
सरलता
———————-
जीवन को गम्भीरता से नहीं, अपितु बहुत सरलता से जीना चाहिए, गम्भीरता ठीक नहीं , इससे हृदय सिकुड़ता है, गम्भीरता व्यक्ति को स्वयं से दूर करती है, चित्त को भारी करती है , गम्भीरता चित्त पर बोझ है। हल्कापन ठीक है, छोटी छोटी बातों का , गपशप का आनन्द लिया जाना चाहिए, जीवन में सुख भी है, छोटे से छोटे सुख का , हँसी – मज़ाक़ का आनन्द लिया जाना चाहिए। स्वयं के साथ जो भी घटे उसको समग्रता से जीना चाहिए, उसका पूर्ण स्वीकार होना चाहिए, स्वयं के साथ घटी किसी भी घटना का तिरस्कार नहीं करना चाहिए। स्वयं के भीतर जाने में ये छोटी से छोटी घटनाएँ बहुत सहायक है, स्वयं के अन्तस को जानने के लिए समस्त का स्वीकार बहुत सहायक है। मन्दिर जाना बहुत आसान है, पर स्वयं के भीतर जाना बहुत कठिन है, मन्दिर जाना भी तभी मूल्यवान होगा, जब स्वयं के भीतर गये हो, अन्यथा सब आडम्बर ही होगा, दिखावा ही होगा, जिसका कोई मूल्य नहीं।
संकलन
अनुराग अग्रवाल
Astrologer, Numerologist & Vastu Expert
जय श्रीकृष्ण



