पांच करोड़ का धान घोटाला — तीन राइस मिलर्स पर एफआईआर दर्ज
कलेक्टर के निर्देश पर जांच में बड़ा पर्दाफाश, लाखों क्विंटल धान गायब

बालाघाट, 24 अक्टूबर 2025
सिवनी यशो:- जिले में धान मिलिंग में हुआ बड़ा घोटाला अब उजागर हो गया है। कलेक्टर मृणाल मीना के निर्देश पर हुई जांच में ₹5 करोड़ 47 लाख से अधिक मूल्य के 23,808 क्विंटल धान के गायब होने का खुलासा हुआ है। प्रशासन ने तीन राइस मिल संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है।
तीन मिलों से गायब हुआ सरकारी धान
अपर कलेक्टर जी.एस. धुर्वे के निर्देशन में खाद्य, राजस्व एवं मंडी विभाग की संयुक्त टीम ने भौतिक सत्यापन किया, जिसमें तीन मिलों में धान का स्टॉक नदारद पाया गया —
श्री मातारानी राइस मिल, खैरलांजी — ₹1.49 करोड़ मूल्य का 6,488 क्विंटल धान नहीं मिला।
माँ पूर्णा राइस मिल, चिचोली (लांजी) — ₹1.29 करोड़ मूल्य का 5,629 क्विंटल धान गायब।
माँ कमला देवी राइस मिल, गर्रा (लालबर्रा) — ₹2.68 करोड़ मूल्य का 11,691 क्विंटल धान नहीं पाया गया।
एफआईआर दर्ज — अब पुलिस जांच के घेरे में मिलर्स
धान के स्टॉक में भारी गड़बड़ी की पुष्टि के बाद तीनों राइस मिल संचालकों के विरुद्ध पुलिस थानों में एफआईआर दर्ज कराई गई —
विवेक मिश्रा, श्री मातारानी राइस मिल, खैरलांजी — थाना खैरलांजी (19 अक्टूबर)।
विवेक मस्करे, माँ पूर्णा राइस मिल, चिचोली — थाना बहेला, लांजी (23 अक्टूबर)।
सुधीर तिवारी व विशाल गंगवानी, माँ कमला देवी राइस मिल, गर्रा — थाना कोतवाली बालाघाट।
“शासन को नुकसान पहुंचाने का गंभीर कृत्य” — जिला आपूर्ति अधिकारी
जिला आपूर्ति अधिकारी आर.के. ठाकुर ने बताया कि
इन मिलर्स ने शासन की धान मिलिंग प्रक्रिया में गड़बड़ी कर सरकारी अनाज की अफरा-तफरी की है।
उन्होंने कहा –
> “शासन की नीति स्पष्ट है — धान घोटाले जैसे मामलों में किसी को बख्शा नहीं जाएगा।”
पृष्ठभूमि — कैसे हुआ यह घोटाला?
खरीफ विपणन वर्ष 2024–25 में किसानों से समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान को मिलिंग के लिए निजी राइस मिलर्स को सौंपा गया था।
इन मिलर्स को निर्धारित अनुपात में चावल शासन को लौटाना था,
लेकिन समय पर चावल जमा न करने और
धान का स्टॉक न होने से यह बड़ा घोटाला उजागर हुआ।



