अरबों की सड़कें कहां बनीं? अंतिम यात्रा का रास्ता भी दलदल में, कंधों पर शव ले जाने को मजबूर ग्रामीण
सिवनी के देवरी कला में 1.5 किमी मोक्षधाम मार्ग बदहाल, शव वाहन फंस रहे, ग्रामीणों का प्रशासन से सवाल—जब अंतिम यात्रा का रास्ता नहीं बना तो सड़कों पर खर्च हुई राशि गई कहां?
सिवनी/छपारा यशो:- बरसात शुरू होते ही ग्रामीण सड़कों की हकीकत एक बार फिर सामने आने लगी है। जिले में ग्रामीण सड़क निर्माण और मरम्मत के नाम पर हर वर्ष करोड़ों ही नहीं बल्कि विभिन्न योजनाओं के माध्यम से अरबों रुपये खर्च किए जाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हालात इन दावों की पोल खोल रहे हैं।
सवाल यह है कि यदि अंतिम यात्रा का मार्ग भी सुरक्षित नहीं है, तो आखिर सड़क निर्माण पर खर्च की जा रही राशि जा कहां रही है?
छपारा विकासखंड के ग्राम देवरी कला में गांव से मोक्षधाम तक जाने वाला लगभग 1 से 1.5 किलोमीटर लंबा मार्ग बारिश के कारण पूरी तरह कीचड़ और दलदल में तब्दील हो चुका है। जगह-जगह गहरे गड्ढों में पानी भर गया है, जिससे रास्ता पहचानना तक मुश्किल हो गया है। इस मार्ग से गुजरना हर किसी के लिए जोखिम भरा है, लेकिन सबसे अधिक पीड़ा तब होती है जब किसी ग्रामीण की अंतिम यात्रा इसी रास्ते से निकालनी पड़ती है।
शव वाहन भी नहीं पहुंच पा रहे मोक्षधाम
ग्रामीणों के अनुसार कीचड़ और गहरे गड्ढों के कारण शव वाहन अक्सर रास्ते में ही फंस जाते हैं या फिर बीच मार्ग से वापस लौटने को मजबूर हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में परिजनों और ग्रामीणों को शव को कंधों पर उठाकर फिसलन भरे रास्ते से मोक्षधाम तक ले जाना पड़ता है। दोपहिया वाहन भी इस मार्ग पर आसानी से नहीं चल पा रहे हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा लगातार बना हुआ है।
हर साल वही समस्या, हर बार केवल आश्वासन
ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या कोई नई नहीं है। हर वर्ष बरसात के मौसम में यही स्थिति बनती है। कई बार जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन आज तक स्थायी समाधान नहीं किया गया। सड़क निर्माण और विकास के बड़े-बड़े दावों के बावजूद ग्रामीणों को आज भी मूलभूत सुविधा के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
अंतिम यात्रा का सम्मान भी नहीं बचा
ग्रामीणों का कहना है कि मोक्षधाम तक जाने वाला मार्ग केवल एक सड़क नहीं बल्कि हर व्यक्ति की अंतिम यात्रा का सम्मानजनक रास्ता है। यदि उस मार्ग की भी यह स्थिति है तो ग्रामीण विकास के दावों पर गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक है। जिस जिले में सड़क निर्माण पर भारी बजट खर्च होने की बात कही जाती है, वहां अंतिम संस्कार के लिए भी लोगों को कीचड़ से जूझना पड़े, यह प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न है।
ग्रामीणों ने की तत्काल निर्माण की मांग
ग्राम के हेमंत पंचेश्वर सहित अन्य ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि मोक्षधाम मार्ग का तत्काल निर्माण अथवा मरम्मत कराई जाए। उनका कहना है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो पूरे बरसात के मौसम में ग्रामीणों को इसी तरह की परेशानी झेलनी पड़ेगी और किसी भी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी।
बड़ा सवाल
ग्रामीण सड़कों पर खर्च होने वाली करोड़ों-अरबों रुपये की राशि आखिर कहां जा रही है?
जब अंतिम यात्रा का मार्ग भी सुरक्षित नहीं, तो विकास के दावे किस आधार पर किए जा रहे हैं?
क्या जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय होगी या फिर इस बार भी केवल आश्वासन ही मिलेगा?
(नोट: यह समाचार ग्रामीणों द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी और स्थानीय स्थिति के आधार पर तैयार किया गया है। यदि संबंधित विभाग या प्रशासन अपना पक्ष देना चाहता है, तो उसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)



