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सिंपल लिविंग हाई थिंकिंग आधार है डॉ बिसेन की जीवन शैली का

 सांसद डॉ ढाल सिंह बिसेन के 71 वें जन्मदिवस पर पत्रकार संजय सिंह का विशेष आलेख

सिंपल लिविंग हाई थिंकिंग आधार है डॉ बिसेन की जीवन शैली का - Seoni News

 

धन या पदों से व्यक्ति बड़ा नहीं होता, उसे बड़ा बनाते हैं उसके कर्म और गुण और उससे से भी बड़ा बनाते है उसकी सरलता। भारतीयता, आध्यात्मिकता, संवेदनापूरित समता की मूल्यदृष्टि को जीवन में चरितार्थ करने वाले बालाघाट – सिवनी सांसद डॉ. ढालसिंह बिसेन का राजनैतिक सफर 48 वर्ष मे प्रवेश कर रहा है। सिंपल लिविंग हाई थिंकिंग अंग्रेजी के यह चार शब्द डॉ बिसेन की जीवनशैली का आधार स्तंभ है। यही कारण है कि न कहीं कोई ढकोसला है और न कहीं कोई प्रपंच जो है वह सामने है पूरी पारदर्शिता के साथ।
ग्राम पंचायत के एक पंच से लेकर विधायक, राज्य सरकार मे विभिन्न विभागों के मंत्री, म.प्र. वित्त आयोग के अध्यक्ष से सांसद तक के जिस राजनैतिक पादान पर आज डॉ. बिसेन पहुंचे है, उसके पीछे उनकी सिंद्धांतवादी राजनीती और जनता के प्रति जवाबदेही के अलावा और कुछ नहीं है। राजनीती मे महत्वाकांक्षा सभी मे होती है, पर महत्वाकांक्षा की इस माला मे राजनैतिज्ञ अगर अपनी कर्मभूमि की जनभावनाओं के मोतियों को पिरो लें तो एक सुंदर स्वरूप के सामने आयेगा। डॉ बिसेन ने राजनीति मे कमोवेश जनभावनाओं के मोतियों की माला को धारण किया। नतीजा सामने है, क्षेत्र की अधोसंरचना विकास के नये नये मार्ग प्रशस्त हुए और नये नये आयाम के अध्याय जुड़े।
विकास की इस इतिहास गाथा मे दूरदर्शिता की सोच के चलते वर्तमान के साथ साथ आने वाले भविष्य की भी तस्वीर बन रही है। यह सब करने के बाद वे दायित्वों के प्रति अपने आपको जवाबदेह मानकर कोई अहम नही पालते वरन संतुष्ट होकर चेहरे पर हल्की सी मुस्कुराहट लाकर अपनी अगली प्राथमिकता मे जुट जाते है। सिलसिला का यह सफर विधायक से लेकर सांसद बनने तक निरंतर जारी है। नतीजा क्षेत्र की जनभावनाओं के अनुरूप और उससे बढ़कर उपलब्धियों पर उपलब्धियां मिलना सिवनी के साथ साथ समूचे बालाघाट संसदीय क्षेत्र की तस्वीर बदल रहे है।
मूल्यों और सैद्धांतिक प्रतिबद्धता को अपने राजनैतिक जीवन की धुरी बनाकर सुचिता के मापदंड का अक्षरत: पालन करने वाले सांसद डॉ. ढालसिंह बिसेन का जन्म सिवनी जिले की बरघाट तहसील के एक छोटे से कस्बे पिपरिया में प्रतिष्ठित किसान स्व. श्री सेवकराम जी बिसेन एवं स्व. श्रीमति सोना बाई बिसेन के यहां 14 मई 1952 को हुआ। अपने माता पिता से मिले संस्कारों को उन्होने धरोहर की तरह सजोकर रखा। बी.एस.सी. की शिक्षा सिवनी में प्राप्त करने के बाद आयुर्वेदिक महा विद्यालय रायपुर से वर्ष 1975 में उन्होने ए.बी.ए.एम.एस. एवं डी.एच.बी. की डिग्री हासिल कर ग्राम गंगेरूआ से चिकित्सा क्षेत्र में कदम रखकर पीडि़त मानवता की सेवा को अपना लक्ष्य बना लिया। इसी दौरान डॉ. बिसेन को भाजपा के पितृपुरूष पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों और उनके दर्शन ने इतना प्रभावित किया कि जनसेवा विशेषकर अंतिम छोर के व्यक्ति के उत्थान के लिये राजनीति भी एक सशक्त माध्यम समझ में आया। यहीं से डॉ. बिसेन ने लोगों के इलाज के साथ-साथ राजनीति मे भी अपनी दखलांदाजी शुरू कर दी।
