केवलारी नगर परिषद में अविश्वास प्रस्ताव के लिये 09 पार्षदों ने दिया आवेदन
अविश्वास प्रास्ताव पर 06 सितंबर की तिथि निर्धारित, अनुविभागीय अधिकारी होंगे नोडल अधिकारी
सिवनी यशो:- भाजपा के बहुमत वाली नगर परिषद केवलारी के पार्षदों ने अध्यक्ष के विरूद्ध अनेक तरह के आरोप लगाते हुये 15 में से 09 पार्षदों ने अविश्वास प्रस्ताव लाने का आवेदन सिवनी जिला कलेक्टर को दिया है । जानकारी के अनुसार पार्षदों की मांग पर सिवनी जिला कलेक्टर ने अध्यक्ष पर लगे आरोपों पर चर्चा के लिये 06 सितंबर की तिथि निर्धारित करते हुये केवलारी अनुविभागीय अधिकारी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है ।
हालांकि केवलारी नगर परिषद अपने गठन के समय से ही असंतोष के दौर गुजर रही है । परिषद गठन के दो वर्ष के अंदर इस नगर परिषद ने अनेक प्रकार के विवादों और आरोपों का सामना किया है । इस नगर परिषद में कांग्रेस के पार्षदों की संख्या मात्र तीन है और भाजपा के पार्षदों की संख्या 12 है परंतु भाजपाई परिषद में अविश्वास प्रस्ताव आ जाना भाजपा के लिये चिंता का विषय है ।
परिषद गठन के साथ ही असंतोष के दौर से गुजर रही केवलारी नगर परिषद बनने का जो लाभ केवलारी को मिलना था उससे वह वंचित है । निर्वाचित पार्षदों एवं अध्यक्ष के बीच जो समन्वय होना चाहिये था वह दो वर्ष के बाद भी स्थापित नहीं हुआ और इस असंतोष के कारण विकास के कार्यो को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका । दो वर्ष कार्यकाल पूर्ण होते ही अविश्वास प्रस्ताव लाने के नियम की निर्धारित अवधि के साथ ही पार्षदों ने अनेक तरह के भ्रष्टाचार और अनियमित्ताओं का आरोप युक्त आवेदन देकर अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिये जिला कलेक्टर को आवेदन दे दिया ।
यहाँ पार्षदों का कहना है कि जनता को नगर परिषद के द्वारा आवश्यक सुविधाएँ नहीं दी जा रही है, पेयजल की सप्लाई संतोषजनक नहीं है, सफाई, प्रकाश की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है । जो कार्य हुये है उनमें भारी भ्रष्टाचार हो रहा है, नगर की जनता परेशान है जिससे वार्ड की जनता पार्षदों पर आक्रोशित होती है और पार्षदों का कहना है कि इन्हीं मजबूरियों के कारण अविश्वास प्रस्ताव लाने का विचार किया गया है । परिषद के 09 पार्षदों ने नगरीय निकाय अधिनियम धारा 43 क के तहत मध्य प्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 43 (क) (2 ) के तहत अविश्वास प्रस्ताव हेतु बैठक आहूत करने के लिए आवेदन दिया है ।
हालांकि मध्यप्रदेश सरकार की मंत्रीपरिषद ने पिछले दिनों नगरीय निकायों में अध्यक्ष के विरूद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाने के नियम में संशोधन कर दिया है । जिसके अनुसार नगर परिषद अध्यक्ष को हटाने के लिए दो तिहाई बहुमत आवश्यक होने के स्थान पर तीन चौथाई बहुमत की अनिवार्यता करते हुये अध्यक्ष के खिलाफ 3 साल अवधि पूर्ण होने पश्चात अविश्वास प्रस्ताव लाने की शर्त शामिल की है परंतु इसका प्रकाशन अभी राजपत्र में नहीं होने के कारण इसका अविश्वास प्रस्ताव पर क्या असर होगा स्पष्ट नहीं है । नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 43 a में संशोधन मान्य होगा या नहीं यह कानूनी पहलू है ।



