मनुष्य देह में ही “नित्य-तत्व” प्राप्त करने की क्षमता विद्यमान है – शंकराचार्य सदानंद जी
Paramhansi Ganga Ashram 12 December 2024
सिवनी यशो:- चौरासी लाख योनियों में, मनुष्य योनि सर्वोत्तम है। संसार के प्रत्येक जड़ और चेतन की पहचान उसके जाति गुणधर्म से होती है?। जन्म मृत्यु सुख दुख प्रारब्ध के कारण निश्चित होता है।
उक्ताश्य के प्रेरक उद्गार- अनंत श्री विभूषित द्वारका शारदा पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी श्री सदानंद सरस्वती जी महाराज (Anant Shri Vibhushit Dwarka Sharda Peethadhishwar Jagatguru Shankaracharya Swami Shri Sadanand Saraswati Ji Maharaj) – के मुखारविंद से परमहंसी गंगा आश्रम झोतेश्वर (Paramhansi Ganga Ashram Jhoteshwar) के सत्संग में नि:सृत हुए।
श्री जगतगुरु समाधि लोकार्पण एवं *ब्रह्मलीन जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज (Jagadguru Shankaracharya Swami Shri Swaroopanand Saraswati Ji Maharaj) की भव्य मूर्ति अनावरण महोत्सव(11 दिस.)की पूर्व संध्या पर देश- विदेश से पहुंचे सैकड़ो जिज्ञासु शिष्यों, तथा *गुरुरत्न जन्म -भूमि सिवनी से पहुंचे, आचार्य पं.सनत कुमार उपाध्याय ,पं.ओमप्रकाश तिवारी,पं.अनुराग त्रिपाठी ,पं.संदीप दुबे, श्रीमती नीतू दुबे, आदि ने पूज्य द्वारका पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी श्री सदानंद सरस्वती जी महाराज के दर्शन एवं सत्संग का पुण्य लाभ , अर्जित किया ।
इस अवसर पर इटली से पहुंचे आध्यात्मिक जिज्ञासु विदेशी शिष्य टोली द्वारा पूछे गए प्रश्नों का सहज सरल समाधान करते हुए, शंकराचार्य ने कहा कि, मनुष्य जन्म पूर्व जन्म के संचित पुण्य के कारण होता है । तथा हम सुख दुख भोगते हैं। और इस जन्म में संचित कर्मों का फल अगले जन्म में प्राप्त होगा ।
आप श्री ने कहा कि, मनुष्य की अनित्य देह में, नित्य तत्व प्राप्त करने की क्षमता विद्यमान है। नित्य तत्व प्राप्ति के लिए सनातन धर्म में- चार वेद, छह वेदांग ,18 पुराण ,14 विद्या ,अध्ययन, सत्संग एवं सद्गुरु हैं। पू.शंकराचार्य स्वामी श्री ने गूढ आध्यात्मिक विषयों की लौकिक दृष्टांतों के माध्यम से सहज सरल व्याख्या किया।



