21 सूत्रीय मांगों को लेकर मध्य प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ ने प्रदेश भर में सौपा ज्ञापन
मध्य प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ सिवनी जिला इकाई ने भी राज्यपाल के नाम जि़ला कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
सिवनी यशो:- पत्रकारों के हित में निरंतर प्रयासरत मध्य प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ ने आज 01 मई 2024 को श्रम दिवस के उपलक्ष्य पर पत्रकारों के हित में 21 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदेश के राज्यपाल के नाम जि़ला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा । आपको बता दें की प्रति वर्ष संघ के प्रांत अध्यक्ष शलभ भदोरिया के निर्देश पर संघ के संभागीय अध्यक्ष राजेंद्र मिश्रा की अगुवाई में संघ की जिला इकाई के माध्यम से पत्रकार साथी पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने, पत्रकार कल्याण आयोग का गठन करने, भोपाल में पत्रकार भवन की भूमि पुन: पत्रकारों को सोपै जाने ,आयुष्मान योजना का लाभ पत्रकार साथियों को प्रदान करने, पत्रकारों को विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ देने, टोल नाके पर श्रमजीवी पत्रकार संघ के पत्रकार गणों को छूट देने सहित अन्य 21 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदेश के राज्यपाल के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हैं । आपको बता दें की कई वर्षो से मध्य प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ प्रदेश भर श्रम दिवस के उपलक्ष्य में प्रदेश भर के समस्त जिला मुख्यालयो पर ज्ञापन सौंपकर पत्रकारो के हित में अपनी आवाज बुलंद करता आ रहा है । इसी तारतम में कल दोपहर 12:00 बजे सिवनी जिला कलेक्टर कार्यालय पर एकत्रित हो कर विभिन्न मांगों को लेकर जिला कलेक्टर को ज्ञापन सोपा गया है। ज्ञापन सौंपते समय मध्य प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ की सिवनी जिला इकाई के जिला अध्यक्ष मनीष जैन जी, कार्यकारी अध्यक्ष मनोज मर्दन त्रिवेदी जी , कार्यकरी अध्यक्ष (ग्रामीण),
कन्हैया प्रजापति जी , महासचिव रामदास ठाकुर जी, जिला उपाध्यक्ष्य संजीत सिंह बघेल जी, जिला उपाध्यक्ष राजू मेहरा जी, चेतन गांधी जी, बबलू खान जी, द्वारका श्रीवास्तव जी सहित सभी पत्रकार साथी उपस्थित थे।
ज्ञातव्य है कि मध्य प्रदेश श्रमजीव पत्रकार संघ प्रदेश का एकमात्र ट्रेड यूनियन संगठन है जो पत्रकार हितों को लेकर लगातार लड़ाई लड़ता रहा है तथा पत्रकार पेंशन योजना लागू करने, अधिमान्यता तहसील स्तर तक प्रदान करने ,पत्रकारों को आवास उपलब्ध कराने तथा पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर लंबे समय से संघर्ष करता रहा है जिसके चलते सरकारों को मांगे मानकर पत्रकार हितों के लिए कदम उठाने पड़े हैं ।




