पेंच की गौरवगाथा की एक अमर नायिका: वरिष्ठ बाघिन पी.एन.-20 (टी-20) का निधन
18 वर्ष तक जंगल की शान बनी रही “लंगड़ी बाघिन”, 10 शावकों को जन्म देकर बढ़ाई पेंच की बाघ विरासत
Pench Tigress PN 20 Death
18 साल की गौरवगाथा का अंत: (Pench Tigress PN 20 Death) से शोक में पेंच का जंगल
“लंगड़ी बाघिन” ने 10 शावकों को जन्म देकर पेंच की बाघ विरासत को नई ऊंचाई दी
सिवनी। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पेंच टाइगर रिजर्व के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय (Pench Tigress PN 20 Death) के साथ समाप्त हो गया। रिजर्व की प्रसिद्ध और वरिष्ठतम बाघिनों में शामिल पी.एन.-20 (टी-20), जिसे पर्यटक और वन्यजीव प्रेमी स्नेहपूर्वक “लंगड़ी बाघिन” के नाम से जानते थे, मंगलवार प्रातः लगभग 10:30 बजे कर्माझिरी रेंज के बाइसन बीट अंतर्गत जोड़ा मुनारा कैम्प के पास मृत अवस्था में पाई गई।

वर्ष 2008 में जन्मी इस बाघिन की आयु लगभग 18 वर्ष थी। अत्यधिक वृद्धावस्था के कारण वह लंबे समय से शारीरिक रूप से कमजोर हो चुकी थी और अंततः प्राकृतिक कारणों से उसका निधन हो गया।
कॉलरवाली की सहोदर, पेंच की गौरवशाली वंश परंपरा की धरोहर
पी.एन.-20 केवल एक बाघिन नहीं बल्कि पेंच की गौरवशाली वंश परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा थी। वह विश्वप्रसिद्ध “कॉलरवाली बाघिन” की सहोदर बहन थी। कॉलरवाली की तरह ही पी.एन.-20 ने भी पेंच के जंगलों में अपनी अलग पहचान और विरासत स्थापित की।

कर्माझिरी परिक्षेत्र के लगभग 70 प्रतिशत क्षेत्र में उसका विचरण रहा। जंगल सफारी के दौरान उसकी एक झलक पाने के लिए पर्यटक उत्सुकता से प्रतीक्षा करते थे।
उसके सामने के पंजे में जन्मजात विकृति थी, जिसके कारण वह हल्का लंगड़ाकर चलती थी। इसी वजह से पर्यटकों के बीच वह “लंगड़ी बाघिन” के नाम से प्रसिद्ध हो गई।
10 शावकों की माँ – पेंच में बढ़ाई बाघों की नई पीढ़ी
(Pench Tigress PN 20 Death) के साथ पेंच टाइगर रिजर्व ने एक ऐसी मातृ बाघिन को खो दिया जिसने अपने जीवनकाल में कुल 10 शावकों को जन्म दिया। इन शावकों ने आगे चलकर पेंच और आसपास के जंगलों में अपना क्षेत्र स्थापित किया।
- दिसंबर 2012 – पहली बार दो मादा शावकों को जन्म
- 2016 – तीन शावक (एक नर, दो मादा)
- 2019 – चार नर शावक
- 2021 – एक मादा शावक, जो वर्तमान में PN-165 “लक्ष्मी” के नाम से कर्माझिरी क्षेत्र में विचरणरत है
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की मातृ बाघिनें किसी भी टाइगर रिजर्व की आनुवंशिक विविधता और बाघों की स्थायी आबादी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती हैं।
वृद्धावस्था में भी दिखाई अदम्य जीवटता
जीवन के अंतिम वर्षों में पी.एन.-20 अत्यधिक वृद्ध हो चुकी थी और स्वयं शिकार करने में असमर्थ थी। फिर भी उसने जंगल में जीवित रहने की अद्भुत जिजीविषा का परिचय दिया। कई बार अन्य बाघों या तेंदुओं द्वारा छोड़े गए शिकार से उसे भोजन मिल जाता था।
अत्यधिक आयु के बावजूद इतने लंबे समय तक जीवित रहना उसकी असाधारण जीवटता और संघर्षशील जीवन शक्ति को दर्शाता है।
सम्मानपूर्वक दी गई अंतिम विदाई
(Pench Tigress PN 20 Death) के बाद पेंच टाइगर रिजर्व प्रबंधन तथा मुख्य वन संरक्षक सिवनी द्वारा भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की निर्धारित गाइडलाइंस के अनुसार वरिष्ठ वन्यजीव चिकित्सक और स्थानीय पशु चिकित्सक की उपस्थिति में पोस्टमार्टम एवं भस्मीकरण की प्रक्रिया पूरी की गई।
पेंच की पहचान बन चुकी थी यह बाघिन
पेंच नेशनल पार्क की पहचान केवल उसके घने जंगलों या पर्यटन से नहीं बल्कि उन बाघों से भी है जिन्होंने इस अभयारण्य को वैश्विक पहचान दिलाई।
(Pench Tigress PN 20 Death) वन्यजीव संरक्षण की दुनिया के लिए एक भावनात्मक क्षण है। उसकी संतानों की पीढ़ियाँ आने वाले वर्षों में भी पेंच के जंगलों में विचरण करती रहेंगी और यह बाघिन पेंच की संरक्षण गाथा में हमेशा जीवित रहेगी।




