मध्यप्रदेशछिंदवाड़ा

1983 से 35 एकड़ जमीन खाली, एक लाख पौधे तैयार करने वाली जमुनिया नर्सरी बजट और कर्मचारियों के अभाव से जूझ रही

100 एकड़ परिसर में 35 एकड़ भूमि अब भी अनुपयोगी, माचागोरा बांध पास होने के बावजूद सिंचाई संकट; नई फलदार किस्मों के विस्तार पर संसाधनों की कमी बनी बाधा

Jamuniya Nursery Chhindwara : 35 एकड़ जमीन 1983 से खाली, बजट और कर्मचारियों की कमी से प्रभावित फलदार पौध उत्पादन

गोविंद चौरसिया
Chhindwara 15 July 2026
छिंदवाड़ा यशो:-  जिले की सबसे प्रमुख शासकीय फलदार पौध नर्सरियों में शामिल जमुनिया नर्सरी एक ओर हर वर्ष लगभग एक लाख पौधे तैयार कर किसानों, सरकारी विभागों और आम नागरिकों तक पहुंचा रही है, वहीं दूसरी ओर वर्ष 1983 से करीब 35 एकड़ भूमि खाली पड़ी है, जिस पर आज तक फलदार पौधों का विस्तार नहीं हो सका। स्थानीय स्तर पर इसे उद्यानिकी विकास की बड़ी चूक माना जा रहा है।

करीब 100 एकड़ क्षेत्र में फैली इस नर्सरी का संचालन उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा किया जाता है।

वर्तमान में लगभग 40 एकड़ क्षेत्र में पौध उत्पादन किया जा रहा है, जबकि 15 एकड़ में मनरेगा के सहयोग से आम, चीकू और मौसंबी की नई उन्नत किस्मों के पौधे तैयार किए जा रहे हैं। इसके बावजूद लगभग 35 एकड़ भूमि वर्षों से खाली पड़ी है, जिस पर अब तक उत्पादन शुरू नहीं हो पाया।

जमुनिया नर्सरी छिंदवाड़ा में तैयार किए गए फलदार पौधे
छिंदवाड़ा की जमुनिया नर्सरी में तैयार फलदार पौधे, जहां 35 एकड़ भूमि अब भी खाली पड़ी है। उद्यान अधीक्षक सालकराम चौकसे

एक लाख पौधे तैयार, लेकिन संसाधनों का संकट बरकरार

उद्यान अधीक्षक सालकराम चौकसे ने बताया कि इस वर्ष नर्सरी में लगभग एक लाख पौधे तैयार किए गए, जिनमें करीब 50 हजार ग्राफ्टेड (कलमी) फलदार पौधे, 10 हजार बीज से तैयार पौधे, 30 हजार अन्य कलमी पौधे तथा 10 हजार वानिकी एवं शोभायमान पौधे शामिल हैं।

आम की मल्लिका, बॉम्बे ग्रीन, चौसा, अंबिका सुंदर, केसर, अल्फांसो और तोतापुरी जैसी उन्नत किस्मों के मदर प्लांट तैयार किए जा रहे हैं, जिनसे अगले वर्ष बड़े पैमाने पर गुणवत्तापूर्ण पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे।

WCL और नगर निगम ने खरीदे पौधे

चौकसे ने बताया कि वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL) ने लगभग 45 हजार पौधे खरीदे, जिन्हें वन विकास निगम के माध्यम से लगाया जा रहा है। नगर निगम सहित अन्य शासकीय संस्थाओं और आम नागरिकों को भी नर्सरी से पौधे उपलब्ध कराए जाते हैं।

माचागोरा बांध पास, फिर भी पानी और कर्मचारियों की कमी

हैरानी की बात यह है कि नर्सरी से महज 8 किलोमीटर दूर माचागोरा बांध होने के बावजूद सिंचाई व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। नर्सरी में प्रशिक्षित मालियों और श्रमिकों की भी भारी कमी बनी हुई है।

जानकारी के अनुसार यहां 4 से 5 प्रशिक्षित मालियों की आवश्यकता है, जबकि पर्याप्त संख्या में माली उपलब्ध नहीं हैं। इसी तरह वर्तमान में लगभग 10 श्रमिक कार्यरत हैं, जबकि नियमित संचालन के लिए 25 से 30 श्रमिकों की जरूरत बताई जाती है।

35 एकड़ में एप्पल बेर और हाईब्रिड सीताफल लगाने की तैयारी

उद्यान विभाग ने इस वर्ष खाली पड़ी भूमि में एप्पल बेर और बालानगर हाईब्रिड सीताफल लगाने की योजना बनाई है।

प्रस्ताव के अनुसार लगभग 9 हजार सीताफल पौधे लगाए जाएंगे। विभाग का कहना है कि शासन से अनुमति और पर्याप्त बजट मिलने के बाद इस योजना पर अमल किया जाएगा।

बजट की कमी से विस्तार प्रभावित

स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि उद्यानिकी क्षेत्र के विस्तार और फलदार पौध उत्पादन बढ़ाने के लिए अपेक्षित बजट उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। परिणामस्वरूप वर्षों से खाली पड़ी भूमि का समुचित उपयोग नहीं हो सका।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस भूमि पर फलदार पौधों का उत्पादन शुरू किया जाए तो किसानों को बेहतर पौधे उपलब्ध होंगे, फलोत्पादन बढ़ेगा और विभाग की आय में भी वृद्धि हो सकती है।

जिले में उद्यानिकी विभाग की लगभग 10 नर्सरियां संचालित हैं, जबकि वन विभाग की नर्सरियां भी पौध उत्पादन का कार्य करती हैं। पहले प्रत्येक वन परिक्षेत्र में नर्सरी संचालित होती थी, लेकिन वर्तमान में छिंदवाड़ा क्षेत्र की वन नर्सरियों का संचालन सिवनी से किया जा रहा है।

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