टाइगर स्टेट में टाइगर्स ही असुरक्षित: कान्हा में बाघिन ‘सुनैना’ की मौत, प्रबंधन पर उठे गंभीर सवाल
T-122 का शव मिलने से हड़कंप, ‘आपसी संघर्ष’ की थ्योरी पर बहस—क्या क्षमता से ज्यादा हो गए बाघ?
कान्हा बाघिन मौत – सुनैना की मौत, प्रबंधन पर सवाल
Mandla 09 April 2026
मंडला यशो:- कान्हा बाघिन मौत का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। विश्व प्रसिद्ध कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघिन T-122 ‘सुनैना’ का शव मिलने के बाद बाघिन की मौत को लेकर प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

कान्हा बाघिन मौत: ‘आपसी संघर्ष’ या बड़ी चूक?
अधिकारियों के अनुसार यह बाघिन की मौत आपसी संघर्ष का मामला है, लेकिन लगातार हो रही घटनाएं इस थ्योरी पर सवाल खड़े करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हर कान्हा बाघिन मौत को सिर्फ संघर्ष बताना पर्याप्त नहीं है।
गश्त के बावजूद क्यों बढ़ रही मौत?
पार्क में गश्ती दल की मौजूदगी के बावजूद कान्हा बाघिन मौत जैसी घटनाएं रुक नहीं रही हैं। इससे साफ संकेत मिलता है कि निगरानी तंत्र में कहीं न कहीं कमी है।
विशेषज्ञों की राय: बढ़ती संख्या भी वजह
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार कान्हा बाघिन मौत का एक बड़ा कारण बाघों की संख्या का वहन क्षमता से अधिक होना है, जिससे क्षेत्रीय संघर्ष बढ़ रहा है।
मौत के प्रमुख कारण
- क्षेत्रीय संघर्ष: बाघों के बीच जानलेवा लड़ाई
- पर्यावास का दबाव: कॉरिडोर में मानव हस्तक्षेप
- शिकार और बिजली: अवैध गतिविधियां
- उम्र और बीमारी: बुजुर्ग बाघों की कमजोरी
आंकड़ों में स्थिति
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| मृत बाघिन | सुनैना (T-122) |
| मौत का कारण | संभावित आपसी संघर्ष |
| 2025 में कुल मौतें | 55 |
| 2026 में अब तक | लगभग 16 |
सिर्फ संख्या नहीं, सुरक्षा जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि बाघिन की मौत जैसी घटनाओं को रोकने के लिए केवल संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि बेहतर मॉनिटरिंग, कॉरिडोर और सुरक्षा तंत्र विकसित करना बेहद जरूरी है।





