क्या होगा नपा अध्यक्ष शफीक खान का बचेंगे या हटेंगे ? भविष्य करेंगा निर्धारित
नपा अध्यक्ष शफीक खान ने आधा सैकड़ा पृष्टों का दिया जबाव
अध्यक्ष बनने के दावेदार सक्रिय, पार्षदों को साधने में जुटे
सिवनी यशो:- दीपावली होते ही सिवनी नगर पालिका अध्यक्ष शफीक खान नगरीय प्रशासन विभाग से मिले नोटिस का जबाव देने भोपाल पहुँचे तथा उन्होंने मिले नोटिस पर लगे आरोपो का बिंदूवार जबाव प्रस्तुत कर दिया है । उनके द्वारा दिये गये जबाव को शासन कितनी गंभीरता से लेता है यह तो भविष्य के गर्त में है परंतु अध्यक्ष बनने के सपने संयोजए बैठे दावेदारों के चेहरे खिले हुये दिखाई दे रहे है और पार्षदों को साधने का क्रम प्रारंभ हो चुका है । जिस तरह से पार्षदों की खुशामद हो रही है उससे प्रतीत हो रहा है कि शफीक खान की अध्यक्ष पद से विदाई की इबारत राजनैतिक तौर पर अमिट स्याही से लिख दिये जाने का दावेदारों को विश्वास दिला दिया गया है ।
सिवनी नगर पालिका में अध्यक्ष शफीक के खान के कार्यकाल में भारी भ्रष्टाचार और अनियमित्ताओं के आरोप से संबंधित शिकायत के आधार पर उच्च स्तरीय जाँच कमेटी ने कई दिनों तक जाँच की और उस जाँच के आधार पर अध्यक्ष शफीक खान को जिम्मेदार बताते हुये 15 दिन की समय सीमा में जबाव तलब किया गया था हालांकि नपा अध्यक्ष श्री खान ने जबाव के लिये समय बढ़ाने की मांग की थी जिसे मानते हुये नगरीय प्रशासन ने उन्हें अतिरिक्त समय दिया था । अतिरिक्त समय सहित निर्धारित समय सीमा में नपा अध्यक्ष श्री खान ने प्रदेश के नामी अधिवक्ताओं की सलाह के आधार पर समस्त लगे आरोपों का बिंदूबार जबाव लगभग आधा सैकड़ा पृष्टों में तैयार कर प्रस्तुृत किया है । हालांकि उन्होंने आरोपो का जबाव क्या दिया है यह जानकारी प्राप्त नहीं हो सकी है परंतु सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार जबाव अधिवक्ताओं ने तर्क पूर्ण दिये है और कानूनी तौर पर अध्यक्ष पर आँच नहीं आ सकती ऐसा विश्वास दिलाया गया है ।
वही दूसरी ओर अध्यक्ष पद के अन्य दावेदार और अध्यक्ष श्री खान के विरोधियों का कहना है कि नपा अध्यक्ष जबाव कुछ भी दे उनके भ्रष्टाचार इतने प्रमाणिक है कि वे अपना पद बचा नहीं पायेंगे । यहाँ नपा अध्यक्ष जबाव प्रस्तुत कर रहे है तो दूसरी ओर अन्य दावेदार अध्यक्ष बनने की तैयारियों में जुट गये है । अध्यक्ष पद बचाने और हटाने की मुहिम का अंत कैसा होगा यह भविष्य निर्धारित करेगा । फिलहाल इस झगड़े में नगर विकास और अन्य व्यवस्थाएँ अस्त व्यस्त है । पूरा अमला भ्रष्टाचार और अनियमित्ताओं के आरोपों की जद में है तथा अपने अपने ऊपर लगे आरोपों की सफाई देने में जुटा हुआ है और जिन आरोप नहीं है वे अनिश्चित्ता में है ।





