वन्यजीवों की तेजी से बढ़ रही संख्या, उत्पन्न हो रही प्रबंधन की समस्या
राष्ट्रीय विशेषज्ञयों की दो दिवसीय कार्यशाला में हुआ गहन विचार विमर्श
Seoni 09 March 2025
सिवनी यशो:- वन्य जीवों की निंरतंर बढ़ती संख्या और इनका कुशल प्रबंधन बड़ी चिंता का विषय बन रहा है । वन्य प्राणियों की सुरक्षा और मानव जीवन पर इसका विपरीत प्रभाव वन विशेषज्ञों के साथ सरकारों की चिंता का विषय बन रहा है विशेषकर मध्यप्रदेश में वन्य जीवों का प्रबंधन एक चुनौती बन रही है जिसके कुशल प्रबंधन के लिये मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राज्य वन्य प्राणी बोर्ड की पिछले दिनों संपन्न बैठक मे निर्देश दिया था कि मध्यप्रदेश मे ंकुशल वन्य जीव प्रबंधन के कारण बाघ, तेंदुओं एवं अन्य वन्य प्राणियों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है और आज मध्यप्रदेश देश का टाइगर स्टेट, लेपर्डस्टेट, वल्चरस्टेट, वुल्फ स्टेट एवं घडिय़ाल स्टेट है किन्तु यह भी सत्य है कि वन्य प्राणियों की बढ़ती संख्या प्रबंधकीय चुनौतियों को पैदाकर रही है। भविष्य में इनकी संख्या बढऩे के कारण चुनौतियां भी बढ़ेंगी। अत: भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिये देश भर के विशेष विशेषज्ञों को बुला कर भविष्य की इन चुनौतियोंसे निपटने की रणनीति बनानी होगी। इस हेतु प्रदेश के वरिष्ठ वन अधिकारियों की देश के वन्य जीव विशेषज्ञों के साथ एक कार्यशाला का आयोजन दो दिवसीय राष्ट्रीय वन्य जीव कार्यशालाÓÓमध्यप्रदेश के भविष्य के वन्य जीव प्रबंध हेतु रणनीतिÓÓके द्वितीय दिवस पेंच टाईगर रिजर्व सिवनी के खवासा स्थित पर्यटन सुविधा केन्द्र के कांफेंश हॉल, रेंज ऑफिस कर्माझिरी हॉल, रेंज ऑफिस खवासा बफर के हॉल, एवं क्वॉरेन्टीन सेंटर एवं वन्य जीव अस्पताल के हॉल में चार समूहों यथा:- भू-परिदृश्य प्रबंध, वन्य जीव आवास प्रबंध मानव-वन्य जीव द्वंद एवं समुदाय उक्त चारों समूहों में चारों विषयों पर गहन विचार-विमर्श हुआ।
उन्नत तकनीक का उपयोग करने पर विचार
भू-परिदृश्य प्रबंध समूह में संरक्षित क्षेत्रों के विस्तार और वन्य जीव गलियारों की स्थापना पर ध्यान केंद्रित किया गया ताकि पारिस्थितिकीय संबंध बनाए रखा जा सके। इसके अलावा, कार्य आयोजना में परिदृश्य प्रबंधन को शामिल करने और ड्रोन तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग करने पर चर्चा की गई।
संकट ग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण विशेष फोकस हो
वन्य जीव आवास प्रबंधन समूह में घास भूमि प्रबंधन, कम ज्ञात और संकट ग्रस्त प्रजातियों जैसे सोनचिरैया (ग्रेट इंडियन बस्टार्ड) कराकल (फेलिक्स कराकल)और खरमौर (लेसर फ्लोरिकन) के संरक्षण और वन्य जीव प्रबंधन में मानव संसाधन चुनौतियों पर चर्चा की गई। आवास संरक्षण, पुनस्र्थापन केंद्रों की स्थापना पर विशेष जोर दिया गया।
मानव वन्य जीव द्वंद कम करने फील्ड और रेस्क्यु टीम को आधुनिक किया जाये
मानव वन्य जीव – द्वंद समूह में बढ़ते मानव – वन्य जीव संघर्षों के समाधान के लिए रणनीतियों पर चर्चा की गई। विशेष रूप से बाघ, हाथी और तेंदुए जैसी प्रजातियों के कारण होने वाली फसल क्षति, मवेशियों पर हमले और मानव हानि को कम करने के उपायो ंपर विचार किया गया। इस दौरान फील्ड इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और रेस्क्यू टीमों को आधुनिक उपकरणों से लैसकर ने को प्राथमिकता दी गई।
स्थानीय समुदाय की भागीदारी को बढ़ाया जाया
समुदाय समूह में स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाने के लिए इस सत्र में इको-पर्यटनको बढ़ावा देने, वैकल्पिक आजीविका प्रदान करने और बफर गांवों में आधार भूत संरचनाओं के विकास पर चर्चा की गई ताकि दीर्घकालिक संरक्षण के प्रयासों से स्थानीय समुदायों को लाभ मिल सके।
80 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुये कार्यशाला में
कार्यशाला में प्रधान मुख्य वनसंरक्षक (वन्यप्राणी) एवं मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक शुभरंजन सेन सहित मध्यप्रदेश शासन वन विभाग के अन्य प्रधान मुख्य वनसंरक्षक, अपर प्रधान मुख्य वनसंरक्षक, मुख्य वनसंरक्षक एवं क्षेत्र संचालक टाईगर रिजर्व, वनसंरक्षक,वन मंडलाधिकारी तथा राष्ट्रीय वन्य जीव संस्थान, देहरादून के वरिष्ठ वैज्ञानिक, वन विभाग के वन्यजीव क्षेत्र के विशेषज्ञ सेवानिवृत अधिकारी एव ंगैर शासकीय संगठनों (एन.जी.ओ.) के पदाधिकारी सहित 80 से अधिक प्रति भागी इस कार्यशाला में शामिल हुए। कार्यशाला के महत्वपूर्ण निष्कर्षों को संकलित कर राज्य सरकार को भविष्य की वन्य जीव संरक्षण रणनीतियों के कार्यान्वयन के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।




