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पोस्टमार्टम में लग गए दो दिन, भटकते रहे मृतक के मासूम बच्चे

जिम्मेदारों ने मानवीय मूल्यों को तारतार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी, मां अस्पताल में भर्ती, मृतक अंकित का शव लेने बच्चे दो दिन भटकते रहे मेडिकल में

कभी अस्पताल से  मृतक का शव कंधे पर लाया जाता है, तो कभी हाथ ठेले से, कभी बैलगाड़ी से तो कभी पोस्टमार्टम करने में अस्पताल प्रबंधनों द्वारा अनावश्यक रूप से देरी की जाती है शव के साथ इस प्रकार की संवेदनहीनता के समाचार आते रहते हैं और यह जताया जाता है कि प्रबंधन मानवीय संवेदनाओं से शून्य है और सरकार के द्वारा संवेदनशीलता की जो बातें कही जाती हैं उसकी धरातल पर क्या स्थिति है यह उजागर होते रहा है हर बार लापरवाहों पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी बेअसर साबित होती है।

सिवनी यशो:- गत दिवस सिवनी नगर में अंकित मिश्रा नामक व्यक्ति को राकेश उर्फ पप्पू ने चाकू मार दिया था । घायल अंकित को उपचारार्थ जबलपुर  मेडीकल कालेज अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहाँ उपचार के दौरान अंकित की मौत हो गयी थी । पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार हत्यारें को पकडऩे में पुलिस ने जी तोड़ मेहनत की परंतु मानवता को शर्मसार करते रहा जबलपुर मेडीकल कालेज अस्पताल का प्रबंधन पर कोई ध्यान नहीं दिया गया । बताया जा रहा है कि जबलपुर में मृत अपने पिता की लाश प्राप्त करने के लिये मृतक का 12 वर्षीय बच्चा एवं 10 वर्षीय बच्ची दो दिन तक पुलिस और मेडिकल काँलेज के चक्कर लगाते रहे । मेडिकल अस्पताल में उनके मृत पिता का पोस्टमार्टम के लिये दो दिन से लाश रखी है परंतु पोस्टमार्टम एक छोटी से गलती के कारण नहीं हो रहा था ।
मासूम बच्चों के पिता की मौत हो चुकी है माँ घायल अवस्था में उपचार के लिये उसी मेडीकल कालेज अस्पताल में भर्ती है इतनी विपरीत परिस्थिती में भी प्रशासनिक लचर व्यवस्था संवेदनहीनता का परिचय दे रही है ।
मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डॉ. अरविंद शर्मा ने बताया कि सोमवार को एमएलसी रिपोर्ट मिलने के बाद मृतक का पोस्टमॉर्टम कराने के बाद शव को परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया है। कोतवाली थाना प्रभारी सतीश तिवारी का कहना है कि पोस्टमॉर्टम के लिए एमएलसी रिपोर्ट आवश्यक नहीं है। रेफरल पर्ची के आधार पर अस्पताल प्रबंधन पोस्टमॉर्टम किया जा सकता था।

अस्पताल प्रबंधन तथा पुलिस विभाग अपना पक्ष रखकर खुद का बचाव कर रहे हैं। इस पूरी घटना से प्रशासनिक लचर व्यवस्था प्रकाश में आई है। ऐसी व्यवस्था की मौत के बाद भी लाश को अपने पोस्टमॉर्टम का इंतजार करना पड़े।
यहाँ बता दें कि सिवनी कोतवाली थाना अंतर्गत 24 मई की रात को ठेले की टक्कर लगने के कारण राकेश उर्फ पप्पू ने अंकित मिश्रा तथा उसकी पत्नी अंजना मिश्रा पर चाकू से हमला कर दिया था। मिश्रा दंपती को उपचार के लिए जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया था। उपचार के दौरान अंकित की 25 मई को मौत हो गई थी। उसकी पत्नी का उपचार मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चल रहा है।

यहाँ यह उल्लेखनीय है कि जिस एंबुलेंस से दोनों को लाया गया था, उसके चालक ने घायल का नाम मनीष मिश्रा दस्तावेजों में लिखवा दिया था। नाम में अंतर होने के कारण मृतक का विगत दो दिनों से पोस्टमॉर्टम नहीं हो रहा था। मृतक का 12 वर्षीय बेटा तथा 10 वर्षीय बेटी पिता के पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल प्रबंधक तथा पुलिस के चक्कर काट रही थी।

 

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