⚡ सिवनी पुलिस में हड़कंप: निरंकुशता की हदें पार, निलंबनों और तबादलों से उठे सवाल
भ्रष्ट आचरण, अर्थपिपासा और मनमानी ने पुलिस की छवि पर लगाया गहरा दाग - जनता में आक्रोश
Seoni 12 October 2025
सिवनी यशो:- सिवनी जिले में पुलिस विभाग अब अनुशासन की नहीं, निरंकुशता की मिसाल बनता जा रहा है।
भ्रष्ट आचरण, पद का दुरुपयोग और धन की हवस (अर्थपिपासा) ने जिले की पुलिस व्यवस्था को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।
दो दिन पहले ही हवाला कांड में लिप्त पाए गए एसडीओपी और दस पुलिस कर्मियों के निलंबन ने पुलिस महकमे की डकैती जैसी हरकतों का पर्दाफाश किया था।
अब इस सिलसिले में एक और कार्रवाई सामने आई है — थाना लखनवाड़ा प्रभारी निरीक्षक चन्द्रकिशोर सिरसाम को गंभीर लापरवाही के आरोप में एसपी सुनील मेहता ने रविवार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
🚨 अपराध जांच में लापरवाही, पर ‘आरोप अस्पष्ट’
सूत्रों के अनुसार, थाना लखनवाड़ा में दर्ज अपराध क्रमांक 469/25, धारा 112(2), 3(5) बी.एन.एस. के प्रकरण में निरीक्षक सिरसाम की विवेचना में गंभीर त्रुटियाँ पाई गईं।
हालांकि, पुलिस विभाग ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि इस लापरवाही की प्रकृति क्या थी और इसके पीछे कौन-सी मंशा या लाभ की प्रेरणा थी।
पुलिस अधीक्षक द्वारा जारी आदेश में केवल “प्रथम दृष्टया लापरवाही” शब्दों का प्रयोग किया गया है — परंतु यह लापरवाही अपराध की ढिलाई थी या अपराधियों से साठगांठ, यह सवाल अब भी अनुत्तरित है।
💰 हवाला प्रकरण की जांच और पुलिस की छवि पर दाग
इस निलंबन से पहले ही सिवनी पुलिस विभाग में हवाला की राशि पर कथित पुलिस लूट का मामला सुर्खियों में था।
जिले के कुछ अधिकारी और कर्मी हवाला रैकेट से मिली रकम में बंटवारे को लेकर फंसे बताए जा रहे हैं।
हालांकि, अब तक न तो एफआईआर दर्ज की गई है और न ही जप्त धनराशि का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक हुआ है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या पुलिस अपने ही कर्मियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही से बचने की कोशिश कर रही है?
🧩 तबादले भी सवालों के घेरे में
इधर, एसपी द्वारा जारी तबादला सूची में पाँच निरीक्षकों और

उपनिरीक्षकों को विभिन्न थानों में भेजा गया है।
इनमें खेमेन्द्र जैतवार, प्रीतम सिंह तिलगाम,
चैनसिंह उईके,
लक्ष्मण सिंह झारिया और
मनोज जंघेला शामिल हैं।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि-
इन तबादलों का उद्देश्य “प्रशासनिक दृष्टि से सुधार” बताया गया है,
लेकिन स्थानीय जनमानस में यह धारणा गहराती जा रही है कि-
यह “सुधार” नहीं बल्कि “संकट प्रबंधन” है — ताकि मीडिया और जनता का ध्यान बड़े मामलों से हटाया जा सके।
⚖️ जनता के मन में उठे सवाल
सिवनी की जनता अब यह जानना चाहती है कि —
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जब पुलिस ही कानून की आड़ में सौदेबाजी और संदिग्ध गतिविधियों में शामिल पाई जा रही है,
तो आम नागरिकों के लिए न्याय की उम्मीद किससे की जाए? -
क्या निलंबन मात्र “औपचारिक दिखावा” है या इसके पीछे कोई ठोस आंतरिक जांच और दंड प्रक्रिया भी होगी?
💬 संपादकीय टिप्पणी
सिवनी पुलिस प्रशासन अब एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है,
जहाँ भ्रष्टाचार और अनुशासन के बीच की रेखा मिटती जा रही है।
निलंबन और तबादले अगर सिर्फ दिखावा बनकर रह गए,
तो जनता का विश्वास पुनः स्थापित करना कठिन होगा।
पुलिस महकमे को चाहिए कि वह पारदर्शिता,
जवाबदेही और कानूनी कार्रवाई से यह साबित करे कि –
कानून सबके लिए समान है – चाहे वह वर्दीधारी ही क्यों न हो



