सिवनी में जंगल में मवेशी चराने गए बुजुर्ग पर बाघ का हमला, गंभीर हालत में नागपुर रेफर
कुरई वन परिक्षेत्र के पिपरिया बीट में घटी घटना, घायल 65 वर्षीय ग्रामीण को प्राथमिक उपचार के बाद किया गया रेफर, वन विभाग ने राहत राशि दी और क्षेत्र में अलर्ट जारी
जंगल में मवेशी चराने गए 65 वर्षीय ग्रामीण पर बाघ ने अचानक हमला कर दिया। हमले में गंभीर रूप से घायल ग्रामीण को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कुरई से नागपुर रेफर किया गया। घटना सिवनी जिले के दक्षिण सामान्य वन मंडल अंतर्गत बीट पिपरिया के जंगल में गुरुवार शाम हुई। वन विभाग ने त्वरित राहत राशि देकर क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी है।
सिवनी यशो :- दक्षिण सामान्य वन मंडल के परिक्षेत्र कुरई अंतर्गत बीट पिपरिया के जंगल में गुरुवार, 20 नवंबर 2025 की शाम एक बाघ ने मवेशी चराते ग्रामीण पर हमला कर दिया, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया। ग्राम रमली निवासी 65 वर्षीय रतनलाल अड़मबे रोज की तरह मवेशियों को चराने जंगल गए थे, तभी अचानक झाड़ियों से निकले बाघ ने उन पर हमला कर दिया।
हमले में रतनलाल गंभीर रूप से घायल हो गए और किसी तरह शोर मचाकर ग्रामीणों को बुलाया। घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग का अमला तत्काल मौके पर पहुंचा और उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र कुरई भेजा गया। प्राथमिक इलाज के बाद डॉक्टरों ने हालत को गंभीर देखते हुए नागपुर रेफर कर दिया। साथ ही वन विभाग के दो कर्मियों को घायल के साथ नागपुर भेजा गया।
दक्षिण सामान्य वन मंडल के अनुविभागीय अधिकारी (SDO) योगेश पटेल ने बताया कि घटना शाम लगभग 4:30 बजे कक्ष क्रमांक पीएफ 264, बीट पिपरिया में हुई। विभाग की ओर से त्वरित सहायता के रूप में 10,000 रुपये की राहत राशि परिजनों को प्रदान कर दी गई है।
वन विभाग द्वारा क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी गई है और
आसपास के गांवों के लोगों को जंगल में अकेले न जाने,
समूह में जाने और मवेशियों को खुले क्षेत्र में चराने की सलाह दी गई है।
विभाग ने बाघ की गतिविधियों पर निगरानी के लिए कैमरे और गश्ती दल भी सक्रिय कर दिए हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों के लिए वन विभाग की सलाह
जंगल में अकेले न जाएं
मवेशी चराने जाते समय समूह में रहें
बच्चों और बुजुर्गों को जोखिम वाले क्षेत्रों में न भेजें
जंगली जानवरों की गतिविधि की सूचना तुरंत वन विभाग को दें
यह घटना क्या बताती है?
सिवनी और इसके आसपास के वन क्षेत्रों में टाइगर मूवमेंट लगातार सक्रिय है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष के मामले ग्रामीण इलाकों में बढ़ रहे हैं।
सतर्कता और संवेदनशील वन सुरक्षा प्रबंधन की जरूरत बढ़ी है।





