117 एजेंडों ने बढ़ाया सियासी पारा: सिवनी नगर पालिका परिषद की बैठक पर कांग्रेस का बड़ा हमला, सीएमओ की वैधता पर भी उठे सवाल
दो दिन पहले थमाया गया 117 विषयों का एजेंडा, कांग्रेस बोली– नियमों को दरकिनार कर कराए जा रहे फैसले। एक ही दिन दो सीएमओ की स्थिति से बैठक की वैधानिकता पर भी सवाल।
सिवनी नगर पालिका 117 एजेंडे पर विवाद, कांग्रेस ने बैठक की वैधता पर उठाए सवाल पर कांग्रेस का विरोध, नियमों के उल्लंघन का लगाया आरोप
Seoni 05 July 2026
सिवनी यशो:- सिवनी नगर पालिका परिषद की 6 जुलाई को प्रस्तावित साधारण बैठक बैठक से पहले ही विवादों के घेरे में आ गई है। कांग्रेस पार्षद दल ने पत्रकार वार्ता कर कार्यकारी अध्यक्ष ज्ञानचंद सनोडिया पर मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 के प्रावधानों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है।
कांग्रेस का कहना है कि बैठक में 117 विषयों का एजेंडा रखा गया है, जो अपने आप में असाधारण और गंभीर विषय है।
उनका सवाल है कि इतने कम समय में पार्षद इन सभी प्रस्तावों का अध्ययन और परीक्षण कैसे कर सकते हैं।
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कांग्रेस पार्षदों के अनुसार अधिनियम की धारा 56 के तहत परिषद की बैठक का एजेंडा कम से कम सात दिन पहले उपलब्ध कराया जाना चाहिए,
जबकि 117 विषयों वाली कार्यसूची बैठक से महज दो दिन पहले, वह भी अवकाश के दौरान पार्षदों को दी गई।
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उनका आरोप है कि इससे पार्षदों को संबंधित फाइलों और नस्तियों का अध्ययन करने का अवसर ही नहीं मिला।
117 विषयों पर जल्दबाजी क्यों?
कांग्रेस पार्षद दल ने सवाल उठाया कि जब अधिकांश विषय पीआईसी (प्रेसीडेंट-इन-काउंसिल) से संबंधित हैं, तब पीआईसी की बैठक बुलाए बिना सीधे परिषद के सामने इतने बड़े पैमाने पर प्रस्ताव क्यों लाए गए?
उनका आरोप है कि कई प्रस्तावों की फाइलें भी पूरी तरह तैयार नहीं हैं और अधूरी जानकारी के आधार पर स्वीकृति लेने का प्रयास किया जा रहा है।
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सामग्री खरीदी पर भी उठाए सवाल
पत्रकार वार्ता में कांग्रेस ने आरोप लगाया कि एजेंडे में बड़ी संख्या में सामग्री खरीद से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं, जबकि नगर पालिका के पास पहले से उपलब्ध ट्रैक्टर, ट्रॉली, हाथगाड़ी, चलित शौचालय और अन्य संसाधन मरम्मत के अभाव में अनुपयोगी पड़े हैं।
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कांग्रेस का आरोप है कि नई खरीदी को प्राथमिकता देना संदेह पैदा करता है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
मुख्य नगर पालिका अधिकारी की वैधानिक स्थिति पर भी प्रश्न
कांग्रेस पार्षद दल ने एक और महत्वपूर्ण मुद्दा उठाते हुए कहा कि वर्तमान में नगर पालिका में मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) की आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं है।
उनका कहना है कि दो अधिकारियों को सीएमओ का प्रभार दिए जाने की स्थिति बनी हुई है और उनमें से एक अधिकारी की सुनवाई भी 6 जुलाई को निर्धारित है।
ऐसे में यह प्रश्न उठ रहा है कि परिषद की बैठक में अधिकृत मुख्य नगर पालिका अधिकारी कौन होगा और बैठक की प्रशासनिक एवं कानूनी वैधता क्या होगी।
कलेक्टर से करेंगे हस्तक्षेप की मांग
कांग्रेस पार्षद दल ने घोषणा की कि वह जिला कलेक्टर से मिलकर प्रस्तावित बैठक को स्थगित करने, पहले पीआईसी की बैठक आयोजित कराने, सभी पार्षदों को नियमानुसार दस्तावेजों के अध्ययन का पर्याप्त समय देने तथा मुख्य नगर पालिका अधिकारी की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही परिषद की साधारण बैठक बुलाने की मांग करेगा।
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समाचार लिखे जाने तक कांग्रेस पार्षद दल द्वारा लगाए गए आरोपों पर नगर पालिका प्रशासन अथवा कार्यकारी अध्यक्ष का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका था। पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

