सरेखा-लालोपर मार्ग पर फिर बाढ़ का संकट, एक घंटे तक नाले किनारे फंसे स्कूली बच्चे, पुलिया निर्माण की मांग फिर तेज
सरेखा-लालोपर मार्ग पर बाढ़ का संकट, एक घंटे तक नाले किनारे फंसे स्कूली बच्चे
सिवनी/केवलारी यशो :- केवलारी विकासखंड के सरेखा-लालोपर मार्ग की वर्षों पुरानी समस्या एक बार फिर बरसात के मौसम में सामने आ गई। नाले में अचानक आए उफान के कारण स्कूल से लौट रहे मासूम छात्र-छात्राएं लगभग एक घंटे तक नाले के दोनों किनारों पर फंसे रहे। घटना के बाद ग्रामीणों ने स्थायी पुल या पुलिया निर्माण की मांग एक बार फिर तेज कर दी है।
स्कूल से लौटते समय बढ़ गया नाले का जलस्तर
जानकारी के अनुसार, सरेखा और लालोपर गांवों को सिवनी-मंडला मुख्य मार्ग से जोड़ने वाले नाले पर पुल या पुलिया नहीं होने के कारण हर वर्ष बरसात में आवागमन बाधित हो जाता है।
शुक्रवार शाम स्कूल की छुट्टी के बाद करीब 5:10 बजे छात्र-छात्राएं नाले तक पहुंचे, लेकिन तब तक पानी तेजी से बढ़ चुका था। शाम 6 बजे तक भी जलस्तर कम नहीं हुआ, जिससे बच्चे और उनके परिजन दोनों ओर बेबस खड़े रहे।
हर साल प्रभावित होती है बच्चों की पढ़ाई
ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई नई समस्या नहीं है। बरसात के दिनों में करीब 100 से 150 छात्र-छात्राएं कई दिनों तक स्कूल और कॉलेज नहीं पहुंच पाते हैं। इससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है और परीक्षा की तैयारी पर भी असर पड़ता है।
जनसुनवाई में भी उठ चुकी है मांग
कुछ दिन पहले केवलारी में आयोजित जनसुनवाई के दौरान सरेखा और लालोपर के ग्रामीणों, महिलाओं, बुजुर्गों तथा स्कूली बच्चों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर नाले पर स्थायी पुल या पुलिया निर्माण की मांग की थी।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस दिशा में कार्रवाई होती, तो बच्चों को हर वर्ष इस तरह जोखिम का सामना नहीं करना पड़ता।
प्रशासन की व्यवस्था पर भी उठे सवाल
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि नाला उफान पर होने के बावजूद मौके पर न तो पुलिस बल मौजूद था और न ही प्रशासन की ओर से कोई कर्मचारी तैनात किया गया था, जो लोगों को जोखिम भरे रास्ते से गुजरने से रोक सके। ऐसे में यदि कोई दुर्घटना होती, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होती, यह बड़ा सवाल है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
नाले पर शीघ्र स्थायी पुल या पुलिया का निर्माण कराया जाए।
निर्माण होने तक बरसात में वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था की जाए।
स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए पुलिस या प्रशासनिक कर्मचारियों की तैनाती सुनिश्चित की जाए।
बरसात के दौरान जोखिम वाले स्थानों पर चेतावनी बोर्ड और सुरक्षा इंतजाम किए जाएं।
बच्चों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल
सरेखा-लालोपर मार्ग की यह समस्या वर्षों से चली आ रही है, लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो सका है। हर बरसात में स्कूली बच्चों और ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर आवागमन करना पड़ता है।
अब देखना होगा कि इस बार जिला प्रशासन और शासन इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान निकालते हैं या फिर यह मुद्दा भी हर वर्ष की तरह केवल आश्वासनों तक सीमित रह जाएगा।
फोटो कैप्शन: उफनते नाले के दोनों किनारों पर फंसे स्कूली छात्र-छात्राएं और उनके परिजन।



