50 छात्राओं के आश्रम में मिली सिर्फ 1 छात्रा! घंसौर कन्या आश्रम की पोल खुली, गंदगी-बंद पंखे और लापरवाही पर अधीक्षिका को नोटिस
जनप्रतिनिधियों के औचक निरीक्षण में खुली अव्यवस्थाओं की परतें, आदिवासी विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल; जिलेभर के छात्रावासों की जांच की उठी मांग
घंसौर कन्या आश्रम में बड़ा खुलासा: 50 में सिर्फ एक छात्रा, अधीक्षिका को नोटिस
सिवनी/घंसौर यशो :- जनपद पंचायत घंसौर की अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, शिक्षा समिति के अध्यक्ष एवं अन्य जनप्रतिनिधियों द्वारा कन्या आश्रम पौड़ी के औचक निरीक्षण में सामने आई गंभीर अव्यवस्थाओं के बाद आदिवासी विकास विभाग में हड़कंप मच गया है।
निरीक्षण के आधार पर विकासखंड अधिकारी (जनजातीय कार्य) पंडित मनीष कुमार मिश्रा ने आश्रम की अधीक्षिका को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिवस के भीतर लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
साथ ही स्पष्ट किया गया है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए जिला कार्यालय को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
50 छात्राओं के स्थान पर मिली सिर्फ एक छात्रा
7 जुलाई को हुए औचक निरीक्षण के दौरान सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि छात्रावास में दर्ज 50 छात्राओं के मुकाबले निरीक्षण के समय केवल एक छात्रा ही मौजूद मिली। वहीं चौकीदार सरिता शर्मा भी ड्यूटी से अनुपस्थित पाई गईं। निरीक्षण दल को छात्रावास की उपस्थिति पंजी भी व्यवस्थित रूप से संधारित नहीं मिली, जिससे छात्राओं की वास्तविक उपस्थिति और छात्रावास संचालन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।
गंदगी, बंद पंखे और खराब बिस्तरों पर जताई नाराजगी
निरीक्षण के दौरान छात्रावास परिसर में चारों ओर गंदगी फैली हुई मिली। शौचालयों की नियमित सफाई नहीं हो रही थी तथा स्वच्छता की स्थिति अत्यंत खराब पाई गई। छात्राओं के लिए उपलब्ध पलंग, गद्दे और बिस्तरों की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं मिली। कई पंखे लंबे समय से बंद पड़े थे, जिन्हें देखकर प्रतीत हो रहा था कि उनकी वर्षों से मरम्मत तक नहीं कराई गई।
जनप्रतिनिधियों ने इन कमियों को छात्राओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य और सुविधा से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने अधीक्षिका को तत्काल हटाकर निलंबन की कार्रवाई प्रस्तावित करने की भी अनुशंसा की।
तीन दिन में मांगा स्पष्टीकरण
विकासखंड अधिकारी (जनजातीय कार्य) द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस में अधीक्षिका को निर्देश दिए गए हैं कि वे तीन दिवस के भीतर स्वयं कार्यालय में उपस्थित होकर निरीक्षण में मिली सभी कमियों के संबंध में तथ्यात्मक एवं लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें।
नोटिस में यह भी कहा गया है कि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए जिला कार्यालय को प्रस्ताव भेजा जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित कर्मचारी की होगी।
जिलेभर में आदिवासी विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
कन्या आश्रम पौड़ी की घटना ने जिले में आदिवासी विकास विभाग की व्यवस्थाओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। पिछले दिनों जनपद पंचायत घंसौर की अध्यक्ष, शिक्षा समिति के अध्यक्ष एवं अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी विभागीय स्कूलों और छात्रावासों की स्थिति पर चिंता जताई थी। उनका कहना था कि कई स्कूलों में शिक्षक नियमित रूप से नहीं पहुंच रहे हैं, जबकि अनेक संस्थानों में पर्याप्त शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
जिले के विभिन्न आदिवासी छात्रावासों एवं विभागीय विद्यालयों से समय-समय पर अव्यवस्थाओं, कर्मचारियों की लापरवाही, साफ-सफाई की खराब स्थिति तथा निगरानी के अभाव की शिकायतें सामने आती रही हैं। इन मुद्दों को लेकर सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों द्वारा जिला कलेक्टर को कई ज्ञापन भी सौंपे जा चुके हैं तथा विभागीय कार्यप्रणाली में सुधार की मांग लगातार उठाई जा रही है।
नियमित निगरानी पर भी उठे सवाल
घंसौर की घटना के बाद विभागीय निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि छात्रावासों और विद्यालयों का नियमित निरीक्षण एवं प्रभावी मॉनिटरिंग होती, तो इतनी गंभीर अनियमितताएं लंबे समय तक जारी नहीं रहतीं। अब मांग उठ रही है कि जिले के सभी आदिवासी छात्रावासों और विभागीय विद्यालयों का विशेष निरीक्षण अभियान चलाकर वास्तविक स्थिति की जांच कराई जाए और जहां भी लापरवाही मिले, वहां जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
प्रशासनिक कार्रवाई से बढ़ी उम्मीद
कन्या आश्रम पौड़ी में कारण बताओ नोटिस जारी होने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि प्रशासन अब केवल एक छात्रावास तक सीमित न रहकर पूरे जिले के आदिवासी छात्रावासों और विद्यालयों की व्यवस्थाओं की व्यापक समीक्षा करेगा।
यदि समय रहते कमियों को दूर कर जवाबदेही तय की जाती है, तो इसका सीधा लाभ छात्राओं और विद्यार्थियों को मिलेगा तथा शिक्षा और छात्रावास व्यवस्था में अपेक्षित सुधार देखने को मिल सकेगा।



