मक्का थैली 1400 रुपये में थमाई, किसानों ने उठाए सवाल
बिना रेट निर्धारण के सोसायटी प्रबंधक कर रहे बीज वितरण, बारिश रुकी तो बढ़ी चिंता
Chhindwara 11 June 2025
छिंदवाड़ा यशो :-खरीफ सीजन की तैयारी में जुटे किसानों के सामने अब नई परेशानियां खड़ी हो गई हैं। एक ओर जहां बारिश थमने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें हैं, वहीं दूसरी ओर सोसायटी प्रबंधकों द्वारा बिना निर्धारित रेट के मक्का बीज की थैली 1400 रुपये में देने पर किसानों में आक्रोश है।
जून महीने की शुरुआत के साथ ही किसान मक्का की बोनी की तैयारी में जुट जाते हैं। कुछ किसानों ने प्री-मानसून के बाद खेतों की तैयारी कर बोनी भी शुरू कर दी थी, लेकिन अब मौसम का मिजाज बदल गया है। रोहिणी और नौतपा में हुई बारिश के बाद मौसम विभाग ने मानसून जल्दी आने की संभावना जताई थी, परन्तु बोनी के समय जैसे ही आया, बारिश गायब हो गई और तापमान में बढ़ोतरी ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है।
खरीफ की फसल को लेकर इस बार मक्का का रकबा बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। कृषि विभाग ने जिले में मक्का के लिए 3.58 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य तय किया है। इसी के चलते किसान बड़ी संख्या में मक्का बीज की खरीदी में जुटे हैं। सरकारी और निजी दुकानों के साथ-साथ सोसायटियों में भी खाद के साथ मक्का बीज का वितरण शुरू हो गया है।
लेकिन इस बार बीज वितरण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। जिले की सहकारी सोसायटियों में किसानों को खाद के साथ 1400 रुपये की मक्का बीज की थैली थमाई जा रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि अभी तक विभाग द्वारा मक्का बीज की दर निर्धारित नहीं की गई है।
किसानों ने सवाल उठाया है कि जब रेट तय ही नहीं हुआ तो किस आधार पर मक्का 1400 रुपये में बेचा जा रहा है? इस पर सोसायटी प्रबंधक कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पा रहे हैं। किसानों ने इस पूरे मामले की जांच की मांग की है और कहा कि उन्हें बिना जानकारी के बीज थमाना, वह भी ऊंचे दामों में, सरासर अन्याय है।
बारिश पर टिकी किसानों की उम्मीदें
वहीं दूसरी ओर मौसम की अनिश्चितता ने भी किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। खेत तैयार हैं, कुछ जगह बोनी भी हो चुकी है, लेकिन बारिश नहीं होने से बोई गई फसल भी खतरे में पड़ सकती है। किसान उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही मानसून सक्रिय हो और बोनी का काम पटरी पर लौटे।
जांच और स्पष्टता की मांग
किसानों का कहना है कि बीज वितरण में पारदर्शिता जरूरी है। बिना विभागीय आदेश और रेट निर्धारण के बीज देना, किसानों की जेब पर सीधा भार डालता है। प्रशासन को इस पर संज्ञान लेते हुए तत्काल जांच कराना चाहिए, ताकि किसानों को राहत मिल सके और खरीफ सीजन सुचारू रूप से आगे बढ़ सके।



