शराब फैक्ट्री पर छापा, 39 लड़के और 19 लड़कियाँ मिली, सीएम ने कहा दोषियों पर होगी बड़ी कार्यवाही
सिवनी यशो:- बाल श्रम अपराध (child labor crime) की श्रेणी में आता है और सरकार ने बच्चों की अनिवार्य शिक्षा (compulsory education) के लिये प्रावधान भी किया है । बाल श्रम रोकने के लिये सरकार की ओर से हमेशा आदेश जारी होते है वहीं अनिवार्य शिक्षा के लिये सरकार की ओर से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सहायता प्रदान की जाती है बच्चों को भोजन दिया जाता है परंतु जिम्मेदार अधिकारी इस सरकार की मंशा के विपरीत बाल श्रम एवं अनिवर्य शिक्षा के प्रति गंभीर नहीं है । हर शहर कस्बे में छोटे छोटे बच्चे मजदूरी करते हुये, कचरा बीनते हुये या किसी प्रतिष्ठान में काम करते हुये दिख जायेंगे। यहां तक की अनेक प्रकार के जोखिम वाले काम भी छोटे छोटे बच्चों से कराये जाते है ।
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और बचपन बचाओं आंदोलन की छपामार कार्यवाही
इसी प्रकार का एक मामला मध्य प्रदेश के रायसेन जिले से सामने आया है जहाँ एक शराब की फैक्ट्री में 39 लड़के और 19 लड़कियों से तेज अल्कोहल से संबंधित कार्य कराया जा रहा था जिसकी गवाही बच्चो के अल्कोहल से जले हुये हाथ दे रहे है । इन बच्चों को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने छपामार कार्यवाही कर बचाया आज रविवार को मुक्त कराया । राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (National Commission for Protection of Child Rights) ने स्वैच्छिक कार्रवाई संघ जिसे बचपन बचाओं आंदोलन के नाम से ख्याति प्राप्त है के साथ मिलकर यह कार्यवाही की है ।
स्कूल बस में ले जाया जाता था और वे प्रतिदिन 12-14 घंटे काम करते थे
बचपन बचाओ आंदोलन (बीबीए) (Bachpan Bachao Andolan (BBA) ने बताया कि एनसीपीसीआर के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो के नेतृत्व में एक टीम ने रायसेन की सोम डिस्टिलरी (som distilleries raysen) से 58 बच्चों, 19 लड़कियों और 39 लड़कों को मुक्त कराया है ।
उन्होंने बताया कि इन छोटे छोटे “बच्चों के हाथ कठोर रसायनों और अल्कोहल के संपर्क में आने से जल गए थे। उन्हें उनके नियोक्ता द्वारा प्रतिदिन एक स्कूल बस में ले जाया जाता था और वे प्रतिदिन 12-14 घंटे काम करते थे।”
बच्चों की हाथ की स्किन झुलसी मिली
बाल संरक्षण आयोग की टीम ने आज सोम डिस्टलरी में औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान 50 नाबालिग बच्चे शराब बनाते हुए मिले थे। इनमें 20 नाबालिग लड़कियों को भी शराब बनाने के काम में लगाया गया था। बाल आयोग को निरीक्षण के दौरान बच्चों की हाथ की स्किन झुलसी मिली थी।
आबकारी विभाग की नाक के नीचे नाबालिगों से काम करवाया जा रहा था। पूरे मामले में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कार्रवाई का आदेश दिया है।
पुलिस और प्रियंक कानूनगो की जमकर कहासुनी
बता दें कि इस मामले में रायसेन में प्रियंक कानूनगो एक बार फिर सोम फैक्ट्री पहुंचे थे और अधिकारियों और पुलिस से FIR की कॉपी मांगी थी। FIR कॉपी नहीं मिलने से नाराजग़ी जताई थी। इसे लेकर पुलिस और प्रियंक कानूनगो की जमकर कहासुनी हुई थी। फैक्ट्री के मालिक पर तुरंत FIR कराने उमरावगंज थाने पहुंचे थे। आरोप तो यह भी है कि सभी 39 बच्चों को प्रशासन ने अंधेरा का लाभ उठाकर गायब कर दिया ।
सीएम के निर्देश के बाद निलंबित
इस मामले को प्रदेश के मुख्यमंत्री डाँ. मोहन यादव (Dr.Mohan yadav) ने गंभीरता से लेते हुये रायसेन जिले की शराब फैक्ट्री में बाल श्रम पर बड़ा एक्शन लिया है । सीएम के निर्देश के बाद प्रभारी जिला आबकारी अधिकारी केएल अतुलकर सहित 3 उप निरीक्षकों को निलंबित कर दिया गया है । अब मंडीदीप श्रम निरीक्षक राम कुमार श्रीवास्तव को भी निलंबित (Suspended) कर दिया गया है ।
‘दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी’
सोशल मीडिया ‘एक्स (Social Media ‘X’) पर एक पोस्ट में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि फैक्ट्री पर छापेमारी एक गंभीर मामला है। यादव ने लिखा, “श्रम, आबकारी और पुलिस विभाग से विस्तृत जानकारी प्राप्त कर उचित कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”