मानवीय संवेदनाओं के प्रति गहरी आस्था रखने वाले डॉ. बिसेन जब चिकित्सीय डिग्री हासिल कर वापिस अपने गांव आये तब तक उनका जो लक्ष्य तय हुआ था वह एक अस्पताल बनाकर पीडि़त मानवता की सेवा करना था। इसी दौरान उन्होने राजनीति मे भी प्रवेश कर लिया और इस झंझाल मे ऐसे उलझते गये कि 47 वर्ष मे उनका अपना मुख्य लक्ष्य बहुत दूर हो गया। जब भी डॉ. बिसेन इस संबंध मे सोचते तो उन्हे बहुत अफसोस होता। आज एक पिता के लिये इससे बड़े गर्व की क्या दूसरी बात होगी कि उनके होनहार पुत्र डॉ. लोकेश बिसेन ने उनके सपने को साकार कर दिया है।
डॉ. बिसेन का जनप्रतिनिधी के रूप मे कार्य करने का ढंग जरा हटकर हैै। दरबार लगाकर समस्यायें सुनना और उसे हल करने का आश्वासन देना उनकी आदत मे शुमार नहीं है। इतना जरूर है कि घर पर आया कोई भी निराश नहीं हुआ है, डॉ. बिसेन ने उसकी बात सुनी है और उसकी समस्या का हल करने का प्रयास भी किया। चाहे विधायक के रूप मे रहे हो या आज सांसद के रूप मे, क्षेत्र का दौरा करना और वहां की जरूरतों का पता लगाना तथा उस शहर, गांव या टोला को किन योजनाओं से लाभान्वित किया जा सकता है यह सब सोचना और उसके बाद उसका लाभ दिलाना यह उनके अपने कार्य करने का ढंग है। यही कारण है कि बरघाट विधानसभा का प्रतिनिधित्व करने के दौरान अनेक स्कूल, स्टेडियम, कॉलेज की भव्य बिल्डिंग, फेकल्टियां, सड़कें, नदी नालों मे अनेक स्टाप डेम, कांचना मंडी जैसा जलाशय जैसी सौंगातों के साथ इतने तालाब मिले कि धान का कटोरा पानी से कभी रीत नहीं पाया। साढ़े तीन वर्षों के सांसदीय कार्यकाल मे भी काम करने का ढंग आज भी वैसा ही है। इतने कम वर्ष मे बालाघाट और सिवनी जिले को मिली विभिन्न उपलब्धियां मिसाल के रूप मे सामने है।
राजनीति का नजरिया अलग:- देश आजादी का 75 वां महोत्सव मना रहा है। आजादी के दौर की राजनीति का आज परिदृश्य बिल्कुल बदल चुका है। लोकतंत्र मे जनप्रतिनिधी को जनता पांच साल के लिये चुनती है। अगला चुनाव जीतने पर ही जनप्रतिनिधियों का फोकस रहता है। इस जुगत के लिये उन्हे भले ही जनहित से जुड़े विकास की बड़ी-बड़ी बातें करना पड़े या वादें करना पड़े उससे वे चूकते नहीं है। डॉ. बिसेन का इस मामले में नजरिया ही अलग है। बेफिजूल का आश्वासन या दिलासा देकर टालना उनकी आदत में शुमार नहीं है। अगर वे कोई वादा या घोषणा करते हैं तो सबसे पहले यह जरूर जान लेते है कि उसे वे पूरा कर सकेंगे या नहीं। विधायक रहते हुये अपने विधानसभा क्षेत्र में किये गये अनेक विकास कार्य और सांसद कार्यकाल के मात्र तीन साल में सिवनी जिले सहित समूचे संसदीय क्षेत्र को दी गई सौगातें अपने दायित्वों के प्रति उनकी गंभीरता को दर्शाती हैं।
