📌 अवैध लकड़ी से भरे ट्रैक्टर की फोरव्हीलर से टक्कर, मामला दबाने की कोशिश?
न्यू कर्माझिरी क्षेत्र से 27 नवंबर को लकड़ी से लदे दो ट्रैक्टर कथित रूप से अवैध परिवहन करते हुए निकले थे।
रास्ते में एक ट्रैक्टर की फोरव्हीलर से टक्कर हुई, जिसके बाद वाहन मालिक ने बादलपार चौकी में रिपोर्ट दर्ज कराई।
चौकी प्रभारी ने ट्रैक्टर को ‘अज्ञात’ बताया, जबकि जोगीवाड़ा बीट की वनपाल श्रीमती शशिकला उईके ने स्वीकार किया कि ट्रैक्टर की लोडिंग उत्पादन मंडल के फॉरेस्ट गार्ड द्वारा करवाई गई थी।
ग्रामीणों का कहना है कि इस ट्रैक्टर में इमारती लकड़ी भरी थी और मामले को विभाग द्वारा दबाने की कोशिश हो रही है।
घटना से जुड़ी GPS तस्वीरें, परिवहन रजिस्टर और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही को सार्वजनिक करने की मांग लगातार उठ रही है।
जोगीवाड़ा बीट के जंगल क्षेत्र की फोटो, कटे हुए ठूंठ,बिना हेमर नंबर के[/caption]
सबसे गंभीर तथ्य यह सामने आया है कि जून माह में 'फाइनल निकासी की रिपोर्टिंग होने के बावजूद, न तो काटे गए वृक्षों पर हेमर नंबर डाले गए, न मार्किंग की गई और न ही पातन नंबर। बिना किसी प्रक्रिया के सीधे इमारती लकड़ी और उपयोगी लठ्ठों को कथित तौर पर परिवहन कर दिया गया।
विभागीय नियमों के अनुसार, चट्ठों की कटाई करके, उन पर निर्धारित हेमर नंबर अंकित कर उनकी गिनती कर दक्षिण वन मंडल को हस्तांतरित करना अनिवार्य है।
जो जून माह में ही किया जाना था परंतु
फायनल निकासी के समय उच्चाधिकारियों को भोपाल जो रिपोर्टिंग की गयी वह मनगढंत आंकड़े के अनुसार की गयी और
फायनल निकासी हुई हीं नहीं थी,
वहाँ अनाप सनाप इमराती लकड़ी पड़ी थी जिसे बाद में अवैध तरीके से परिवहन किया गया ।
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जोगीवाड़ा बीट के जंगल क्षेत्र अवैध कटाई की फोटो[/caption]
सूत्रों ने बताया कि-
उत्पादन मंडल द्वारा जो चट्ठे दक्षिण वन मंडल को दिए जाने थे
, उनमें से 319 चट्ठे शार्ट पाए गए।
जिसकी पूर्ति अभी तक नहीं की गयी विदोहन वर्ष बीतने और
फायनल निकासी रिर्पोटिंग के बाद भी पूर्ति के नाम पर अवैध परिवहन और कटाई जारी है जो कि -
विभागीय निर्देशों के विपरीत है और
अब जो कुछ हो रहा है वह अपराध की श्रेणी में आता है ।
ग्रामीणों का कहना है कि यह अंतर कोई त्रुटि नहीं बल्कि
सुनियोजित अनियमितता का परिणाम है।
व्यापारियों ने साजा, धावा, लेंडिया और अन्य उपयोगी प्रजातियों के लठ्ठों को जलाऊ की श्रेणी में बताकर उठाया और कथित रूप से मनमानी ढुलाई की।
वहीं जिन लकडिय़ों का उपयोग नहीं था, उन्हें ईंट भट्टे वालों को बेच दिया गया।
तथा अधिकांश पलाश की लकड़ी मौके पर बिखरे पड़े है तथा
अन्य प्रजाति के वृक्ष भी उसी क्षेत्र में ताजे या कुछ दिन पूर्व कटे हुये पड़े है ।
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फायनल क्लियरिंग होने के छ: माह बाद भी हो रही है कटाई का दृश्य[/caption]
बांस नाममात्र राशि में
इसी प्रकार यहां के बांसो की कटाई में और विक्रय में भी भारी गड़बड़ी होना बताया गया है । इस क्षेत्र का बांस बेहद अच्छी क्वालिटी के थे - जो केवल समिति के माध्यम से चालीस हजार रूपये की नाममात्र राशि में बालाघाट के ठेकेदार को बेच दी गयी । वन विभाग के अंदर भी इस घटनाक्रम को लेकर मतभेद सामने आए हैं। एक ओर कर्मचारी वसूली और दबाव की बात करते हैं, वहीं अधिकारी खुद को मामले से दूर बताते हैं।अधिकारियों के बयान
न्यू कर्माझिरी बसाहट क्षेत्र की फाइनल निकासी जून माह में की जा चुकी है, अब वहाँ उत्पादन वन मंडल का कोई काम नहीं है। यहाँ का अब मेरे पास चार्ज नहीं है। हेमराज वट, एसडीओ, उत्पादन वन मंडल सिवनी
319 चट्ठे शार्ट थे, अब उनकी पूर्ति की जा रही है। 60 चट्ठे सौंप चुके हैं।बरमान मेला भेजने का आदेश हुआ है। मैं कल वहाँ जाकर और स्थिती की जानकारी लेकर आपको विस्तार से बता दूंगा । आर.के. कर्वेती, परिक्षेत्र अधिकारी, उत्पादन वन मंडल अरी
चट्ठे कम मिलने की जानकारी मैंने वरिष्ठ अधिकारियों को भेज दी थी। श्रीमती शशिकला उईके, वनपाल, जोगीवाड़ा बीट, दक्षिण वन मंडलhttps://himachal.punjabkesari.in/himachal-pradesh/news/meaningful-efforts-are-necessary-for-conservation-and-promotion-of-forest-wealth-2106578