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डीजे से कानफोडू शोर, प्रशासन से नियंत्रित करने की अपेक्षा

छपारा यशो:- वर्तमान समय में चल रहे शादी-ब्याह के सीजन के चलते सड़कों, मैरिज गार्डन सहित अनेक स्थानों पर धूमधड़ाके वाले बेहद तेज आवाज के कान फोडऩे वाले डीजे की बहार सी आ जाती है. दिन में तो ठीक लेकिन देर रात तक तेज आवाज में डीजे बजाना मानो फैशन सा बन गया है. हालांकि, इससे सिर्फ उन्हें ही आनंद मिलता है जिनके यहां समारोह होता है बाकी आसपास निवास करने वाले लोगों को तो वह समय निकालना मुश्किल हो जाता है। विशेषकर हृदय रोगी, उम्रदराज व्यक्ति, नवजात शिशु, मरीज आदि इस तीव्र ध्वनि से खासे प्रभावित होते हैं। किंतु एक वाहन पर
बड़े बड़े और काफी संख्या में बक्सों में तेज आवाज में संगीत बजाकर ध्वनि प्रदूषण फैलाते ये डीजे वाले सिर्फ व्यवसाय के लिए किसी की परवाह नही करते डीजे बजवाने वाले भी उस समय ये भूल जाते हैं कि अन्य लोगों को कितनी परेशानी होती होगी। वही प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने शपथ लेने बाद प्रशासनिक बैठक में जनहित में एक महत्त्वपूर्ण निर्णय लिया था कि ध्वनि विस्तारक यंत्र जैसे लाउड स्पीकर और डीजे आदि पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए गए थे। किंतु इस सबके बाद भी आदेश निर्देश का असर फिलहाल नजर नहीं आ रहा है। युवक युवतियों डीजे के कानफोडू शोर पर झूमते नजर आते, खूब मस्ती करते हैं ।
किन्तु यह शोर उनमें चिड़चिड़ापन, गुस्सा, तनाव और मारकाट के लक्षण पैदा करता है। बढ़ते अपराधों के पीछे डीजे का शोर भी एक कारण है। यह शोर मकानों, पुलों और ऊंची इमारतों को कमजोर करता है। आपने डीजे के शोर के समय महसूस किया होगा कि घर पुल और ऊंची इमारतों में कम्पन्न होने लगता है। इस कम्पन्न से घर पुल और ऊंची इमारतें कमजोर हो जाती हैं। जो तत्काल दिखाई नहीं देते हैं, बाद में उनमें दरार पडऩे लगती हैं। बड़े बड़े अधिकारियों, नेताओं और प्रभावशाली लोगों के निवास के आसपास शोर करना प्रतिबंधित रहता है। ये लोग शोर के प्रभाव से सुरक्षित रहते हैं, चैन की नींद सोते हैं। आम जनता परेशान होती रहती है। इसी वजह से शासन प्रशासन से अपेक्षा है कि इस ओर जनता के हित में ठोस कदम उठाए।

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