प्राथमिकता पर फोकस:- सांसद बनने के बाद चुनाव के दौरान किये गये वादो पर उन्होने अपना पूरा ध्यान केन्द्रित कर लिया। सिवनी मुख्यालय मे पासपोर्ट कार्यालय खुलवाने के लिये उन्हे अपने दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। नीतिगत निर्णय अनुरूप एक संसदीय क्षेत्र मे एक ही पासपोर्ट कार्यालय खुल सकता था। यहां डॉ. बिसेन के अनुभव और लगन का ही कमाल है कि आज जिले मे पासपोर्ट कार्यालय है और भोपाल की भाग-दौड़ से जिलवासियों को मुक्ति मिल गई है। फोरलेन निर्माण मे आने वाली बाधायें दूर हुई और एशिया का सबसे बड़ा और सुंदर फ्लाई ओवर युक्त मार्ग मिला। बरघाट के ग्राम जैवनारा एवं बालाघाट जिले के तिरोड़ी मे एक एक सेन्ट्रल स्कूल स्वीकृत कराया। सिवनी मे 100 वॉट का एफ.एम. रेडियो रिले सेन्टर भी प्रारंभ हो चुका है। बालाघाट से गोंदिया फोरलेन एवं लबादा से नयेगांव रिंग रोड की टेंडर प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।
रेल्वे पर विशेष फोकस:- सांसद बनने के बाद चुनाव के दौरान किये गये वादों पर उन्होने अपना पूरा ध्यान केन्द्रित कर लिया। सिवनी मुख्यालय में पासपोर्ट कार्यालय खुलवाने के लिये उन्हे अनेक दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। नीतिगत निर्णय अनुरूप एक संसदीय क्षेत्र में एक ही पासपोर्ट कार्यालय खुल सकता था। यह डॉ. बिसेन के अनुभव और लगन का ही कमाल है कि आज जिले में पासपोर्ट कार्यालय है, और भोपाल की भाग-दौड़ से जिलवासियों को मुक्ति मिल गई है। फोरलेन निर्माण में आने वाली बाधाएं दूर हुई और एशिया का सबसे बड़ा और सुंदर फ्लाई ओवर युक्त मार्ग मिला। बरघाट के ग्राम जैवनारा एवं बालाघाट जिले के तिरोड़ी में एक-एक सेन्ट्रल स्कूल स्वीकृत कराया। इस हेतु इस वर्ष बजट भी स्वीकृत हो चुका है और स्कूलों के लिये नये भवन की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। सांसद निर्वाचित होने के बाद उन्होने रेल अधिकारियों के साथ बैठक कर अमान परिवर्तन के निर्माणाधीन कार्यों की धीमी गति के संबंध मे जानकारी ली और आ ही बाधाओं को दूर करने मे लग गये। इसी दौरान रेल्वे स्टेशन पर बनने वाले दो कमरे के यात्री भवन की ड्राईंग डिजाईन बदलवाई और मॉर्डन स्टेशन स्वीकृत करवाया। जहां भवन स्वीकृत किया गया था, उसका स्थल चयन ही गलत था। इसलिये शहरवासियों की सुविधा को देखते हुये शहर की ओर ऐसा सर्वसुविधा युक्त नया भवन स्वीकृत करवाया, जिसमें यात्रियों के लिये एक्सलेटर, लिफ्ट सहित अन्य वे सारी सुविधायें मुहैया होगी जो बड़े स्टेशनों मे मिलती हैं। लंबी दूरी की यात्री टेऊेने सिवनी होकर गुजरें उसके लिये दो की जगाह चार प्लेट फॉर्म स्वीकृत कराये। दो पैसिंजर टेऊन की स्वीकृति बाद सप्ताह मे चार दिन रीवा इतवारी एक्सप्रैस टेऊन को सिवनी होकर चलाने, पेंचव्हेली एवं पातालकोट का सिवनी तक विस्तारीकरण करने की स्वीकृति दिलाकर सिवनी को चहुंओर से जोड़ दिया। सिवनी का व्यापार बढ़े और किसानों को उपज का अन्य शहरों के बाजारों से उचित दाम मिले इसके लिये उन्होने रेक प्वाइंट स्वीकृत कराया। रैक पॉइंट से आज सिवनी के व्यपारियों का व्यापार जहां बढ़ रहा है वहीं जिले के अन्नदाताओं को उनकी उपज का उचित दाम मिल रहा है। रसायनिक खाद, सीमेन्ट, लौहा के रैक आने का जहां मार्ग