2 लाख की रिश्वत लेते नगर पालिका CMO गजानन नाफड़े रंगे हाथ गिरफ्तार, लोकायुक्त की दबिश से मचा हड़कंप
15 लाख के बिल भुगतान के एवज में मांगी थी 4 लाख की रिश्वत, पहली किस्त लेते ही जबलपुर लोकायुक्त ने दबोचा
मंडला CMO गजानन नाफड़े 2 लाख की रिश्वत लेते गिरफ्तार
मंडला यशो :- नगर पालिका मंडला में भ्रष्टाचार के खिलाफ जबलपुर लोकायुक्त ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) गजानन नाफड़े को कथित तौर पर 2 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। लोकायुक्त की यह कार्रवाई नगर पालिका कार्यालय में ही हुई, जिसके बाद पूरे नगरपालिका परिसर में हड़कंप मच गया।

15 लाख के बिल के भुगतान के बदले मांगी थी 4 लाख की रिश्वत
प्राप्त जानकारी के अनुसार जबलपुर निवासी ठेकेदार ज्ञानचंद बेन का नगर पालिका मंडला में निर्माण कार्यों से संबंधित करीब 15 लाख रुपये का बिल भुगतान के लिए लंबित था। बताया गया है कि ठेकेदार के लगभग 40 लाख रुपये के पूर्व लंबित बिलों का भुगतान किया जा चुका था।
आरोप है कि शेष 15 लाख रुपये के बिल के भुगतान के एवज में CMO गजानन नाफड़े द्वारा 4 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की गई थी। दोनों के बीच रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 2 लाख रुपये देने पर सहमति बनी थी।

शिकायत के बाद लोकायुक्त ने बिछाया जाल
रिश्वत की कथित मांग से परेशान ठेकेदार ने मामले की शिकायत जबलपुर लोकायुक्त पुलिस से की। शिकायत के सत्यापन के बाद लोकायुक्त टीम ने कार्रवाई की योजना तैयार की।
तय योजना के अनुसार शुक्रवार को ठेकेदार 2 लाख रुपये की रिश्वत की पहली किस्त लेकर नगर पालिका कार्यालय पहुंचा। जैसे ही कथित तौर पर रिश्वत की रकम CMO गजानन नाफड़े को दी गई, पहले से आसपास तैनात लोकायुक्त की टीम ने कार्रवाई करते हुए उन्हें रंगे हाथ पकड़ लिया।
सर्किट हाउस में चल रही वैधानिक कार्रवाई
कार्रवाई के बाद लोकायुक्त टीम आरोपी CMO को सर्किट हाउस लेकर पहुंची, जहां पंचनामा सहित अन्य वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। टीम द्वारा बिल भुगतान से संबंधित दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।
लोकायुक्त की इस कार्रवाई के बाद नगर पालिका मंडला में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है। मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आगे की कार्रवाई की जा रही है।
नोट: रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार CMO के विरुद्ध मामला जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। आरोपों की अंतिम पुष्टि सक्षम न्यायालय के निर्णय से होगी।



