मध्यप्रदेशसिवनी

मूल अधिकारों से वंचित बेलगांव का बुजुर्ग, न आधार कार्ड न वोटर आईडी

60 वर्षीय गुलाब सिंह उईके वर्षों से पहचान संबंधी दस्तावेजों के अभाव में सरकारी योजनाओं से दूर

उगली/केवलारी यशो :- आधुनिक दौर में जहां पहचान संबंधी दस्तावेज प्रत्येक नागरिक की अनिवार्य आवश्यकता बन चुके हैं, वहीं सिवनी जिले की केवलारी विधानसभा अंतर्गत ग्राम पंचायत बेलगांव में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने शासन-प्रशासन की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बेलगांव निवासी 60 वर्षीय गुलाब सिंह उईके आज भी अपने मूल अधिकारों और सरकारी सुविधाओं से वंचित जीवन जीने को मजबूर हैं।

मीडिया से चर्चा के दौरान गुलाब सिंह उईके ने बताया कि उनके पास आज तक किसी भी प्रकार का पहचान पत्र नहीं है। न उनके पास आधार कार्ड है, न मतदाता परिचय पत्र और न ही राशन कार्ड। परिवार में पत्नी और एक पुत्र होने के बावजूद वे शासन की मूलभूत योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं।

ग्राम पंचायत स्तर पर जानकारी लेने पर पता चला कि दस्तावेजों के अभाव में उन्हें वृद्धावस्था पेंशन योजना का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। मामले में बीएलओ श्री भावरें से चर्चा करने पर उन्होंने बताया कि आवश्यक दस्तावेज नहीं होने के कारण मतदाता परिचय पत्र बन पाना संभव नहीं हो पा रहा है। वहीं गुलाब सिंह उईके ने बताया कि वे जिला मुख्यालय स्थित आधार कार्ड सेंटर में भी कई बार संपर्क कर चुके हैं, लेकिन अब तक आधार कार्ड नहीं बन पाया।

सूत्रों के अनुसार गुलाब सिंह उईके ने तीसरी कक्षा तक पढ़ाई भी की थी। स्कूल प्रमाण पत्र के आधार पर दस्तावेज तैयार कराने का प्रयास किया गया, लेकिन विद्यालय में पुराने रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिले। कुछ रिकॉर्ड दीमक लगने से नष्ट हो चुके हैं।

जानकारी के अनुसार गुलाब सिंह उईके के पास लगभग 9 से 10 एकड़ निजी कृषि भूमि भी है, लेकिन दस्तावेजी समस्याओं और पारिवारिक उपेक्षा के कारण उनका जीवन बदहाल बना हुआ है। बताया जाता है कि उनका पुत्र भी उनका उचित पालन-पोषण नहीं करता और खेती ठेके पर देकर स्वयं आय अर्जित करता है।

हाल ही में ग्राम पंचायत बेलगांव में आयोजित नेत्र शिविर में जब गुलाब सिंह उईके आंखों का उपचार कराने पहुंचे, तब निजी चिकित्सालय की टीम द्वारा आधार कार्ड मांगा गया। इस पर उन्होंने बताया कि उनके पास कोई भी पहचान संबंधी दस्तावेज नहीं है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार आजीविका की तलाश में गुलाब सिंह उईके कई वर्षों तक दूसरे राज्य में रहे। लंबे समय बाद गांव लौटने पर उनका नाम मतदाता सूची से हट चुका था और आधार सहित अन्य दस्तावेज भी नहीं बन पाए। वर्तमान में वे मतदान के अधिकार से भी वंचित हैं।

ग्रामीणों एवं सामाजिक लोगों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए गुलाब सिंह उईके के आवश्यक दस्तावेज शीघ्र तैयार कराए जाएं, ताकि वे शासन की योजनाओं एवं नागरिक अधिकारों का लाभ प्राप्त कर सकें।

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