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“गरीब हितग्राहियों के राशन पर डाका? 6 माह से अनाज से वंचित, रिकॉर्ड में दिख रहा वितरण”

Dainik Yashonnati

Dainik Yashonnati / Apr 25, 2026 09:04 pm / Post views : 256

“गरीब हितग्राहियों के राशन पर डाका? 6 माह से अनाज से वंचित, रिकॉर्ड में दिख रहा वितरण”
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सिवनी राशन अनियमितता - 6 माह से हितग्राही वंचित , व्यवस्था पर गंभीर सवाल

Seoni 25 April 2026 सिवनी यशो:- सिवनी। सरकार द्वारा आदिवासी और गरीब वर्ग के लिए चलाई जा रही राशन वितरण योजना को लेकर जिले के आदिवासी बहुल क्षेत्रों से चिंताजनक शिकायतें सामने आई हैं।

लखनादौन और धनौरा क्षेत्र के कई हितग्राहियों ने आरोप लगाया है कि उन्हें पिछले लगभग छह महीनों से राशन प्राप्त नहीं हुआ, जबकि विभागीय रिकॉर्ड में वितरण नियमित दर्शाया जा रहा है।

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जमीनी हकीकत: रिकॉर्ड और वितरण में अंतर

ग्रामीणों के अनुसार, हर माह उन्हें कॉल के माध्यम से यह पूछा जाता है कि राशन प्राप्त हुआ या नहीं।

  • “नहीं मिला” बताने पर संबंधित उचित मूल्य दुकान पर भेजा जाता है
  • दुकान पर पहुंचने पर राशन उपलब्ध नहीं बताया जाता है

 इससे यह सवाल उठ रहा है कि
यदि वितरण नहीं हुआ, तो रिकॉर्ड में एंट्री कैसे हुई?

 विशिष्ट मामला: धनककड़ी उचित मूल्य दुकान

लखनादौन विकासखंड के धनककड़ी केंद्र का मामला प्रमुख रूप से सामने आया है, जहां:

  • कई हितग्राही 5–6 माह से चक्कर लगा रहे हैं
  • वितरण न होने की शिकायतें बार-बार दर्ज हुईं

धनौरा क्षेत्र के सुनवारा ग्राम से भी इसी प्रकार की शिकायतें सामने आई हैं।

 शिकायतें, लेकिन कार्रवाई नहीं

हितग्राहियों ने:

  • विकासखंड स्तर पर आवेदन दिए
  • जिला स्तर पर भी शिकायत दर्ज कराई

इसके बावजूद:

  • नियमित वितरण सुनिश्चित नहीं हुआ
  • कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई

 अधिकारियों के बयान

जिला खाद आपूर्ति अधिकारी मनोज पुरवईया का कहना है:

“कुछ शिकायतें प्राप्त हुई हैं। जांच के आदेश दिए गए हैं। गड़बड़ी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।”

वहीं कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी अमित चौधरी ने बताया:

“धनककड़ी मामले में प्रकरण तैयार कर एसडीएम को भेजा गया है, आगे की कार्रवाई उनके स्तर से होगी।”

 पूरे जिले में अनियमितताओं की आशंका

ग्रामीणों का आरोप है कि यह समस्या केवल एक-दो दुकानों तक सीमित नहीं है।
लखनादौन, धनौरा सहित अन्य क्षेत्रों से भी इसी तरह की शिकायतें सामने आ रही हैं।

👉 इससे यह संकेत मिलता है कि:
मामला isolated नहीं, बल्कि व्यापक हो सकता है।

 मुख्य सवाल

  • यदि वितरण नहीं हुआ, तो रिकॉर्ड में एंट्री किस आधार पर?
  • शिकायतों के बाद भी सुधार क्यों नहीं?
  • जिम्मेदारी तय कब होगी?

सरकार आदिवासी और गरीब वर्ग के कल्याण के प्रति प्रतिबद्ध है, ऐसे में इस प्रकार की शिकायतें प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करती हैं। अब आवश्यक है कि जांच निष्पक्ष और समयबद्ध हो, ताकि वास्तविक हितग्राहियों तक उनका हक बिना बाधा पहुंच सके।

https://samayjagat.in/news.php?id=574284

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