एक सिंह को एक गधे ने चुनौती दे दी कि मुझसे निपट ले। सिंह चुपचाप सरक गया। एक लोमड़ी छुपी देखती थी, उसने कहा कि बात क्या है? एक गधे ने चुनौती दी और आप जा रहे हैं?
सिंह ने कहा, मामला ऐसा है, गधे की चुनौती स्वीकार करने का मतलब मैं भी गधा। वह तो गधा है ही। उसकी चुनौती से ही जाहिर हो रहा है। किसको चुनौती दे रहा है? पागल हुआ है, मरने जा रहा है।
फिर दूसरी बात भी है कि गधे की चुनौती मान कर उससे लड़ना अपने को नीचे गिराना है। गधे की चुनौती को मानने का मतलब ही यह होता है कि मैं भी उसी तल का हूं। जीत तो जाऊंगा निश्चित ही, इसमें कोई मामला ही नहीं है। जीतने में कोई अड़चन नहीं है। एक झपट्टे में इसका सफाया हो जाएगा।
मैं जीत जाऊंगा तो भी प्रशंसा थोड़े ही होगी कुछ! लोग यही कहेंगे क्या जीते, गधे से जीते! और कहीं भूल चूक यह गधा जीत गया तो सदा सदा के लिए बदनामी हो जाएगी, इसलिए भागा जा रहा हूं। इसलिए चुपचाप सरका जा रहा हूं कि यह चुनौती स्वीकार करने जैसी नहीं है।
इस प्रसंग में जीवन का बहुत सूंदर सूत्र दिया गया हैँ कि यदि आप सिंह के समान बलशाली और बुद्धिमान हैँ तो पीछे हट जाइये। आप अपने काम से कही जाओगे जैसे- बाजार, दुकान, ऑफिस व अन्य कोई भी जगह तो आपको दिनभर में ऐसे बीसों गधे मिलेंगे, जो आपसे टकराने व चुनौती देने के मुड़ में होंगे, पर आपको किसी से टकराना नहीं हैँ। टकराने से संघर्ष बढेगा, मन की शांति भंग होगी, टकराव किसी समस्या का हल नहीं हैँ, शांति ही सबसे अच्छी मित्र हैँ, शांति ॐ शांति।