प्रशस्त हुआ है वहीं गिटटी परिवहन की भी स्वीकृति मिल चुकी है। बालाघाट जिले मे कटंगी से तिरोडी ब्राडगेज का कार्य पूर्ण कराकर मुंबई हावडा लाईन का लाभ दिलाया। गोंदिया से जबलपुर, गोंदिया से गढ़ा (जबलपुर) दो पैसिंजर ट्रेन और इतवारी से तुमसर, तिरोड़ी होकर बालाघाट पैसिंजर, तुमसर बालाघाट पैसिंजर, बालाघाट गोंदिया, इतवारी पैसिंजर टेऊन की स्वीकृति दिलाकर परिचालन शुरू कराया। इसके साथ ही बालाघाट को जहां जबलपुर चांदाफोर्ट एक्सप्रैस मिली वहीं चैन्नई गया सुपर फास्ट एक्सप्रैस का बालाघाट को स्टापेज स्वीकृत कराया।
ओव्हर ब्रिज की सौगात:- सांसद डॉ. बिसेन ने शहर की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने एवं नागपुर रोड रेल्वे क्रासिंग पर फाटक बंद की समस्या के निदान के लिये खैरीटेक से नगझर तक फोरलेन सड़क एवं ओव्हर ब्रिज हेतु एनएचएआई से 1.26 करोड़ रूपये स्वीकृत कराकर शहर को एक बहुत बड़ी सौगात दी है। सड़क एवं पविहन मंत्रालय भारत सरकार से बंडोल से कोहका मार्ग की स्वीकृति भी डॉ. बिसेन की ही देन है। इस टू लेन मार्ग से छिंदवाड़ा से जबलपुर की दूरी जहां कम होगी वहीं फुलारा टोल प्लाजा से भी निजात मिल जायेगी। यही नहीं इस मार्ग मे पडऩे वाले सभी ग्रामों को भी सीधी आवागमन की सुविधा उपलब्ध होगी।
अगली प्राथमिकता:- कम समय मे अधिक काम निपटाना यह डॉ. बिसेन की काबलियत है। दो बार कोरोना काल को मिलाकर मात्र साढे तीन वर्षों मे अनेक ऐसी उपलब्धियां जिन्हे मिलने मे सालो साल लगते है, उसे देने के बाद शेष बचे कार्यकाल का भी उन्होने लक्ष्य तैयार कर लिया है। सिवनी रेल्वे स्टेशन को जंक्शन का स्वरूप देने सिवनी कटंगी रेल लाईन, गोंटेगांव रामटेक रेल लाईन, मलाजखंड से चिरइडोंगरी नई रेल लाईन, सिवनी एवं बालाघाट रेल्वे स्टेशन को अमृत योजना के तहत अधिक से अधिक लाभ दिलाना, सिवनी बालाघाट रेल्वे क्रासिंग पर ओव्हर ब्रिज सहित फोरलेन मार्ग, सिवनी कटंगी भंडारा को एनएचआई घोषित कराना। सिवनी की प्रतिभाओं को राज्य एवं राष्ट्रीय मंच मिल सके इसके लिये 10 किलो वॉट का एफ.एम. रेडिया स्टेशन, बालाघाट मे मेडिकल कॉलेज एवं सिवनी मे कृषि महाविद्यालय आदि को डॉ. बिसेन ने अपनी अगली प्राथमिकता तय कर प्रयास शुरू कर दिया है।
बधाई एवं शुभकामनायें:- मानवीय संवेदनाओं के प्रति अजेय आस्था, सादगी और सहजता के धनी, कर्म के प्रति गंभीर दृष्टिकोण, जनसेवा के लिये समर्पण, आपने दायित्वों के प्रति निष्ठा का भाव ही डॉ. ढालसिंह बिसेन को वर्तमान राजनैतिक परिवेश में एक अलग ही पहचान देता है। करीब 48 वर्ष के लम्बे राजनैतिक सफर में अनेक उपलब्धियों की सौगात देने वाले डॉ. ढालसिंह बिसेन को उनके 71 वां जन्मदिवस पर ढेर सारी बधाई और शुभकामनायें, इस अपेक्षा के साथ कि भविष्य मे भी वे मूल्यों और सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध रहते हुये अपने दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वहन करें और अपने राजनैतिक सफर मे जिले को उसके वर्तमान और भविष्य की अनेक उपलब्धियां दें।

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