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सिवनी जैन बड़ा मंदिर में रक्षाबंधन महोत्सव के तृतीय चरण में हुईं मांगलिक क्रियाएं

मुनि श्री धर्म सागर जी और मुनि श्री भाव सागर जी के सान्निध्य में भक्ति, राखी सजाओ प्रतियोगिता और धार्मिक प्रवचन

Seoni 09 August 2025

सिवनी यशो:- श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर, सिवनी (मध्यप्रदेश) में 9 अगस्त 2025 को रक्षाबंधन महोत्सव के तृतीय चरण का आयोजन किया गया।

 इस अवसर पर महासमाधिधारक परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से दीक्षित, परम पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य —

परम पूज्य मुनि श्री धर्म सागर जी महाराज एवं परम पूज्य मुनि श्री भाव सागर जी महाराज के सान्निध्य में, ब्रह्मचारी मनोज भैयाजी (ललितपुर) के निर्देशन में विविध धार्मिक कार्यक्रम हुए।

सुबह की बेला में अभिषेक शांतिधारा, रक्षाबंधन विधान के अर्घ समर्पण, आरती, भक्ति संगीत और मांगलिक क्रियाएं संपन्न हुईं।

अनेक बहनों ने राखी बांधी, मांगलिक क्रियाएं कीं और राखी सजाओ प्रतियोगिता में भाग लिया।

प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार प्रदान किए गए। प्रभु को अनोखी राखी अर्पित की गई और श्री श्रेयांसनाथ भगवान का मोक्ष महोत्सव मनाते हुए निर्वाण लड्डू अर्पण किए गए।

मुनि श्री भाव सागर जी का प्रवचन

धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री भाव सागर जी महाराज ने कहा—

“रक्षाबंधन पर्व प्रत्येक व्यक्ति को धार्मिक, सामाजिक और लोकहित के कार्यों के लिए प्रेरित करता है। यह वात्सल्य और रक्षा का प्रतीक है। स्वयं की परवाह न करते हुए दूसरों की रक्षा करना ही सच्चा ‘रक्षा बंधन’ है।”

उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब रिश्ते कमजोर हो रहे हैं, रक्षाबंधन भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को मजबूत बनाता है।

इस पर्व का ऐतिहासिक, सामाजिक, धार्मिक और राष्ट्रीय महत्व है। राखी केवल भाई की कलाई पर ही नहीं, बल्कि देश, पर्यावरण, धर्म और जनहित की रक्षा के लिए भी बांधी जाने लगी है।

मुनि श्री ने यह भी कहा कि यह पर्व हमें नारी शक्ति की रक्षा, आपसी सहयोग और सामाजिक मूल्यों को संरक्षित रखने की प्रेरणा देता है।

रक्षाबंधन को ‘विष तारक’ (विष को नष्ट करने वाला) और ‘पुण्य प्रदायक’ भी कहा जाता है। यह पर्व रिश्तों में नई ऊर्जा और आत्मीयता का संचार करता है।

Dainikyashonnati

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