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तीन साल से नहीं हुई नर्सिंग काँलेज की परीक्षाएँ, गलती सरकारी तंत्र की, सजा छात्रों को

   सिवनी यशो:- शासकीय सेवाओं (government services) से संबंधित प्रतियोगी परीक्षाएँ, प्रशिक्षण और शिक्षा इस प्रकार के क्षेत्र हो गये है कि यहाँ मनमाना फर्जीवाड़ा और भ्रष्टाचार (fraud and corruption) किया जा रहा है । अपने भविष्य को लेकर सुनहरे सपने देख रहे युवाओं को इन फ्राडगिरी में महारत रखने वालों के कारण अनावश्यक परेशान होना पड़ रहा है । सरकारे जांच कर दोषियों को जेल सकती है उसकी संपत्ति जप्त कर सकती है परंतु बेकसूर युवाओं के चकनाचूर हो रहे सपनों के लिये सरकार क्या राहत देगी यह कोई स्पष्ट नहीं करता । इन युवाओं के साथ जो अन्याय होता है जितनी वे मानसिक और आर्थिक परेशानी का समाना करते और उनकी परेशानियों से पूरा परिवार भी परेशान होता है । फ्राड करने वालों को सजा से संबंधित कानून की सारी सजाएँ भी दे दी जाये तो युवाओं को क्या मिलेगा सरकार उन्हें कौन सी राहत दे रही है ।
हजारों लाखो युवा प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली का शिकार हो रहे है लंबे तक कड़ी मेहनत के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होते है और सरकारी तंत्र की व्यवस्था में गड़बडी के कारण परीक्षा के बाद पेपर लीक का समाचार प्रतियोगिता के प्रतिभागियों को अंदर तक हिला कर रख देता है । NT द्वारा आयोजित NEET परीक्षा में हुए फर्जीवाड़े की चर्चा इस समय पूरे देश में हो रही है । इसके पहले भी परीक्षाओं में धांधली चर्चा में रही है ।

 NEET परीक्षा फर्जीवाड़े जैसा ही सरकारी नौकरी के लिये प्रशिक्षण वाले पाठ्क्रमों में फर्जीवाड़ा सरकारी व्यवस्थाओं के भ्रष्ट चरित्र को उजागर करता है । शिकायत के बाद जाँच के नाम पर सालो लग जाते है और जांच चलते रहती है परंतु उन प्रशिक्षण संस्थानों में प्रवेशित छात्रों की चिंता नहीं होती जो सरकार की गंभीर असंवेदनशील चरित्र को चित्रित करती है । मध्यप्रदेश के नर्सिंग घोटाले (Nursing Scams of Madhya Pradesh) में उन छात्रों का क्या दोष है जो वहाँ प्रवेश लेकर शिक्षा प्राप्त कर रहे है । सरकार ने कालेजो को निर्धारित मापदंंड तय कर मान्यता दी अब मान्यता देने वाले जिम्मेदार व्यक्तियों ने भ्रष्ट तरीके से मापदंडों को दरकिनार कर मान्यता दे दी और नसिंंग कालेज प्रारंभ हो गये । शिकायत के बाद सरकार ने जाँच प्रारंभ की अनेक नर्सिंग कालेज बिना मापदंड के पाये गये और जाँच के नाम पर तीन साल तक कालेज संचालकों पर कोई कार्यवाही नहीं हुई वहाँ प्रवेशित छात्र तीन साल से एक ही क्लास में है । इन हजारों छात्रों का क्या कसूर था जो सरकार इन्हें तीन साल तक परेशान करते रही । यहाँ पढऩे वाले छात्र छात्राओं के साथ जबरन अन्याय हो रहा है । प्री नर्सिंग सिलेक्शन टेस्ट (पीएनसीटी) की परीक्षा जुलाई 2023 में आयोजित करवाई गई थी जिसमें 66 हज़ार स्टूडेंट्स ने परीक्षा दी थी। लेकिन आजतक उसका परीक्षा परिणाम जारी नहीं किया गया, वहीं शासकीय नर्सिंग कॉलेजों से पढ़ाई करने वाली छात्राओं को पढ़ाई के बाद नियम अनुसार शासकीय नौकरी दी जाना थी। लेकिन 18 महीने बीतने के बाद भी उनको ज्वाइनिंग नहीं दी गई सभी तरफ से छात्र छात्राएं परेशान हैं।
तीन साल से परीक्षाएँ आयोजित नहीं हुई लाखो छात्र परेशान है कर्ज लेकर पढाई कर रहे है परिवार वाले भी परेशान हो रहे है । न्यायालय के आदेश के कारण परीक्षाएँ नहीं हुई, सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार के कारण गलत तरीको से कुछ ने मान्यता ले ली परंतु इन बेकसूर छात्रों का क्या कसूर है जो तीन साल से परेशान हो रहे है । इनके बारे में गंभीरता से चिंता होना चाहिये ।

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