धर्मसिवनी

शनिअमावस्या पर हुआ भगवान मुनिसुव्रतनाथ स्वामी का दिव्य महाभिषेक

तीर्थंकर द्वय के ज्ञान एवं निर्वाणोत्सव पर किए गए निर्वाण लाडू समर्पित

Seoni 30 March 2025
सिवनी यशो:- बीते 29 मार्च को अत्यंत दुर्लभ संयोग में शनिवार को पढऩे वाली अमावस्या पर स्थानीय श्री दिगंबर छोटे जैन मंदिर जी में मूल वेदिका पर विराजित देवाधिदेव चैतन्य चमत्कारी 1008 श्री मुनिसुव्रतनाथ भगवान का महामस्ताभिषेक, शांतिधारा एवं अष्ट द्रव्यों के माध्यम से दिव्य जिनार्चना,महा आरती का मांगलिक आयोजन किया गया है।
उल्लेखनीय है कि जैन संस्कृति में रामायण समयुगीन भगवान मुनिसुव्रतनाथ स्वामी की शनि ग्रह के अधिष्ठाता देव के रूप में मान्यता है। ऐसा विश्वास है कि शनि ग्रह से बाधित प्राणी को पीड़ा निवारण हेतु मात्र और मात्र भगवान मुनिसुव्रत नाथ स्वामी की जाप भक्ति आराधना ही दिव्य शरण है।

भगवान मुनिसुव्रतनाथ स्वामी की स्फटिक मणि की विशाल प्रतिमा बड़े दिगंबर जैन मंदिर में है प्रतिष्ठित

वर्ष 2022 में पूज्य श्रुत संवेगी श्रमण मुनि श्री आदित्यसागर जी महाराज की प्रेरणा सानिध्य में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा पूर्वक भगवान मुनिसुव्रत नाथ स्वामी की स्फटिक मणि की अब तक की सर्वाधिक विशाल पारदर्शी हिम सदृश दिव्य भव्य एवं सुंदर प्रतिमा अनेक रत्नमयी जिन बिंबो के साथ रत्न वेदिका में मूल नायक रूप में विराजित की गई है। जिन शासन की यह अनमोल धरोहर श्रद्धालुओ की आस्था का प्रमुख केंद्र है।

अनेक तीर्थ स्थल भारत भू पर

भगवान मुनिसुव्रतनाथ जी से संबंधित अनेक अतिशय तीर्थ भारत वर्ष के विविध प्रांतों में विद्यमान है जिनमे पैंठण,मंगीतूंगी,जन्मस्थली राजग्रही,निर्वाण स्थली सम्मेद शिखर,जहाजपुर, नारेली, झालरा पाटन,केशवराय पाटन,चित्तौड़ दतवाड़,बख्सवाहा, भगनसाहिवरा आदि तीर्थ क्षेत्र श्री जी के अतिशय और चैतन्य चमत्कारो से पल्लवित है। महाराष्ट्र के शम्भाजी नगर के निकट पैंठण तीर्थ में बालू से निर्मित चतुर्थ कालीन प्रतिमा के दर्शनार्थ प्रति शनि अमावस्या को अपने अपने क्षेत्रों से हजारों यात्री सैकड़ों किलोमीटर की पद यात्रा करते हुए श्री क्षेत्र में दर्शनार्थ पहुंचते है।सिवनी छिंदवाड़ा के मध्य झिलमिली ग्राम में नवोदित समर्पण तीर्थ में विराजित मुनिसुव्रत स्वामी की भव्य विशाल प्रतिमा दर्शनीय है।
दिल्ली तिजारा के मध्य धारूहेड़ा हरियाणा के अष्टापद तीर्थ पर विश्व की सबसे बड़ी दिगंबर मुद्रा श्री जी की 151 फिट की अष्टधातु की प्रतिमा की तैयारियां लगभग पूर्णता पर है।

तीर्थंकर द्वय के त्रय कल्याणक

उल्लेखनीय है चैत्रअमावस पर इस वर्ष अनेक दुर्लभ संयोग उपस्थित हुए जहां एक ओर इस बार अमावस शनिवार के दिन आई वही दूसरी और दो जैन तीर्थंकर भगवंतो के तीन कल्याणक भी इसी चैत्र अमावस तिथि पर शाश्वत है।
चौदहवे तीर्थंकर भगवान अनंतनाथ जी का ज्ञान व मोक्ष द्वि कल्याणक जबकि अठारहवे तीर्थंकर भगवान अरहनाथ जी का मोक्ष कल्याणक पर तीर्थंकर द्वय के ज्ञान एवं निर्वाण की आराधना कर निर्वाण लाडू समर्पित किए गए।

इनकी रही उपस्थिति

अनिल नायक,अभय कुमार जैन, जयकुमार एडवोकेट, चंदू बाबू,जिनेश बागड़,संजय नायक,संजय ऑटो,जिनेंद्र जैन,मनोज बाझल,राजा पटेल,विपनेश जैन,पारस जैन, डॉक्टर अपूर्व,आलोक सेठ,सन्मत जैन,आशीष बाझल, प्रफुल्ल बंटी,मोनी बाझल,दीपक पान,प्रदीप जैन,जिनेंद्र जैन,चंदन जैम, निलय राज जैन,शालू चौधरी,राजेश चौधरी,निक्की चौधरी,आदि अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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