UCC पर कांग्रेस अपना रुख स्पष्ट करे: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, बोले- वोट बैंक की राजनीति छोड़ जवाब दे विपक्ष
यूसीसी समिति ने मुख्यमंत्री को सौंपी अंतिम रिपोर्ट, अनुसूचित जनजातियों को दायरे से बाहर रखने की अनुशंसा
भोपाल यशो :- मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा है कि अब विपक्ष को इस महत्वपूर्ण विषय पर अपना स्पष्ट रुख सामने रखना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस हर मुद्दे को हिंदू-मुस्लिम और वोट बैंक की राजनीति के नजरिए से देखती है।
सोमवार को विधानसभा पहुंचकर पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कैलाश जोशी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद मुख्यमंत्री ने मीडिया से चर्चा में कहा कि यूसीसी पर गठित उच्च स्तरीय समिति अपनी अंतिम रिपोर्ट उन्हें सौंप चुकी है। उन्होंने कहा कि यह समय राजनीतिक अस्पष्टता का नहीं, बल्कि स्पष्ट विचार रखने का है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यूसीसी को लेकर सभी धर्मों के लोगों ने खुलकर अपने सुझाव और विचार दिए हैं, लेकिन कांग्रेस ने अब तक इस विषय पर अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट नहीं किया है। उन्होंने कहा कि चाहे यूसीसी का विषय हो या भोजशाला का, कांग्रेस हर मुद्दे को वोट बैंक की राजनीति से जोड़कर देखती है।
समिति ने सौंपी अंतिम रिपोर्ट
13 जुलाई को यूसीसी के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपी। मुख्यमंत्री ने समय-सीमा में प्रतिवेदन प्रस्तुत करने पर समिति के अध्यक्ष एवं सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर समिति के सदस्य प्रो. गोपाल शर्मा, बुधपाल सिंह, शोभा पैठणकर तथा सदस्य सचिव अजय कटेसरिया उपस्थित रहे।
तीन खंडों में तैयार हुई रिपोर्ट
समिति द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन तीन खंडों में तैयार किया गया है। पहले खंड में विभिन्न अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय कानूनों और परंपराओं के अध्ययन के आधार पर अनुशंसाएं दी गई हैं। दूसरे खंड में प्रस्तावित विधेयक का प्रारूप शामिल है, जिसमें 4 भाग, 404 धाराएं और 7 अनुसूचियां प्रस्तावित की गई हैं। तीसरे खंड में जिला, राज्य एवं ऑनलाइन माध्यम से प्राप्त जन-परामर्श का विस्तृत विश्लेषण शामिल है।
9.58 लाख से अधिक सुझाव मिले
समिति को यूसीसी के संबंध में 9.58 लाख से अधिक जन-परामर्श प्राप्त हुए। रिपोर्ट में इन सुझावों का प्रश्नवार, लिंगवार और समुदायवार विश्लेषण किया गया है।
अनुसूचित जनजातियों को बाहर रखने की अनुशंसा
समिति ने अपनी अनुशंसाओं में अनुसूचित जनजातियों को समान नागरिक संहिता के दायरे से बाहर रखने का सुझाव दिया है।



