सोमनाथ स्वाभिमान पर्व : सहनशीलता, पुनर्निर्माण और सनातन चेतना का प्रतीक
सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण के 1000 वर्ष और पुनः उद्घाटन के 75 वर्ष पूर्ण होने पर श्रद्धा व स्वाभिमान के साथ आयोजन
महादेव सोमनाथ मंदिर पर हुए ऐतिहासिक आक्रमण के 1000 वर्ष पूर्ण होने के उपरांत भी यह प्रसंग भारतीय सनातन संस्कृति की सहनशीलता, पुनः उत्थान और निरंतरता का जीवंत प्रतीक बना हुआ है।
इतिहास साक्षी है कि आक्रमणों के बावजूद सनातन आस्था कभी खंडित नहीं हुई, बल्कि हर बार और अधिक सशक्त होकर पुनः स्थापित हुई।
साथ ही, 11 मई 1951 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद जी की गरिमामयी उपस्थिति में सोमनाथ मंदिर के पुनः उद्घाटन को भी 75 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। यह अवसर राष्ट्र, धर्म और संस्कृति के गौरव का स्मरण कराता है।
“सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” का भव्य आयोजन
इसी पावन अवसर के तारतम्य में मठ मंदिर परिसर में भगवान शिव जी का विधिवत पूजन-अर्चन कर श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ
“सोमनाथ स्वाभिमान पर्व”मनाया गया।
इस धार्मिक अनुष्ठान में विधायक दिनेश राय “मुनमुन”,
पूर्व विधायक नरेश दिवाकर,
पूर्व जिला अध्यक्ष आलोक दुबे सहित
समस्त जिला एवं नगर पदाधिकारी तथा कार्यकर्ता गण उपस्थित रहे।

सभी ने एक स्वर में सोमनाथ मंदिर को सनातन संस्कृति की अस्मिता,
आत्मबल और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक बताया।
विराट हिन्दू सम्मेलन की तैयारियों को लेकर बैठक
पूजन-अर्चन के पश्चात आगामी “विराट हिन्दू सम्मेलन” के अंतर्गत आयोजित होने वाली
“जनजागरण वाहन रैली” की रूपरेखा,
मार्ग, सहभागिता एवं तैयारियों को लेकर एक आवश्यक बैठक आयोजित की गई।
बैठक में उपस्थित सभी पदाधिकारियों एवं
कार्यकर्ताओं ने जनजागरण अभियान को व्यापक स्वरूप देने,
समाज के प्रत्येक वर्ग को जोड़ने तथा
सनातन मूल्यों के संरक्षण हेतु संगठित प्रयास करने का संकल्प लिया।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं,
बल्कि यह संदेश है कि सनातन संस्कृति आक्रमणों से नहीं, बल्कि श्रद्धा, पुनर्निर्माण और आत्मबल से आगे बढ़ती है।
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