भागवत कथा का दिव्य असर: 4 आध्यात्मिक रहस्यों से भाव-विभोर हुए श्रद्धालु, पं. प्रेमकृष्ण शास्त्री का प्रेरक संदेश
‘गूगल को गुरु न बनाएं’ का सशक्त संदेश, भीष्म स्तुति और चतुःश्लोकी भागवत का हुआ रसपान
सिवनी भागवत कथा: 4 रहस्यों से भाव-विभोर श्रद्धालु, गूगल पर भरोसे को लेकर चेतावनी
Seoni 09 April 2026
सिवनी यशो:- नगर के राजश्री पैलेस में आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के चतुर्थ दिवस का वातावरण पूर्णतः भक्तिमय और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत रहा। कथा व्यास पं. प्रेमकृष्ण शास्त्री जी के श्रीमुख से प्रवाहित भागवत अमृत ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।

भीष्म स्तुति और चतुःश्लोकी भागवत का दिव्य वर्णन
चतुर्थ दिवस की सिवनी भागवत कथा में पं. प्रेमकृष्ण शास्त्री जी ने भीष्म पितामह की स्तुति का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भीष्म पितामह ने अपने अंतिम समय में भगवान का 11 श्लोकों में ध्यान किया।
इसके पश्चात चतुःश्लोकी भागवत का वर्णन करते हुए बताया गया कि भगवान विष्णु ने ब्रह्मा जी को चार श्लोकों में सम्पूर्ण भागवत का सार बताया, जिसमें भगवान के स्वरूप, माया, जगत और जिज्ञासु का वर्णन शामिल है।

‘गूगल को गुरु न बनाएं’—कथाव्यास का सशक्त संदेश
कथा के दौरान कथाव्यास ने कहा कि गूगल की जानकारी पर आंख बंद करके विश्वास नहीं करना चाहिए। उन्होंने एक प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि गूगल द्वारा महर्षि वाल्मीकि के संबंध में गलत जानकारी दी गई थी, जिसे बाद में सुधारा गया।
अवतारों की कथा और भक्तिमय वातावरण
सिवनी भागवत कथा में सनकादिक, नारद, वराह और कपिल अवतारों का विस्तृत वर्णन किया गया। साथ ही श्रद्धालुओं से अपील की गई कि अगले दिवस भगवान के अवतरण प्रसंग में पीत वस्त्र धारण कर श्रद्धा के साथ उपस्थित हों।
मोबाइल से दूरी, परिवार से जुड़ाव का संदेश
सिवनी भागवत कथा के विराम पर आचार्य पं. सनत कुमार उपाध्याय जी ने कथाव्यास की विद्वत्ता की सराहना करते हुए इसे “भक्ति और ज्ञान का अद्भुत संगम” बताया। उन्होंने परिवारों से मोबाइल की आभासी दुनिया से बाहर निकलकर आपसी संवाद बढ़ाने और बच्चों को मोबाइल से दूर रखने की सलाह दी।
सिवनी भागवत कथा के अवसर पर पं. जानकी वल्लभ मिश्र जी की गरिमामय उपस्थिति ने आयोजन को और अधिक दिव्यता प्रदान की।





