धर्मसिवनी

कृष्ण हमारी आत्मा के सबसे निकट है – स्वामी प्रज्ञानानंद जी महाराज

कथा से आत्मा में आनंद मिलता है और वही परमानंद है

Seoni 20 March 2025
सिवनी यशो:-आज की कथा में महाराज जी ने कहा कि,भगवान की कथा वह है जो जीवन की व्यथा दुख संताप को मिटा दे। कथा प्रयत्न से नहीं मिलती कृपा से भी नहीं मिलती अपितु कथा मिलती है तो अति हरिकृपा से जिस क्षण हमारे पद भगवत कथा के लिये बढेंगे समझलो अति हरिकृपा हो गई है। कथा कहने की परंपरा गोपियों से ही आई है गोपियाँ भगवान के विरह में जो गाती हैं गुनगुनाती हैं वह कथा है। गोपियों ने भगवान को बुध्दि से नहीं पाया है,समर्पण से पाया है। सती ने बुध्दि से जानना चाहा तो स्वयं शिव से भी परे हो गर्इं। भगवान को यदि पाना है तो प्रेम से ही पा सकते हैं

आहार से पेट की भूख मिटेगी ज्ञान से आत्मा की तृप्ति होती है और कथा सुनने से जो आत्मा में आनंद होता है वही परमानंद है। कथा में शब्द के माध्यम से स्वयं कृष्ण ही हमारे अंदर जा रहे हैं तभी तो हमारा हृदय आत्मा में ही रमण करने लगता है। कथा औषधि है रसायन है, महाराज जी कहते हैं बैकुंठ न्यायालय है और वृंदावन औषधालय है। भगवान वृज में निवास करते हैं अपने भक्तों के लिये मिट्टी भी खाते हैं। व्रज की व्याख्या करते हुये कहा ब्रम्ह की रज जहाँ कण कण में व्याप्त है ही वृज है। हमें हमारे सतकर्मों को भगवान को ही समर्पित कर देना चाहिये तब वह कर्म हमें जीवनमुक्त कर देते हैं। कृष्ण हमारी आत्मा के सबसे निकट हैं।

महाराज जी ने भगवत नाम की बडी महिमा बताई है,नाम जप से ही हम सब का कल्याण है भगवान का नाम कभी भी किसी भी परिस्थति में ले सकते हैं। तुलसी अपने राम को रीझ भजे या खीझ, नाम जप से अजामिल जैसे दुराचारी का भी कल्याण हो गया।

भाय कुभाय अखल आलस हूं,नाम जपत मंगल दिसी दिसहुं।
कहहु कहहु लग नाम बडाई, राम न सकहिं राम गुण गाई।।

आगे कथा में महाराज जी ने विश्व रूप की कथा,दधीचि ऋषी की हड्डियों से बने वज्र से वृत्तासुर का वध की कथा कही। क्रमश: भक्त प्रहलाद की कथा कही भक्त प्रहलाद जी ने एक मनवंतर तक राज्य किया प्रहलाद जी ने भगवान की बार बार कहने पर भगवान से यह मांगा कि दोबारा मेरे मन में मांगने की इच्छा ही न हो,भगवान नरसिंह के अवतार की कथा, हिरणयकश्यप का उध्दार,राजा बलि की कथा कही। सूर्यवंश में भगवान राम के अवतरण,ऋषि विश्वामित्र के साथ वन गमन,वहां सीता जी से विवाह,तत्पश्चात वनवास,वन में कौतुकी लीला,सीता हरण,वानरों के संग लंका में रावण से विजय तत्पश्चात पुन: राम राज्य की स्थापना की कथा कही।

आगे चंद्रवंश की कथा में प्रवेश महाराज यदु के नाम से ही इसका नाम यदुवंश पड़ा,महाराज वसुदेव जिनका नाम आनक दुंदुभि है और माता देवकी के यहाँ रोहणी नक्षत्र में भगवान कृष्ण का कंस के कारागार में अवतरण की कथा आती है। माता देवकी भगवान को पुत्र रूप में देखकर अत्यंत प्रसन्न होती हैं। कथा तो महाराज जी की मुख से अत्यंत ही मधुर लगती है साथ ही संगीत मंडली के द्वारा गाये हुये सुमधुर भजनों से श्रोताओं का मन मोहित हो जाता है।
राम कहानी सुनो रे राम कहानी….
कहत सुनत आवे अखियों में पानी सुनो रे राम कहानी… भगवान बाल रूप में वासुदेव जी की टोकरी में यमुना नदी से गोकुल नंद बाबा के घर आये हैं और गोकुल में बधाईयाँ बज रही हैं

Dainikyashonnati

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!