कफ सिरप से किडनी फेल : 16 बच्चों की मौत, डॉक्टर गिरफ्तार – तमिलनाडु दवा कंपनी पर एफआईआर
प्रदेशभर में सनसनी : स्वास्थ्य विभाग की शिकायत पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, जांच के लिए एसआईटी गठित
एसपी बोले – तमिलनाडु जाएगी एसआईटी, कंपनी पर होगी सख्त कार्रवाई

छिंदवाड़ा पुलिस अधीक्षक अजय पांडे ने बताया कि इस मामले की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित की गई है। यह टीम जल्द ही तमिलनाडु जाकर श्रीसन फार्मेसीटिकल कंपनी की जांच करेगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।
उन्होंने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए आगे और धाराएँ जोड़ी जा सकती हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मृतकों के परिजनों को ₹4-4 लाख की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
इन धाराओं में दर्ज हुई एफआईआर
- भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 276 – औषधियों में मिलावट
- धारा 105(3) – हत्या की श्रेणी में न आने वाला आपराधिक मानव वध
- ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक एक्ट 1940 की धारा 27(ए) एवं 26
इन धाराओं में 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है।
छिंदवाड़ा के 14 और बैतूल के 2 बच्चों की मौत
एडीएम धीरेन्द्र सिंह ने बताया कि अब तक 16 बच्चों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। इनमें परासिया के 11, छिंदवाड़ा के 2, चौरई का 1 और बैतूल जिले के 2 बच्चे शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार सभी पीड़ित परिवारों को ₹4 लाख की सहायता राशि दी जा रही है। वर्तमान में 8 बच्चे इलाजरत हैं — इनमें 4 सरकारी अस्पताल, 1 एम्स, और 3 निजी अस्पतालों में भर्ती हैं।
कब्र से शव निकालकर हुआ पोस्टमार्टम
एडीएम श्री सिंह ने बताया कि परासिया की 2 वर्षीय बच्ची योजिता ठाकरे के शव का कब्र से निकालकर पोस्टमार्टम कराया गया है।
यह कार्य पाँच डॉक्टरों की टीम द्वारा किया गया,
जिसकी रिपोर्ट जल्द पुलिस को सौंपी जाएगी।
साथ ही ड्रग इंस्पेक्टरों की टीम जिलेभर की मेडिकल दुकानों में प्रतिबंधित दवाओं की जांच कर रही है।
नागपुर के डॉक्टरों की भूमिका पर भी उठे सवाल
रिपोर्टों के अनुसार –
अधिकांश बच्चों का इलाज नागपुर के निजी डॉक्टरों द्वारा किया गया था।
आरोप है कि जब लगातार बच्चों की किडनी फेल होने के मामले सामने आ रहे थे,
तब भी नागपुर के डॉक्टरों ने छिंदवाड़ा के चिकित्सकों को सतर्क नहीं किया,
जिससे समय पर उपचार की दिशा नहीं बदली जा सकी।
परिजनों का कहना है कि –
यदि समय पर सूचना दी जाती तो शायद कुछ बच्चों की जान बचाई जा सकती थी।
इस पर भी प्रशासन जांच कराने की तैयारी में है।
मुख्य बिंदु एक नज़र में
- स्वास्थ्य विभाग की शिकायत पर डॉक्टर और दवा कंपनी पर एफआईआर
- डॉक्टर प्रवीण सोनी गिरफ्तार, सस्पेंड
- 16 बच्चों की मौत, 8 इलाजरत
- तमिलनाडु की दवा कंपनी पर होगी एसआईटी जांच
- मुख्यमंत्री ने 4-4 लाख रुपये की सहायता राशि घोषित की



