भक्ति के प्रति जहाँ शरणागति होती है वहाँ भगवान बैकुंठ छोड़कर पहुँच जाते है – स्वामी प्रज्ञानानंद
11 Apr 2023
सिवनी यशो:- संसार समस्याओं का मायाजाल है संसार में जो भी आता है उसे समस्याओं का सामना करना पड़ता है भगवान श्रीराम भगवान श्रीकृष्ण ने भी समस्याओं का सामना किया उनके जीवन में भी कष्ट आये परंतु उन्होंंने धर्म की रक्षा के लिये सिद्धांतो से कोई समझौता नहीं किया । इस संसार के लिये कलियुग में भागवत कथा सारी समस्याओं का समाधान देने वाला पवित्र धर्म शास्त्र है परंतु भागवत कथा में केवल बैठ जाने से समस्याओं का समाधान नहीं है कथा को अपने आप में बैठा लेने पर समाधान मिलेगा इसके प्रति श्रद्धा और भक्ति आवश्यक है ।
इस आशय के उद्गार पूज्यपाद द्विपीठाधीश्वर ब्रम्हलीन शंकराचार्य स्वामी स्वारूपानंद जी सरस्वती महाराज के परम प्रिय शिष्य महामंडलेश्वर दंडी स्वामी पूज्य प्रज्ञानानंद जी महाराज ने राजश्री पैलेस में बैस परिवार द्वारा आयोजित भागवत कथा की व्यासपीठ से व्यक्त किये । पूज्य स्वामी जी ने कहा कि भगवान के प्रति समर्पण, शरणागति का भाव परमात्मा से मिलाने में सरल साधन है । परमात्मा से मिलने के लिये आपके अंदर भक्ति का भाव होना चाहिये भक्ति जहाँ होती है वहाँ भगवान वहाँ स्वयं आते है भक्ति भगवान की प्रिया है, पत्नि है । परमात्मा के भक्त के पास पहले भकित आती है यह भक्त के मन को निर्मल करती है मन के लोभ मोह द्वेष को दूर करती है और जब भक्त का मन निर्मल हो जाता है भगवान स्वयं आ जाते है जहाँ भक्ति होती है वहाँ भगवान बैंकुंठ छोड़कर पहुँच जाते है ।
स्वामी जी ने बताया कि भक्ति के दो पुत्र है ज्ञान और वैराग्य ज्ञान मार्ग पर जिज्ञासु चलते है परंतु उन्हें भगवान के पास जाना पड़ता है और लंबा रास्ता तय करना पड़ता है जबकि वैराग्य के मार्ग पर चलने वाले भक्त के निर्मल मन में प्रभु स्वयं भक्ति सहित आकर विराजित हो जाते है ।
स्वामी जी ने भागवत स्वरूप का वर्णन करते हुये बताया कि भागवत स्वयं भगवान का रूप है भगवान के 12 स्कंध है इसी प्रकार भागवत कथा के भी स्कंध है । महाराजश्री ने कहा कि भागवत कथा जीवन की हर समस्याओं का समाधान देने वाला अमृत ग्रांथ है यह भगवत भक्ति प्रदान करता है कलियुग में यह भवसागर को पार लगाने वाला सद्गति देने वाला महाग्रंथ है इसके प्रति श्रद्धा और आस्था आपके जीवन में सौदर्य भर देगा । भगवान की भक्ति सद्गुरू की सद् इच्छा से प्राप्त होती है गुरू आपको भवसागर से निकालकर भगवत भाव में डूबो देता है । स्वामी जी ने कहा कि भक्ति में श्रद्धा और समर्पण होना चाहिये सौदागिरी नहीं । कथा के दौरान उन्होंने चमत्कारी बाबाओं के मायाजाल से सतर्क रहने की ओर इशारा किया ।




