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नर्मदा परिक्रमा : आज भव सागर पार कर नया जीवन मिलने वाला था

कपिल पांडे की नर्मदा परिक्रमा यात्रा — भाग 14

आज की सुबह बहुत स्पेशल थी आज वो क्षण आने वाला था जिसका सभी परिक्रमा वासियों को इंतजार रहता है वैसे तो परिक्रमा करते समय मां नर्मदा को पार नहीं किया जाता इसलिए अरब सागर से मां के चरणों से होते हुए पार होने का सौभाग्य मिलने वाला था यहां तक आते आते बहुत कुछ सीख मिल चुकी थी पूर्व का जीवन बदल चुका था लग रहा था मानो भव सागर पार कर नया जीवन मिलने वाला है ।

सागर पार करने के लिये रजिस्ट्रेशन

आज थोड़ी देर से नींद खुली स्नान पूजन करते 8 बज चुके थे हनुमान गढ़ी से हमें विमलेश्वर तक जाना था जो यहां से 15 किमी था हनुमान गढ़ी के संत को प्रणाम कर हम आगे विमलेश्वर की ओर निकल गए जहां समुद्र पार करने के लिए रजिस्ट्रेशन होना था राजू भाई यहां के सरपंच विमलेश्वर में हमारा इंतजार कर रहे थे हमें वहां पहुंचने में एक घंटा लगा बहुत ही सिद्ध धाम था ।

विमलेश्वर से नर्मदा की धार

विमलेश्वर से नर्मदा की धार

विमलेश्वर 5 ज्योतिर्लिंगों का समूह था यहां पर एक शिव लिंग बहुत ही अद्भुद था जिसमें एक बड़ा गड्ढा था उसमें से निरंतर पानी निकल रहा था मानो किसी झिर जैसा मां नर्मदा की धार की तरह हमने भगवान के दर्शन किए राजू भाई ने से मिले ओर समुद्र की तरफ आगे बढ़ गए विमलेश्वर से समुद्र की दूरी 5 किमी थी ।

अद्भुद दृश्य और नर्मदे हर की गूंज

जैसे ही हम वहां पहुंचे मंत्र मुग्ध हो गए हजारों की संख्या में लोग थे वहां का रंग ही अलग था भजन, नाच, का आनंद उठा रहे थे लोग हमें और हमारी साईकिल को नाव में स्थान मिल गया खाड़ी में जैसे ही ज्वार भाटा आया नाव चल पड़ी बहुत ही अद्भुद दृश्य था जिसका बखान करना शब्दों में संभव नहीं अब हम खाड़ी पार कर समुद्र में पहुंच गए थे लोगो का उत्साह देखने लायक थे नर्मदे हर की गूंज का पूरा समुद्र गूंज रहा था ।

अद्भुद दृश्य और नर्मदे हर की गूंज

 

समुद्र राजा ने आ गये मस्ती में और सभी को किया पवित्र

नाव 20 किमी समुद्र में अन्दर पहुंच गई एक दम मां के चरणों में ऐसा कहा जाता है मां नर्मदा का वेग इतना तेज है जो समुद्र को चीरता हुआ 20 किमी तक गया है यहां से हमें संकल्प का जल जो ओंकारेश्वर से भरा था आधा खाली करना था और यहां का जल भरना था नाव वाले ने बाल्टी से समुद्र का जल निकाला सबने अपनी बोतल में भरा अब समुद्र राजा भी मस्ती में आ गए सबको अपने जल से शुद्ध कर रहे थे ।

मीठी तलाई ने दी अपनी मिठास

मीठी तलाई ने दी अपनी मिठास

लगभग 3 घंटे लगे इस समुद्र की यात्रा में ओर फिर हम उस पार उतर गए जिसे मीठी तलाई कहा जाता है आज का दिन बहुत ही सुकून भरा था परिक्रमा का अभी तक का सबसे बड़ा दिन रात्रि मीठी तलाई के आश्रम में सहारा लिया यहां एक जल का कुंड है उस कुंड का पानी बहुत मीठा है इसलिए यहां का नाम मीठी तलाई कहलाया इस जल से स्नान करने का महत्व है हमने भी स्नान कर अपने को धन्य किया आश्रम मे भोजन पाया और फिर विश्राम में चले गए।
आज के लिए इतना ही कल फिर जारी रहेगा सफर
नर्मदे हर 

संपर्क: editor@dainikyashonnati.com

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