


सिवनी यशो :- इस्लामी माह सफ़र का चांद नज़र आते ही देशभर में सूफी संतों के उर्स की शुरुआत हो जाती है।
इसी क्रम में उर्दू तिथि 25 सफ़र एवं अंग्रेजी तारीख 20 अगस्त (बुधवार) को उर्स-ए-आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा खान हनफी सूफी बरेलवी रहमतुल्लाह अलैह बड़े पैमाने पर मनाया जाएगा।
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उत्तर प्रदेश के बरेली शरीफ़ स्थित दरगाह खानकाह-ए-आला हज़रत में इस अवसर पर विश्वभर से धर्मगुरु और अनुयायी एकत्र होकर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
सिवनी जिले में भी अहले सुन्नत व जमात, सुन्नी हनफी सूफी बरेलवी समुदाय की सभी मस्जिदों व मदरसों में फातिहा और लंगर का आयोजन होगा।
इमाम अहमद रज़ा खान का जन्म 1856 में उत्तर प्रदेश के बरेली के सौदागरान मोहल्ले में एक विद्वान और सूफी परिवार में हुआ था।
आपके दादा-परदादा अपने समय के प्रसिद्ध सूफी संत और वली थे।
आपने धार्मिक विद्वता के साथ विज्ञान, गणित, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, बीजगणित जैसे विषयों पर 1300 से अधिक पुस्तकें लिखीं, जिनमें सिर्फ गणित पर ही 50 से अधिक पुस्तकें शामिल हैं।
आपको 56 भाषाओं और विषयों का ज्ञान था। आपका निधन 1921 में 25 सफ़र को हुआ, और उसी दिन से आपका उर्स मनाया जाता है।
जिले में भारतीय सुन्नी हनफी सूफी मुसलमानों के संगठन तहरीक जमात रज़ा-ए-मुस्तफ़ा, लब्बैक यूथ फोर्स, आल इंडिया सुन्नी हनफी सूफी मुस्लिम त्योहार कमेटी और ग़रीब नवाज़ फाउंडेशन ने शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से उर्स मनाने की अपील की है।
सूफी समाजसेवी मंज़ूर रज़ा क़ादरी, राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष, लब्बैक यूथ फोर्स, आतंकवाद विरोधी संगठन, सिवनी (म.प्र.) ने कहा कि उर्स-ए-आला हज़रत सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि ज्ञान, शांति और भाईचारे का संदेश है।