महाराष्ट्र चुनाव (Maharashtra elections) के ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी ने चीख – चीख कर महाराष्ट्र सहित पूरे देश भर में घूम घूम कर कहा कि बंटोगे तो कटोगे, एक हो तो सेफ हो परंतु भाजपा के विरोधी इस नारे में उनके लिये दी गयी नसीहत समझे नहीं और नारे को सांप्रदायिक रंग देने में लगे रहे । जिससे भाजपा को नुकसान नहीं लाभ हुआ । कांग्रेस नेता राहुल गांधी सेफ खोलकर कुछ भी बताते रहे परंतु भाजपा की बात मानना उन्हें क्या विरोधी दल के किसी नेता को मंजूर नहीं था वह भाजपा की हर बात को विरोध में मानते है । हालांकि एक हो तो सेफ हो और बटोगे तो कटोगे जैसे नारे को कांग्रेस सहित उसके सहयोगी दल मान लेते तो सत्ता में होते । भाजपा ने एक हो तो सेफ हो और बटोगे तो कटोगे का नारा उसी प्रकार से दिया था जिस प्रकार से खुली चेतावनी दी जाती है कि सुधर जाओ नहीं तो हाल बुरा होगा ।
भाजपा ने अपने विरोधियों को यह अच्छी सलाह दी थी कि एक रहो, बटोगे तो कटोगे परंतु विरोधियों ने अपनी आदत के मुताविक इस सलाह का दुस्प्रचार किया और भाजपा को सांप्रदायिक बताते हुये नारे को हिन्दू और गैर हिन्दुओं के अर्थ में प्रचारित कर भाजपा के स्टार प्रचारक बनकर भाजपा के पक्ष में काम किया ।
महाराष्ट्र चुनाव का जो हाल रहा वह अजीब था राष्टवादी कांग्रेस के विरोध में राष्टवादी कांग्रेस, शिवसेना के विरोध में शिवसेना और यहाँ तक कह सकते है कि कांग्रेस के विरोध में कांग्रेसी चुनाव लड़ रहे थे । यदि भाजपा की बात मान लेते और एक रहते तो सेफ रहते और दावे के साथ कह सकते है कि यदि सभी एक रहते तो भाजपा को उतनी सीटे मिलना भी मुश्किल होता जितनी महाराष्ट विकास अघाडी गठबंधन को प्राप्त हुई हंै ।
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