होगी , सात्विकता होगी ,उतना घर में सुख शांतिमय वातावरण बना रहेगा। इसी विषय को और आगे बढाते हुए ज्योति दीदी जी ने आशीर्वचन देते हुए कहा समय की पुकार है ।

माताएं स्वयं सशक्त बने और अपने बच्चों को भी तन से मन से सशक्त बनाएं ,केवल रोटी कपड़ा और मकान प्राप्त करने की शिक्षा ही ना देकर ,उन्हें आध्यात्मिक रूप से भी सशक्त बनाने की आवश्यकता है। संसार जब प्रचंड तूफान का रूप धारण कर लेगा, उस समय आध्यात्मिक शक्ति ही हमें परिस्थितियों से लडऩे की ताकत प्रदान करेगी ।अत: आध्यात्मिकता को किसी भी हालत में अपने जीवन में अपनाने की दृढ़ प्रतिज्ञ करें ।दीदी जी ने कहा जैसा कर्म हम करेंगे हमें देखकर और करेंगे ,सुखी और स्वस्थ परिवार बनाने के लिए स्वयं को आदर्श बनाने की आवश्यकता है,कार्यक्रम में पधारे अतिथि सरिता आंधवान जी ने कहा, कि जननी जन्मभूमि स्वर्गादपि गरीयसी अर्थात जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी श्रेष्ठ है, क्योंकि जननी अपने संतानों के पालन पोषण संवर्धन के लिए अनेक कष्टों को खुशी से सहन करती है।

इसी विषय में रितु दहिकर जी ने कहा कि सभी ईश्वर से सदैव अपने मां के लिए प्रार्थना किया करें क्योंकि ईश्वर से आपके लिए सबसे ज्यादा प्रार्थना करने वाली आपकी मां होती है ।एवं जगत माता बन जितना हो सके अन्य जरूरतमंद बच्चों को सहयोग दें। कार्यक्रम का संचालन आस्था दीदी ने कुशलता पूर्वक किया, एवं अंत में रुक्मणी सानोडीया जी ने एक बहुत ही प्यार परमात्मा से मन को जोड़ देने वाला गीत गाकर परमात्मा की याद में सबको तल्लीन कर दिया। अंत में प्रसाद वितरण कर कार्यक्रम को संपन्न किया गया।

Dainikyashonnati

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