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17 साल का इंतजार खत्म! विंध्य की प्यास बुझाएगी देश की सबसे लंबी जल सुरंग

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज करेंगे स्लीमनाबाद टनल का निरीक्षण, 6 जिलों की 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि को मिलेगा स्थायी सिंचाई का लाभ

ऐतिहासिक उपलब्धि: देश की सबसे लंबी स्लीमनाबाद जल सुरंग का निरीक्षण करेंगे CM मोहन यादव, 1450 गांवों को मिलेगा सिंचाई लाभ

Bhopal 16 July 2026
भोपाल/कटनी यशो:- मध्यप्रदेश के सिंचाई इतिहास की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल स्लीमनाबाद जल सुरंग अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार को कटनी जिले में देश की सबसे लंबी और तकनीकी रूप से सबसे जटिल जल सुरंग का निरीक्षण करेंगे।

लगभग 11.952 किलोमीटर लंबी यह सुरंग विंध्य पर्वतमाला के भीतर से नर्मदा का जल प्राकृतिक गुरुत्वाकर्षण (ग्रेविटी फ्लो) के माध्यम से सोन नदी के कछार तक पहुंचाएगी।

देश की सबसे लंबी स्लीमनाबाद जल सुरंग का निरीक्षण करते मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
कटनी की स्लीमनाबाद जल सुरंग, जहां मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव निरीक्षण करेंगे। परियोजना से 1450 गांवों को सिंचाई सुविधा मिलेगी।

परियोजना के पूर्ण होने पर जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना जिले के लगभग 1450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इससे विंध्य और महाकौशल क्षेत्र की कृषि व्यवस्था में व्यापक बदलाव आने की उम्मीद है।

📌 स्लीमनाबाद जल सुरंग : एक नजर में
▶ देश की सबसे लंबी जल सुरंग 11.952 किमी
▶ परियोजना प्रारंभ वर्ष 2008
▶ कुल लागत ₹ 1610.47 करोड़
▶ निर्माण प्रगति 96.66% पूर्ण
▶ लाभान्वित जिले जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, रीवा एवं पन्ना
▶ लाभान्वित गांव लगभग 1450
▶ सिंचाई क्षेत्र 2.45 लाख हेक्टेयर
▶ विशेषता बिना बिजली, केवल ग्रेविटी फ्लो से नर्मदा का जल पहुंचेगा
▶ मुख्यमंत्री का निरीक्षण 17 जुलाई, कटनी (स्लीमनाबाद टनल)
💧 नर्मदा का जल विंध्य की धरती तक पहुंचाने वाली मध्यप्रदेश की सबसे महत्वाकांक्षी सिंचाई परियोजना

17 वर्षों की भू-गर्भीय चुनौती के बाद मिली सफलता

वर्ष 2008 में शुरू हुई इस परियोजना को विंध्य क्षेत्र की कठिन भूगर्भीय परिस्थितियों के कारण कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

चूना पत्थर, डोलोमाइट, भूमिगत जल रिसाव और कमजोर चट्टानों के कारण कार्य कई बार प्रभावित हुआ। परियोजना के दौरान प्रति मिनट हजारों लीटर पानी का रिसाव भी बड़ी चुनौती बना।

इन परिस्थितियों से निपटने के लिए अत्याधुनिक जर्मन मशीनों, विशेष ग्राउटिंग तकनीक और आधुनिक डी-वॉटरिंग सिस्टम का उपयोग किया गया। अब सुरंग का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है और अंतिम चरण का कार्य शेष है।

बिजली नहीं, गुरुत्वाकर्षण से पहुंचेगा नर्मदा का जल

यह देश की पहली ऐसी बड़ी जल परियोजनाओं में शामिल है, जिसमें नर्मदा का पानी बिना किसी पंप या बिजली के केवल ग्रेविटी फ्लो के माध्यम से विंध्य क्षेत्र तक पहुंचेगा। इससे ऊर्जा की बचत के साथ सिंचाई व्यवस्था अधिक टिकाऊ और किफायती बनेगी।

1610 करोड़ से अधिक की लागत वाली परियोजना

परियोजना की प्रारंभिक स्वीकृत लागत वर्ष 2008 में 799 करोड़ रुपये थी। कठिन तकनीकी परिस्थितियों और अतिरिक्त निर्माण कार्यों के कारण अब तक इस पर 1610.47 करोड़ रुपये व्यय किए जा चुके हैं। इसमें सुरंग निर्माण, डी-वॉटरिंग सिस्टम, वर्टिकल शाफ्ट, केमिकल ग्राउटिंग और अन्य तकनीकी कार्य शामिल हैं।

96 प्रतिशत से अधिक कार्य पूरा

परियोजना का 96.66 प्रतिशत भौतिक कार्य पूरा हो चुका है। 12.135 किलोमीटर लंबी ओपन कट नहर और 11.952 किलोमीटर लंबी मुख्य जल सुरंग का निर्माण पूर्ण हो चुका है। शेष कार्य भी तेजी से अंतिम चरण में है।

किसानों के लिए तैयार रोडमैप

राज्य सरकार के अनुसार मार्च 2026 तक 44,160 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा शुरू की जा चुकी है। दिसंबर 2026 तक इसे बढ़ाकर 87,433 हेक्टेयर तथा दिसंबर 2027 तक 1,54,693 हेक्टेयर क्षेत्र तक सिंचाई पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का निरीक्षण दौरा परियोजना की प्रगति की समीक्षा के साथ-साथ विंध्य और महाकौशल क्षेत्र में सिंचाई विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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