150 साल बाद कान्हा में गूंजी जंगली भैंस की गर्जना
CM मोहन यादव ने किया ऐतिहासिक शुभारंभ
मध्यप्रदेश के जंगलों में 150 साल बाद एक ऐसी आवाज गूंजी, जिसने इतिहास को फिर से जिंदा कर दिया।
कान्हा में जंगली भैंसों की वापसी सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि प्रकृति का पुनर्जन्म है।
मंडला/भोपाल यशो : – मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध कान्हा टाइगर रिजर्व में करीब डेढ़ शताब्दी बाद जंगली भैंसों (Wild Buffalo) की वापसी ने वन्यजीव इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सुबखार रेंज में इन भैंसों को विशेष बाड़े में छोड़कर इस ऐतिहासिक मिशन की शुरुआत की।

असम से आए जंगल के असली योद्धा
इन जंगली भैंसों को असम के काजीरंगा नेशनल पार्क से लाया गया है। पहले चरण में 4 भैंसों को छोड़ा गया है, जबकि कुल 50 भैंसों को लाने की योजना है।
- पहले चरण में: 4 भैंसें रिलीज
- लक्ष्य: 50 जंगली भैंस
- अगले 3 वर्षों में चरणबद्ध ट्रांसलोकेशन
मुख्यमंत्री का बयान
“150 साल बाद कान्हा में जंगली भैंसों की वापसी हमारे इकोसिस्टम के लिए ऐतिहासिक क्षण है।”
इको-सिस्टम को मिलेगा बड़ा फायदा
जंगली भैंसों की वापसी से कान्हा के जंगलों में जैव विविधता मजबूत होगी और खाद्य श्रृंखला संतुलित होगी।
- बायोडायवर्सिटी मजबूत
- फूड चेन संतुलन
- टाइगर के लिए प्राकृतिक शिकार
- पर्यटन में वृद्धि
QUICK FACTS
- 150 साल बाद वापसी
- 4 भैंसें रिलीज
- लक्ष्य: 50 भैंस
- स्रोत: असम
जटिल लेकिन सफल ऑपरेशन
इस मिशन में वन विभाग, विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों और रिसर्च संस्थानों की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जंगली जानवरों का सुरक्षित स्थानांतरण एक बेहद संवेदनशील प्रक्रिया होती है।
टूरिज्म को मिलेगा बूस्ट
अब कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघ और बारहसिंघा के साथ जंगली भैंसों का दीदार भी पर्यटकों को मिलेगा, जिससे पर्यटन को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
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(यह समाचार आधिकारिक जानकारी और वन विभाग के इनपुट पर आधारित है)





