बैंक खाते सील, संपत्ति जप्त और भेजा जायेगा जेल, अवैध कालोनाईजरों पर सख्त मोहन सरकार
अवैध कारोबारियों और भ्रष्ट कर्मचारियों आचार संहिता के बाद होगी ताबड़तोड़ कार्यवाही
भोपाल :- लोकसभा चुनाव( Lok Sabha Election) की आचार संहित हटने के साथ ही मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में अवैध (waidh) कामो के विरूद्ध ताबड़तोड़ कार्यवाही (swift action) प्रारंभ होने के अनुमान है । प्रदेश की मोहन सरकार के दिख रहे रवैये से स्पष्ट हो रहा है कि आने वाला समय अवैध कारोबारियो और भ्रष्ट अधिकारियों के लिये भारी पडऩे वाला है । मुख्यमंत्री ने अफसरों से साफ-साफ कह दिया है कि मध्य प्रदेश में अवैध काम नहीं चलने चाहिए।
हालांकि प्रदेश के मुख्यमंत्री के निर्देश जिस तरह से कार्यवाहियाँ हो रही है वह स्पष्ट कर रही है कि भ्रष्ट और अनैतिक गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिये मुस्तैदी से कार्य होगा । देवास जिले में एक साथ 18 पटवारियों को न केवल निलंबित किया गया बल्कि उनसे वह सारी राशि वसूली गयी जो किसानों को फसल क्षति के मुआवजा के वितरण के लिये आयी थी और उस राशि को पटवारियों ने हेराफेरी कर डकार लिया था ।
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इसी प्रकार सतना में गेहूं खरीदी में फर्जीवाड़ा (fraud) करने वाले नागरिक आपूर्ति निगम के जिला प्रबंधक पर त्वरित रूप से लिया गया एक्शन भी प्रदेश सरकार की मंशा को स्पष्ट कर रहा है । यहाँ बता दे कि सतना जिले मे समर्थन मूल्य पर 13 ट्रक गेहूं की खरीदी कागजो मे दर्शाकर भुगतान करना बता दिया गया था । इस मामले में नागरिक आपूॢत निगम के जिला प्रबंधक को निलंबित कर दिया गया है ।
प्रदेश में अवैध खनिज माफियाओ पर भी कार्यवाही के सख्त निर्देश जारी किये गये है अनेक जिलों में प्रशासन का एक्शन (Administration action) दिखाई दे रहा है । सरकार के एक्शन से अवैध तरीके से खनिज का कारोबार करने वाले परेशान हो गये है ।
बताया जा रहा है कि आने वाले समय में अवैध तरीक से कारोबार करने वालो पर ताबड़तोड़ कार्यवाही प्रारंभ होने वाली है जिसके प्रदेश के अधिकारियों द्वारा पूरी कार्य योजना तैयार की जा रही है ।
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भोपाल सहित कुछ स्थानों पर कालोनाईजारो पर हुई कार्यवाही
प्रदेश सरकार अवैध तरीके कालोनियों का निर्माण करने वाले कालोनाईजरों (colonizers) पर प्राथमिकता से कार्यवाही करने के मूड में है । प्रदेश की राजधानी भोपाल (Capital Bhopal) सहित कुछ स्थानों पर कालोनाईजारो पर सरकार ने शिकंजा कसना प्रारंभ भी कर दिया है ।
भोपाल जिले में मंगलवार को जिला प्रशासन ने अवैध कॉलोनी (illegal colony) को लेकर बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। हताईखेड़ा में विकसित हो रही एक अवैध कॉलोनी में पक्के निर्माण को प्रशासन के बुलडोजर ने ढहा दिया। अधिकारियों के अनुसार बुधवार को भी भोपाल की ऐसी कई कॉलोनियों पर कार्रवाई की जाएगी।
अवैध कालोनी निर्माणा करने वालों को सीधा भेंजे जेल
मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि नियम विरुद्ध कालोनी निर्माण पर रोक लगाने के लिए नियम और सख्त बनाया जायेगा । इसके तहत अब नियम विरुद्ध कॉलोनी बनाई तो कॉलोनाइजर पर एफआईआर (FIR) दर्ज कर सीधे जेल भेजा जाएगा। वहीं, उसकी संपत्ति भी जब्त कर बैंक खाते सीज किए जाएंगे।
सरकार का कहना है कि मध्य प्रदेश नगर पालिका कॉलोनी विकास नियम में 1998 से ही प्रावधान है कि कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त कॉलोनाइजर पर कार्रवाई कर उसे जेल तक भेज सकते हैं। वहीं इसे संज्ञेय अपराध मानते हुए नियमों में यह भी प्रावधान है कि पुलिस बिना किसी पूछताछ के अनधिकृत कॉलोनी काटने वाले कॉलोनाइजर को गिरफ्तार कर सकती है। लेकिन नियम विरुद्ध कॉलोनी बनाने वाले कॉलोनाइजर पर न तो अब तक कोई एफआईआर दर्ज की गई और न ही किसी कॉलोनाइजर को जेल हुई। परिणाम स्वरूप नियम विरुद्ध कालोनी बना दी जाती है और कालोनी में रहने वाले लोगो को मूलभूत सुविधाओं के लिये परेशान होना पड़ता है ।
मोहन सरकार नगरीय क्षेत्रों में कालोनी विकास के नियमों में संशोधन करने की पूरी तैयारी में है और इसके लिये पूरा डाफ्ट तैयार हो चुका है जिसे कैबिनेट (Cabinet)के स्वीकृति के बाद लागू कर दिये जाने की पूरी संभावना बताया जा रही है ।
कृषि भूमि में मनमानी कालोनियों का निर्माण करने वाले बिना अनुमति के प्लाटिंग कर देते हे और क्रेता खरीद कर बिना अनुमति के मकान बना लेते है ऐसी अनाधिकृत कालोनियों को सरकार अधिग्रहण कर वहाँ के खाली प्लाट बेचकर कालोनी का समुचित विकास करेगी । ऐसी कालोनियों का सरकार सर्वे करा रही है और सर्वे कार्य तक प्लाटों की खरीदी बिक्री और नामांतरण पर प्रतिबंध रहेगा ।
वर्तमान में कालोनी के संबंध में यह नियम है
प्रदेश की पूर्वर्ती शिवराज सरकार ने अवैध कालोनियों को वैध करने के लिये घोषणाएँ की और कालोनाईजारों पर कार्यवाही करने के निर्देश भी जारी किये थे परंतु बहुत कुछ हुआ नहीं । शिवराज सरकार ने पहले वर्ष 2016 तक की अवैध कालोनियों को वैध करने की घोषण की थी फिर वर्ष 2022 तक की अनधिकृत कॉलोनियां वैध करने के निर्देश दिए थे। इसमें यह प्रावधान है कि चिन्हित अनाधिकृत कालोनी में एलआईजी एवं ईडब्ल्यूएस वर्ग के रहवासियों से कोई विकास शुल्क नहीं लिया जाएगा, लेकिन एलआईजी एवं ईडब्ल्यूएस वर्ग को सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी प्रमाण-पत्र देना होगा। शेष वर्ग के लिये विकास शुल्क पचास प्रतिशत निर्धारित किया गया है ।



