सिवनी यशो:- हमारा मन माखन है और इस मन रूपी माखन को श्री कृष्ण कन्हैया चुरा लेते हैं, इस सृष्टि के रचयिता जगदीश हैं संपूर्ण ऐश्वर्यों की अधिष्ठात्री महालक्ष्मी उनकी दासी हैं ।
उक्ताशय की बात जैतपुर में चल रही कथा में आज पूज्यपाद ब्रह्मचारी जी (Brahmachari Shri Nirvikalp Swaroop Ji Maharaj) ने भगवान कृष्ण के द्वारा माखन चोरी लीला के आध्यात्मिक रहस्य की व्याख्या करते हुए आगे कहा कि गोपियों ने कृष्ण के मन को चुरा लिया है इसलिए भगवान कृष्ण माखन रूपी मन को चुराते हैं भगवान को मन अर्पण करने से क्या होता है इस प्रश्न का उत्तर देते हुए पूज्यपाद ब्रह्मचारी जी ने कहा कि यदि भगवान को अपना मन अर्पण किया जाए तो इसमें बुरे विचार नहीं और जैसे पारसमणी के स्पर्श से मालिन लोहा भी सोना बन जाता है इस प्रकार हमारा कलुषित मन भी भगवान का सानिध्य पाकर निर्बल एवं दोष रहित हो जाता है कृष्ण को चौराग्यगण्य अर्थात चोरों का सरदार भी विद्वान लोग कहते हैं वह गोपियों का चीर हरण करते हैं इस प्रसंग में पूज्यपाद ब्रह्मचारी जी ने कहा कि मदन मोहन श्री कृष्ण मन की अनेक वृत्ति रूपी गोपियों के, आशा रूपी यमुना में वासना रूपी वस्त्रो का हरण करते हैं मदन मोहन सदन तन मे छुपे बंसी बजाते हैं जिसमें ना तो मन हो और ना ही मोह हो वही मोहन है जो हमारे हृदय में छुपकर वंशी बजाते हुए अपनी ओर आकर्षित करते हैं भगवान से मिलने के लिए। भगवान और हमारे बीच वासना रूपी पर्दा हटाना पड़ेगा गोवर्धन लीला की आध्यात्मिक रहस्यात्मक चर्चा करते हुए गुरुदेव ने कहा कि गौ शब्द का अर्थ ज्ञान भक्ति इंद्रिय होता है जो ज्ञान भक्ति और इंद्रियों के द्वारा भगवान की ओर ले जाता है या भगवान से मिलना है वह गोवर्धन है गोवर्धन लीला के पश्चात स्वर्ग की कामधेनु ने ब्रज में आकर अपने दूध से कृष्ण का अभिषेक किया तभी से कृष्ण का एक नाम गोविंद हुआ उसका अर्थ है इंद्रियों एवं गौ को रक्षित करें वह गोविंद है।
सत्संग के दौरान ब्रह्मचारी जी ने कहा कि हमारे शरीर की इंद्रिया नाक कान आँख मुहँ मन इत्यादि से ना चाहते हुए भी कचरा आ ही जाता है सत्संग से मन के विचारों का कचरा साफ होता है नियमित सत्संग रूपी झाड़ू से गंदे विचारों की सफाई जरूरी है, स्वछता से लक्ष्मी आती है और विचारों में स्वछता ना हो तो उनकी बडी बहन दरिद्रता आ जाती है।



