वन संपदा लूटने वालों की नज़र में मीडिया दुश्मन – कर्माझिरी विस्थापन स्थल पर कवरेज पर रोक, कटाई जारी
अवैध कटाई, मशीनें चलती रहीं - मीडिया को रोका गया, वीडियोग्राफी पर पाबंदी, विभागीय अधिकारी चुप
सिवनी यशो:- कुरई विकासखंड के कर्माझिरी पुनर्वास क्षेत्र में जंगल कट रहा है, मशीनें चल रही हैं, लकड़ी के ढेर उठाए जा रहे हैं, पर सबसे बड़ा सवाल है — मीडिया को अंदर क्यों नहीं जाने दिया जा रहा?
दैनिक यशोन्नति की टीम जब कवरेज के लिए पहुँची, तो गुंडेनुमा तत्वों ने न वीडियो बनाने दिया, न फोटो। सवाल पूछना तो दूर, अधिकारी फोन तक नहीं उठा रहे। क्या यहाँ सिर्फ जंगल नहीं, सच को भी काटा जा रहा है?
जून में फाइनल निकासी लेकिन नवंबर में भी कटाई
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लगभग 450 एकड़ वन क्षेत्र मैदान में बदल दिया गया, पेड़ गायब, ज़मीन समतल।
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जून 2025 की रिपोर्ट में कहा गया था— “वन संपदा की फाइनल निकासी पूरी”, लेकिन नवंबर 2025 में भी मशीनें कटाई कर रही थीं।
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मौके पर दिख रहे ठेकेदार मीडिया को देखकर अचानक भाग खड़े हुए।
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कटाई स्थल पर मौजूद लोगों ने कहा — “कवरेज करनी है तो विभागीय अफसरों के साथ आओ, वरना अभी निकलो!”
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यह केवल अवैध कटाई नहीं, सूचनाओं की कटाई और लोकतंत्र पर प्रहार है।
📌 “यदि यहां सब कुछ वैध है तो कैमरे और सवालों से डर कैसा?”
कर्माझिरी विस्थापन परियोजना में केवल जंगल नहीं, पारदर्शिता भी गायब है।
जब पत्रकारों को कवरेज से रोका जाता है, वीडियो बनाने नहीं दिया जाता, सवाल पूछने पर धमकाया जाता है — तब यह सिर्फ निर्माण कार्य नहीं, संदेह की जमीन भी तैयार हो रही होती है।
यह सिर्फ वन नीति का मामला नहीं,
यह प्रेस की स्वतंत्रता, सरकारी जवाबदेही और जनहित का विषय है।
🔹 प्रशासन को बताना होगा — किस अधिकार के तहत मीडिया को रोका गया?
🔹 यदि निकासी वैध है, तो कैमरे से डर क्यों?
🔹 क्या वन क्षेत्र की आड़ में करोड़ों की बंदरबांट चल रही है?
दैनिक यशोन्नति इस मामले की लगातार पड़ताल करेगा।
📌 सवाल अब पेड़ों से बड़ा है — जवाबदेही का।




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