मंडला

नक्सली मुठभेड़ की न्यायिक जांच के आदेश,मुख्यमंत्री ने मृतक परिवार को दस लाख सहायता राशि दी

Mandla 17 march 2025
मंडला यशो:- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंडला की बिसरो बाई परते पत्नी स्व. हीरन सिंह परते को मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान मद से 10 लाख रूपए की आर्थिक सहायता स्वीकृत की है। बीते 9 मार्च को मंडला जिले की बिछिया तहसील के ग्राम खटिया के निवासी हीरन सिंह परते की कथित हाँक फोर्स और नक्सली मुठभेड़ में मौत हुई थी। मंडला कलेक्टर  द्वारा इस घटना की न्यायिक जांच के आदेश भी दिए गए हैं।

पिछले दिनों मंडला जिले में बैगा आदिवासी समुदाय के एक व्यक्ति को हॉक फोर्स ने कथित नक्सली मुठभेड़ में मार दिया था।

 इस घटना से क्षेत्र में विरोध उपज गया था और बताया गया था कि हीरन परते गरीब मजदूर था जो घटना के दो दिन पहले गुम हो गया था, जिसकी गुमनामी की रिपोर्ट उसकी पत्नी ने कराई थी। इस व्यक्ति को नक्सली बताकर मारे जाने से आदिवासी समाज में काफी आक्रोश निर्मित हो गया और गोंडवाना गणतन्त्र पार्टी, कांग्रेस सहित अन्य राजनीतिक दलों और स्थानीय समूहों ने इसे “फर्जी मुठभेड़” करार दिया है और इसकी गहन जांच की मांग की थी।

गोंगपा ने कोर्ट जाने की घोषणा भी की है।

कथित तौर पर यह घटना कान्हा राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र के पास मंडला के जंगलों में हुई। इस क्षेत्र में पहले भी माओवादी गतिविधियां देखी गई हैं। आधिकारिक पुलिस बयानों के अनुसार, मुठभेड़ नक्सली (माओवादी) की मौजूदगी के बारे में खुफिया जानकारी के आधार पर एक तलाशी अभियान के दौरान हुई। हॉक फोर्स ने जिला पुलिस और सीआरपीएफ कर्मियों के साथ मिलकर गोलीबारी की, जिसके परिणामस्वरूप एक व्यक्ति की मौत हो गई। व्यक्ति की पहचान बैगा समुदाय के एक मजदूर के रूप में की गई। दो अन्य को गिरफ्तार किया गया, जिन पर विद्रोहियों को राशन उपलब्ध कराने वाले नक्सली सहयोगी होने का आरोप है।

कांग्रेस और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (जीजीपी) सहित विपक्षी दलों ने पुलिस के बयान को चुनौती दी है। उनका आरोप है कि मुठभेड़ को फर्जी बताया गया था और मृतक एक निर्दोष आदिवासी मजदूर था, न कि नक्सली। कांग्रेस ने न्यायिक जांच की मांग की थी, जिसमें दावा किया गया है कि यह घटना नक्सल विरोधी अभियानों के बहाने आदिवासी समुदायों को निशाना बनाने के व्यापक पैटर्न को दर्शाती है।

जीजीपी ने एक कदम और आगे बढ़कर सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करने और न्याय पाने के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने की योजना की घोषणा की है। स्थानीय आदिवासी समुदायों और कार्यकर्ताओं ने भी गुस्सा जाहिर किया है। मंडला सहित पडोस के जिलों से आदिवासी समाज के संगठनों के लोगो के पहुंचने का सिलसिला भी जारी है। 

मंडला जिला कलेक्टर ने मुठभेड़ की परिस्थितियों की जांच के लिए मजिस्ट्रेट जांच का आदेश दिये है। 17 मार्च, 2025 तक, मृतक की पहचान पूरी तरह से पुष्टि नहीं हुई है, और पुलिस लगातार दावा कर रही है कि ऑपरेशन वैध था। 

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