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भाई की डिग्री पर खोल ली आदिवासियों को लूटने की दुकान
गांव में खोल रखा है दवाखाना, मरीजो को भरती कर किया जाता है इलाज
मंडला यशो:- आदिवासी बाहुल्य जि़लेे मंडला मे डॉक्टरो की कमी और जर्जर चिकित्सा व्यवस्था कोई नई समस्या नहीं है । जि़ले के ग्रामीण इलाक़ो से लगातार चिकित्सा मे हो रही लापरवाही की ख़बरे सामने आती रहती है । जि़ले मे कुछ ग्रामीण इलाके ऐसे है जहाँ प्राथमिक चिकित्सा केंद्र महिने मे कुछ ही दिन खुलते और उसमे भी चिकित्सक नहीं रहते। जि़ले मे इस परिस्थिति का फायदा फर्जी डॉक्टर उठाते है जि़ले की भोली भाली आदिवासी जनता को लूटने का काम वह करते है । जि़ले मे ऐसे डॉक्टरो की संख्या बहुत अधिक है जि़ले मे हर कस्बों गांवों मे ऐसे डॉक्टर आपको मिल जाएँगे ।
इसी प्रकार की जानकारी मंडला जिले की सामने आ रही है जहाँ अपने भाई की डिग्री के नाम पर (वहाँ मौजूद कथित डाक्टर के बताये अनुसार) इलाज किया जा रहा है । इस प्रकार का इलाज ग्राम पंचायत तिलाइपानी में हो रहा है । जानकारी के अनुसारतिलाइपानी पंचायत भवन के पास एक युवक अपने आप को डॉक्टर बता कर लोगो का इलाज तकरीबन 2 से 3 सालों से कर रहा है। उसने पंचायत ऑफिस के पास ही अपनी दुकान खोल रखी है और यहाँ हैरानी की बात यह है की पंचायत के किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति ने आज तक उनकी शिकायत नहीं की है । ग्राम वासियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार वह इलाज करने के साथ – साथ लोगो को दवाई भी देता है और इंजेक्शन और बॉटल भी लगता है और वह इसके मोटे पैसे वसूलता है । हमारे संवाददाता ने बताया कि वहाँ काफी सारे बिस्तर है जहाँ को भर्ती किया जाता कर उनका इलाज होता है । इसके अलावा काफी सारी दवाई और मशीने वहाँ देखने को मिली । वहाँ इलाज करा रहे एक मरीज़ से जब हमारे संवाददाता ने पूछताज की तो पता चला की उस फर्जी डॉक्टर ने उससे इलाज के लिये एक हज़ार रुपए लिए थे और मरीज को भूख न लगने और कमज़ोरी के लक्षण थे ।
जो युवक अपने आप को डॉक्टर बता रह था उससे पूछताछ की तो पता चला की उसके पास कोई भी डिग्री नहीं है और वह यहाँ कई सालो से इलाज कर रहा है । कथित डाक्टर ने अपने आप को समनापुर निवासी बताया । उससे उसकी डिग्री के बारे मे सवाल किया तब वह डिग्री का नाम बताने तक मे असमर्थ था । उसने बताया की वह अपने बड़े भाई की डिग्री मे यहाँ इलाज कर रहे है । हालांकि बड़े भाई की डिग्री से छोटा भाई इलाज करे ऐसा कोई प्रावधान कानून मे तो है नहीं लिहाजा इसे कानूनन जुर्म ही माना जा सकता है परंतु भोली – भाली आदिवासी जनता की जान के साथ खिलवाड़ है करने की सुपारी जब जिम्मेदार प्रशासन ने ही ले रखी है तो कोई कर क्या सकता है । कानून के जानकार बताते है कि इस प्रकार के फर्जी डॉक्टर पर आईपीसी की अनेक धाराओं के अपराधी की श्रेणी में आते है ।
यह सिर्फ एक मामला नहीं है ऐसे हज़ारो फर्जी डॉक्टर हमारे जि़ले के ग्रामीण इलाक़ो मे खराब पड़ी चिकित्सा व्यवस्था का फायदा उठा कर भोले – भाले आदिवसी ग्रामीणों को लूटते है और उनकी जान के साथ खेलते है और जिम्मेदार अधिकारी अपनी आंखे मूँदे रहते है ।



